राम मंदिर चढ़ावा चोरी में FIR में क्या-क्या लिखा है, पहली बार सामने आई डिटेल

एसआईटी (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में इस घोटाले को लेकर की गई बेहद तीखी टिप्पणियों के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे बड़े चेहरों का इस्तीफा होना यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

Advertisement
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चल रही है जांच (Photo-ITG) राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चल रही है जांच (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद इस पूरे विवाद के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो सबसे प्रमुख सदस्यों चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिसे जांच एजेंसी और पुलिस की सख्त कार्रवाई का सीधा नतीजा माना जा रहा है. इस बीच, पुलिस एफआईआर (FIR) की कॉपी पहली बार सामने आई है, जिसमें घोटाले की पूरी कड़ियां खुली हैं.

Advertisement

सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक, यह मुकदमा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ही सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर अयोध्या के थाना रामजन्म भूमि में दर्ज किया गया है. 25 जून 2026 को शाम 7:21 बजे दर्ज इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने पंजीकृत किया है.  प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने बेहद सुनियोजित ढंग से एक आपराधिक षडयंत्र रचा. इसके तहत राम मंदिर में आने वाले भेंट और चढ़ावे की धनराशि की गिनती  के दौरान वहां तैनात कुछ कर्मचारियों ने मिलकर बड़ी चालाकी से रकम की चोरी, गबन और आपराधिक हेराफेरी की.

यह भी पढ़ें: अयोध्या में बोले केजरीवाल, चंदा चोरी में FIR दिखावा, बड़े लोगों को बचाने की कोशिश

पुलिस ने इस मामले में कुल 8 लोगों को नामजद किया है, जबकि कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. नामजद आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं.  

Advertisement

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज एफआईआर में नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत बेहद गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है. मुख्य रूप से मंदिर जैसे पूजा स्थल में चोरी (धारा 305) और सेवक द्वारा मालिक की संपत्ति की चोरी (धारा 306) के लिए अधिकतम 7-7 साल की जेल और जुर्माने की व्यवस्था है.

मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई लोक सेवक या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात/गबन (धारा 316(5)) और चुराई हुई संपत्ति के आदतन लेन-देन (धारा 317(4)) के तहत की गई है, जिनमें सीधे आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की कड़ी जेल हो सकती है. इसके अलावा, चोरी की रकम छिपाने (धारा 317(5)) के लिए 3 वर्ष की सजा, सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचने (धारा 61) के तहत मुख्य अपराध के बराबर सजा, और सामूहिक रूप से अपराध को अंजाम देने (धारा 3(5) - संयुक्त दायित्व) के तहत शामिल हर व्यक्ति को मुख्य अपराधी के बराबर पूरी सजा मिलने का प्रावधान है.

साथ ही, ट्रस्ट की संपत्ति के धोखाधड़ी से गबन के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) के तहत लागू की गई है, जिसके तहत न्यूनतम 4 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सख्त कानूनी संस्तुति की गई है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'जेल भी जाएंगे चंपत राय और अनिल मिश्रा...', PMO को चिट्ठी लिखने वाले रजनीश बोले

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »