Uttar Pradesh News: झांसी के शहर कोतवाली अंतर्गत बड़ागांव गेट चौकी प्रभारी ओमकार और सिपाही शशांक त्रिपाठी को एंटी करप्शन टीम ने धर दबोचा. मारपीट के एक मुकदमे से नाम हटाने के एवज में शिकायतकर्ता संजीव राय से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए चौकी पर उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया. पीड़ित संजीव राय ने अपने दो बेटों और उनके तीन दोस्तों का नाम झूठे मुकदमे से हटवाने के लिए पहले ही दोनों पुलिसकर्मियों को 60 हजार रुपये दे दिए थे, लेकिन आरोपियों द्वारा और पैसों के लिए परेशान किए जाने पर उन्होंने एंटी करप्शन टीम से इसकी लिखित शिकायत की थी. जाल बिछाकर पकड़े गए दोनों आरोपियों को सदर बाजार थाने लाया गया, जहां उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
नाम हटाने के बदले पहले ही ले चुके थे ₹60 हजार
शिकायतकर्ता संजीव राय ने बताया कि करीब दो महीने पहले उनके बेटों और दोस्तों के खिलाफ मारपीट का एक मुकदमा दर्ज हुआ था, जबकि वे घटना के समय वहां मौजूद ही नहीं थे. सबूत के तौर पर पेनड्राइव देने के बाद भी विवेचक/चौकी प्रभारी ओमकार और सिपाही शशांक त्रिपाठी नाम हटाने के नाम पर बच्चों को बुलाकर पहले ही 60 हजार रुपये वसूल चुके थे.
और पैसों के लिए लगातार बना रहे थे दबाव
पैसे लेने के अगले ही दिन से पुलिसकर्मियों ने पीड़ित परिवार को फिर से परेशान करना शुरू कर दिया और 40 से 50 हजार रुपये की और मांग करने लगे. काफी मिन्नतें करने के बाद आरोपी चौकी प्रभारी और सिपाही 10 हजार रुपये और लेकर मामला सुलझाने के लिए राजी हुए. इसके बाद पीड़ित ने परेशान होकर 4 तारीख को एंटी करप्शन टीम को इसकी शिकायत दी.
जाल बिछाकर रंगेहाथ दबोचे गए दारोगा और सिपाही
तय रणनीति के तहत जैसे ही संजीव राय ने चौकी पर जाकर चौकी प्रभारी को 10 हजार रुपये थमाए, वैसे ही मुस्तैद एंटी करप्शन टीम ने दोनों को दबोच लिया. टीम ने रिश्वत के रुपये सिपाही के पास से बरामद किए. झांसी पुलिस मीडिया सेल ने 'एक्स' (ट्विटर) के माध्यम से बताया कि दोनों के खिलाफ सदर बाजार थाने में मामला दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है.
प्रमोद कुमार गौतम