अयोध्या के राम मंदिर में दान की गई चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब एक दानदाता सामने आए हैं. उनका दावा है कि उन्होंने मंदिर को समर्पित करते हुए करीब 60 किलो चांदी की सिल्ली दान की थी. लेकिन आज उन्हें नहीं पता कि वह चांदी कहां है और किस स्थिति में है.
आजतक से बातचीत में दानदाता अनुराग रस्तोगी ने कई सवाल उठाए. सबसे बड़ा सवाल यही कि जो वस्तुएं उन्होंने श्रद्धा के साथ रामलला को समर्पित की थीं, उनका रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति आखिर सार्वजनिक क्यों नहीं है? अनुराग रस्तोगी बताते हैं कि उन्होंने भगवान रामलला को लगभग 60 किलो चांदी की सिल्ली अर्पित की थी. यह दान उन्होंने किसी प्रचार या पहचान के लिए नहीं, बल्कि आस्था के चलते किया था.
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लेकिन अब जब मंदिर में दान की गई वस्तुओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो उनके मन में भी यह जानने की इच्छा पैदा हुई है कि आखिर उनकी दी हुई चांदी इस समय कहां है. रस्तोगी का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई कि चांदी का इस्तेमाल किस काम में हुआ, वह सुरक्षित रखी गई है या उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है.
दीपक भी गायब है?
कहानी सिर्फ चांदी तक सीमित नहीं है. रस्तोगी ने दावा किया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने मिलकर एक विशेष दीपक भी रामलला को समर्पित किया था, लेकिन अब उन्हें वह दीपक मंदिर परिसर में कहीं दिखाई नहीं देता. यहीं से उनके सवाल और बढ़ जाते हैं.
उनका कहना है कि अगर दीपक मंदिर में मौजूद नहीं है, तो कम से कम यह जानकारी तो होनी चाहिए कि वह कहां रखा गया है. आखिर श्रद्धालुओं और दानदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनकी ओर से समर्पित वस्तुओं का क्या हुआ.
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अनुराग रस्तोगी बार-बार एक बात दोहराते हैं- यह मामला सिर्फ चांदी या दीपक का नहीं है, बल्कि पारदर्शिता का है. उनके मुताबिक, देशभर से लाखों श्रद्धालु राम मंदिर में दान करते हैं. कोई कैश देता है, कोई सोना-चांदी, तो कोई धार्मिक महत्व की वस्तुएं. ऐसे में क्या मंदिर प्रशासन के पास इन सभी वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड है? क्या दानदाताओं को यह बताया जा सकता है कि उनकी दी हुई वस्तुएं कहां हैं? यही सवाल वह उठा रहे हैं.
'SIT बुलाएगी तो जरूर जाऊंगा'
राम मंदिर से जुड़े इस पूरे मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच भी चर्चा में है. अनुराग रस्तोगी का कहना है कि अगर जांच एजेंसी उन्हें बुलाती है, तो वह पूरा सहयोग करेंगे. उन्होंने कहा कि उनके पास जो भी जानकारी है, वह जांच एजेंसियों के साथ साझा करने को तैयार हैं. उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य किसी को कठघरे में खड़ा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाना होना चाहिए.
आखिर सवाल क्यों अहम हैं?
राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. मंदिर निर्माण से लेकर दान तक, हर चीज पर देशभर के लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं. ऐसे में जब कोई दानदाता यह कहता है कि उसे अपनी दान की गई वस्तुओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं है, तो सवाल स्वाभाविक रूप से बड़े हो जाते हैं.
क्या मंदिर में दान की गई हर वस्तु का रिकॉर्ड मौजूद है? क्या दानदाताओं को उसकी जानकारी मिल सकती है? क्या भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे दान की गई वस्तुओं की ट्रैकिंग संभव हो? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच और आधिकारिक पक्ष के सामने आने के बाद ही साफ होंगे. अनुराग रस्तोगी के दावों ने राम मंदिर में दान की गई वस्तुओं की पारदर्शिता को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है.
आशीष श्रीवास्तव