चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा... चंदा चोरी विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट छोड़ा

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया है. यह इस्तीफा नैतिकता के आधार पर दिया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद यह फैसला लिया गया.

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नैतिकता के आधार पर चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया है इस्तीफा. (File Photo: ITG) नैतिकता के आधार पर चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया है इस्तीफा. (File Photo: ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 26 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:30 PM IST

राम मंदिर दान प्रकरण में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख का असर साफ देखने को मिला है. राम जन्मभूमि ट्रस्ट के दो सदस्य चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में कठोर संस्तुति के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया. एसआईटी की सिफारिश पर मामले में पहली एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है. इस्तीफों को जांच में हुई कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है.

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सूत्रों के अनुसार, यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया है. इससे पहले इसी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज की गई. एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कई अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

एसआईटी फिलहाल कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है. जांच एजेंसी आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल रिकॉर्ड और कथित लेन-देन की पड़ताल में जुटी है. सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ कड़ी सिफारिशें की गई थीं, जिसके बाद जांच की रफ्तार और तेज हुई.

यह भी पढ़ें: PMO ने राम मंदिर ट्रस्ट से मांगा था चंदे का हिसाब, चंपत राय ने जांच का हवाला देकर कर दिया इनकार

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इसी क्रम में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को भी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के संकेत दे चुके हैं. सरकार का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या जिम्मेदारी तय होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब अभी आने बाकी हैं. क्या एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में और बड़े खुलासे होंगे? क्या जांच का दायरा और बढ़ेगा? और क्या ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव देखने को मिलेगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच के साथ सामने आएंगे.

चढ़ावे से जुड़े मामले में 8 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ है केस

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी की जांच के बीच गुरुवार को बड़ा कदम उठाया गया. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ. एफआईआर में राम शंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को नामजद किया गया है.

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इनके खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज है. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) को सौंपे जाने के बाद यह कार्रवाई हुई. पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश की जा रही है.

ट्रस्ट से जुड़े कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई है मामले की शिकायत

इस पूरे मामले की शिकायत कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई, जो सितंबर 2025 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था. फरवरी 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उनकी जगह कृष्ण मोहन का चयन किया गया. हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन ने 1970 के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई की थी. इसके बाद उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में करीब छह वर्ष तक काम किया और फिर भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर महाराष्ट्र कैडर में सेवाएं दीं. साल 2012 में रिटायर होने के बाद वह सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे.

पहले विश्व हिंदू परिषद, फिर ट्रस्ट से जुड़े थे चंपत राय

चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता रहे हैं. उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिया है. राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दौर से लेकर मंदिर निर्माण और उसके संचालन तक उनकी भूमिका मानी जाती रही है. ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, भूमि संबंधी मामलों और मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी. सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय और सूचनाएं उनके स्तर तक पहुंचती थीं. वहीं, उनके करीबी और ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था के साथ-साथ चढ़ावे और दान से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालते थे. 

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लंबे समय से संघ से जुड़े रहे अनिल मिश्रा

डॉ. अनिल मिश्रा अयोध्या के सीनियर डॉक्टर हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं. वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल रहे. ट्रस्ट के भीतर उन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की कैश की गिनती, उसके सुरक्षित भंडारण और बैंक में जमा कराने की व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर की साफ-सफाई और कुछ अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थी. 

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