मध्य प्रदेश के पहाड़ी इलाकों और बुंदेलखंड में लगातार हो रही बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में भी दिखाई देने लगा है. केन, यमुना और उनकी सहायक नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है. हर साल इन नदियों की बाढ़ से जिले के कई गांव प्रभावित होते हैं, सड़क संपर्क टूट जाता है और हजारों लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. इसी संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से ही पूरी तैयारी में जुट गया है.
दरअसल, बाढ़ की आशंका के बीच प्रशासन ने गांव-गांव चौपाल और विशेष पाठशाला का आयोजन शुरू कर दिया है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ आने की स्थिति में लोगों को समय पर हर जरूरी सुविधा मिले और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान किया जा सके. प्रशासन का दावा है कि इस बार तैयारी पहले से ज्यादा मजबूत और व्यवस्थित होगी.
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इसी कड़ी में डीएम अमित आसेरी ने एक नई पहल करते हुए PA सिस्टम (Public Announcement System) लॉन्च किया है. इस व्यवस्था के जरिए बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग सीधे डीएम से जुड़े रहेंगे और प्रशासन की ओर से जारी हर जरूरी सूचना तुरंत उन तक पहुंचेगी. साथ ही ग्रामीण भी अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे.
सबसे प्रभावित गांव में चौपाल, DM-SP ने सुनी लोगों की समस्याएं
बांदा जिले में हर साल पैलानी और बबेरू तहसील सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित रहती हैं. खासतौर पर पैलानी क्षेत्र का शंकर पुरवा मजरा चारों तरफ से पानी से घिर जाता है, जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है. हालांकि फिलहाल नदियों का जलस्तर नियंत्रित है, लेकिन प्रशासन ने पहले से तैयारियां तेज कर दी हैं.
इसी क्रम में DM अमित आसेरी और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने शंकर पुरवा में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया. लोगों ने शौचालय, राशन, बिजली, इलाज और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं. डीएम ने सभी संबंधित विभागों को इन समस्याओं के समाधान के लिए आठ दिन का समय दिया और लापरवाही नहीं बरतने की सख्त हिदायत दी.
निरीक्षण के दौरान कई व्यवस्थाओं में खामियां मिलने पर DM ने संबंधित विभागीय अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई. उन्होंने साफ कहा कि बाढ़ आने से पहले सभी तैयारियां हर हाल में पूरी होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
स्वास्थ्य से लेकर पशुओं तक की तैयारी, हर विभाग को मिला जिम्मा
प्रशासन ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं. पीने के पानी की व्यवस्था, सोलर पैनल, 18 मेडिकल टीमें, जरूरी दवाइयां, गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल, पशुओं की टैगिंग, भूसा और चारे की उपलब्धता, कटान रोकने के लिए पिचिंग और सुरक्षा के लिए पुलिस व पीएसी की तैनाती सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए गए हैं.
इसके अलावा स्वास्थ्य, राजस्व, पशुपालन समेत सभी जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बाढ़ की स्थिति में गांवों में ही मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं. लेखपाल से लेकर एडीएम स्तर तक अधिकारियों की ड्यूटी तय कर दी गई है. साथ ही सभी बाढ़ चौकियों को 24 घंटे के लिए सक्रिय कर दिया गया है.
प्रशासन का कहना है कि जिन रास्तों पर बाढ़ का पानी भरने की आशंका रहती है, वहां पहले से वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जाएंगे. जहां जरूरत होगी, वहां प्रशासन अपनी निगरानी में नावों की व्यवस्था करेगा ताकि किसी भी गांव का संपर्क पूरी तरह न टूटे.
DM की अपील- अफवाहों से बचें, प्रशासन की सूचना पर ही करें भरोसा
जिलाधिकारी (DM) अमित आसेरी ने बताया कि प्रशासनिक टीम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जा सकें. उन्होंने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित होने वाले गांवों में चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी गई हैं और उनके समाधान के लिए अधिकारियों को आठ दिन की समयसीमा दी गई है.
डीएम ने बताया कि PA सिस्टम का उद्देश्य यह है कि बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग सीधे प्रशासन से जुड़े रहें और उन्हें समय पर सही सूचना मिलती रहे. इससे राहत और बचाव कार्यों में तेजी आएगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी.
उन्होंने लोगों से अपील की कि बाढ़ के दौरान किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं का पालन करें. साथ ही नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें तथा विशेष रूप से बच्चों पर नजर रखें. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि बाढ़ की स्थिति बनने पर हर प्रभावित व्यक्ति तक समय पर राहत और जरूरी सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी.
सिद्धार्थ गुप्ता