अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन को लेकर चल रही एसआईटी जांच के बीच चंपत राय के सहयोगी माने जाने वाले राम शंकर यादव उर्फ टीनू यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोप मनगढ़ंत हैं और कुछ लोग ईर्ष्या तथा दुर्भावना के कारण ऐसी बातें फैला रहे हैं.
दूसरी ओर एसआईटी का फोकस फिलहाल नोट गिनने और चढ़ावे के प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया पर है. जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर कोई अनियमितता तो नहीं हुई. मामले को लेकर जांच जारी है और एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.
1983 से संगठन के लिए काम करने का हवाला
एक समाचार चैनल से बातचीत में टीनू यादव ने कहा कि वह वर्ष 1983 से संगठन के लिए काम कर रहे हैं और उनकी संपत्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने कहा, "अगर किसी को मेरी संपत्ति पर संदेह है तो उसकी जांच करा ली जाए. मेरा मकान और अन्य संपत्तियां मंदिर निर्माण से पहले की हैं. मैं पहले से जमीन खरीद चुका था और हॉस्टल भी संचालित करता था."
चंपत राय के नाम पर क्या बोले?
टीनू यादव ने कहा कि राम मंदिर में किसी प्रकार की चोरी नहीं हुई है और चंपत राय पर लगाए जा रहे आरोप भी बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा कि बिना सबूत के आरोप लगाए जा रहे हैं और पूरे मामले को लेकर केवल प्रचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा, "अगर किसी के पास सबूत है तो सामने लाए."
उन्होंने यह भी बताया कि एसआईटी ने अब तक उनसे कोई पूछताछ नहीं की है. हालांकि, यदि जांच एजेंसी उन्हें बुलाती है तो वह पूरा सहयोग करेंगे. टीनू यादव के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट में उनकी भूमिका केवल सेवा कार्यों तक सीमित रही है. उन्होंने कहा कि वह साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालते थे तथा आज भी नियमित रूप से मंदिर जाते हैं.
इस बीच चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले में एसआईटी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. सूत्रों के अनुसार, दानपेटियों से निकले नोटों की गिनती और उन्हें गड्डियों में तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को जांच के दायरे में लिया गया है. बताया जा रहा है कि अब तक करीब 43 कर्मियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है.
संतोष शर्मा