UP: डीवॉर्मिंग ड्राइव में बांटी गई दवाओं के सेवन से बिगड़ी 120 बच्चों की तबीयत, कराना पड़ा भर्ती

डीवॉर्मिंग ड्राइव में बांटे गए टैबलेट के सेवन से मैनपुरी और फर्रुखाबाद में 120 से ज्यादा बच्चों की तबीयत खराब हो गई. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.

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दवा के सेवन से बच्चों की बिगड़ी तबीयत.  (Photo: Representational ) दवा के सेवन से बच्चों की बिगड़ी तबीयत. (Photo: Representational )

aajtak.in

  • मैनपुरी,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद और मैनपुरी जिलों में स्कूलों में डीवॉर्मिंग ड्राइव (पेट के कीड़े मारने की ड्राइव)चलाया गया था. इस दौरान करीब 120 स्टूडेंट्स बीमार हो गए. जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. अधिकारियों ने बताया कि बच्चों को एल्बेंडाजोल टैबलेट दिए जाने के तुरंत बाद सिरदर्द और उल्टी की शिकायत हुई.

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दवाई से 120 बच्चे हुए बीमार

फर्रुखाबाद में यह घटना मंगलवार को कमालगंज ब्लॉक के राठौरा मोहद्दीनपुर गांव के जवाहर लाल प्रेमा देवी स्कूल में हुई. जिन करीब 150 स्टूडेंट्स को दवा दी गई थी, उनमें से करीब 100 ने बेचैनी की शिकायत की. जिससे पेरेंट्स और स्कूल अधिकारियों में घबराहट फैल गई.

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अधिकारियों के मुताबिक 33 स्टूडेंट्स को कमालगंज के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया. जबकि 67 अन्य को डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर के लोहिया हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आशुतोष कुमार द्विवेदी ने स्थिति पर नज़र रखने के लिए लोहिया हॉस्पिटल का दौरा किया और डॉक्टरों को सही इलाज पक्का करने का निर्देश दिया. 

चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. अवनींद्र कुमार ने कहा कि जिले भर के स्कूलों में डीवॉर्मिंग कैंपेन चलाया गया. डॉ. कुमार ने कहा कि इस खास स्कूल के स्टूडेंट्स ने सिरदर्द और उल्टी की शिकायत की. सभी स्टेबल हैं और उनकी हालत अब नॉर्मल है. 

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डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने कहा कि गोलियां पूरे जिले में दी गईं, तकलीफ की खबरें सिर्फ इसी स्कूल तक सीमित थीं. उन्होंने कहा कि भर्ती हुए सभी बच्चे स्टेबल हैं. अचानक बीमारी के पीछे कोई और वजह हो सकती है. वहीं मैनपुरी में नगला कीरतपुर के एक सरकारी कम्पोजिट स्कूल में करीब दो दर्जन स्टूडेंट्स बीमार पड़ गए.

चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. आर. सी. गुप्ता ने कहा कि बच्चों को हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद उनमें से ज्यादातर को छुट्टी दे दी गई. यह घटना नेशनल डीवॉर्मिंग डे पर हुई, जो हर साल 10 फरवरी और 10 अगस्त को दो से 19 साल के बच्चों के लिए मनाया जाता है.

डॉ. गुप्ता ने रिपोर्टर्स को बताया कि पेट दर्द की शिकायत करने वाले दो बच्चों को पहले भर्ती किया गया. इसके बाद दूसरे स्टूडेंट्स अपने पेरेंट्स के साथ चेक-अप के लिए आए. यह "एंग्जायटी" की वजह से हो सकता है. डॉक्टर ने कहा कि ज़्यादातर बच्चे ठीक हैं. यह लापरवाही का मामला नहीं लगता. टैबलेट सुरक्षित हैं और लक्षण घबराहट की वजह से लग रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि यह ड्राइव ज़िला लेवल की ड्राइव के तहत एडमिनिस्ट्रेशन अधिकारियों की देखरेख में चलाई गई थी.

घटना पर सपा ने बोला हमला

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घटना को लेकर सपा ने हमला बोला है. समाजवादी पार्टी ने X पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि यह स्थिति राज्य में "मेडिकल इमरजेंसी" को दिखाती है और दावा किया कि "नकली दवाएं" दी गईं. वहीं आम आदमी पार्टी ने भी सिस्टम में लापरवाही का आरोप लगाया और ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
 

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