हरीश राणा के निधन के बाद पहली बार कैमरे पर बोले पिता, CM योगी-सुप्रीम कोर्ट और पड़ोसियों को दिया धन्यवाद

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान 2013 में हुए हादसे के बाद 13 साल तक बिस्तर पर जिंदगी और मौत से लड़ने वाले हरीश राणा अब शांत हो गए हैं. उनके पिता अशोक राणा ने नम आंखों से अस्थियां संचित कीं और इस लंबी कानूनी व मानवीय लड़ाई में साथ देने वालों का आभार जताया.

Advertisement
पिता ने हरीश राणा को दी नम आंखों से विदाई (Photo- Screengrab) पिता ने हरीश राणा को दी नम आंखों से विदाई (Photo- Screengrab)

aajtak.in

  • गाजियाबाद ,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:51 PM IST

परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (PVS) में 13 साल तक संघर्ष करने वाले हरीश राणा का निधन हो गया है और उनके परिजन गुरुवार को अस्थियां संचित करने पहुंचे. हरीश के पिता अशोक राणा ने इस दुखद घड़ी में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सर्वोच्च न्यायालय के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की. साल 2013 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान एक हादसे ने हरीश को बिस्तर पर ला दिया था, जिसके बाद से परिवार उनके मान और हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा था. अब परिवार अस्थियां लेकर हरिद्वार और फिर अपने पैतृक गांव हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गया है, जहां विधि-विधान से अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी.

Advertisement

सीएम योगी और सुप्रीम कोर्ट का जताया आभार

अशोक राणा ने भावुक होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया, जिन्होंने जिलाधिकारी, जीडीए वीसी और कमिश्नर को उनके घर भेजकर सहायता का आश्वासन दिया. सरकार ने परिवार को 10 लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की है. 

इसके साथ ही राणा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पारदीवाला और न्यायमूर्ति विश्वनाथन के मानवीय निर्देशों की सराहना की. उन्होंने ने एम्स (AIIMS) की मेडिकल टीम और अपनी कानूनी टीम का भी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इस कठिन स्वास्थ्य और कानूनी जंग में उनका मार्गदर्शन किया.

पड़ोसियों ने निभाया इंसानियत का धर्म

दुख की इस घड़ी में मानवीय संवेदनाओं की भी एक मिसाल देखने को मिली. अशोक राणा ने बताया कि उनकी सोसाइटी के अरविंद कुमार जैसे पड़ोसियों ने रात-दिन उनके मेहमानों के लिए भोजन बनाया और सेवा की. चूंकि धार्मिक रीति-रिवाजों के कारण शोक संतप्त घर में चूल्हा नहीं जल सकता था, इसलिए पड़ोसियों ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली. हिमाचल प्रदेश से आए करीबियों ने बताया कि परिवार ने पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए अभी तक अन्न ग्रहण नहीं किया है.

Advertisement

हरिद्वार से हिमाचल तक की अंतिम यात्रा

हरीश राणा की अस्थियों को हरिद्वार में विसर्जित करने के बाद परिवार हिमाचल प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव जाएगा. गांव में ही 13वीं का संस्कार और अन्य धार्मिक क्रियाएं संपन्न की जाएंगी. 13 साल के लंबे और कष्टकारी इंतजार के बाद अब हरीश की आत्मा को शांति मिली है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement