27 साल से फरार, नाम बदला, मौत का सर्टिफिकेट बनवाया... आखिर भोपाल से दबोचा गया 50 हजार का इनामी

आगरा के चर्चित पुलिसकर्मियों की हत्या और लूटकांड के 27 साल पुराने मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. 50 हजार रुपये का इनामी आरोपी भूरा, जिसने खुद को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर नई पहचान बना ली थी, उसे पुलिस ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया.

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नई पहचान बनाई और ट्रक चालक बन गया.(Photo: Screengrab) नई पहचान बनाई और ट्रक चालक बन गया.(Photo: Screengrab)

नितिन उपाध्याय

  • आगरा,
  • 18 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:28 PM IST

करीब तीन दशक पहले आगरा के खेरागढ़ में पुलिसकर्मियों से लूट और दो पुलिसकर्मियों की हत्या के सनसनीखेज मामले में आखिरकार पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. 27 साल से फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी भूरा को खेरागढ़ पुलिस ने मध्य प्रदेश के भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी के बाद इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं.

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सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आरोपी ने पुलिस से बचने के लिए खुद को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित करा दिया था. इसके बाद उसने अपनी पहचान बदल ली और वर्षों तक नई जिंदगी जीता रहा. पुलिस के मुताबिक, इसी वजह से वह करीब 27 साल तक कानून की नजरों से बचा रहा.

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पुलिस का कहना है कि वर्ष 1999 में वारदात के बाद भूरा फरार हो गया था. शुरुआती दिनों में उसने जंगलों में छिपकर समय बिताया, ताकि पुलिस की पकड़ से दूर रह सके. बाद में वह मध्य प्रदेश के इटारसी पहुंचा और वहां मजदूरी करने लगा.

नाम बदला, नई पहचान बनाई और ट्रक चालक बन गया

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इटारसी में कुछ समय रहने के बाद भूरा भोपाल पहुंच गया. यहां उसने बिल्डिंग निर्माण कार्य में मजदूरी की और बाद में ट्रक चालक के रूप में काम करने लगा. इस दौरान उसने अपना नाम बदलकर जमील पुत्र फारुख रख लिया और पत्नी-बच्चों के साथ सामान्य जीवन बिताने लगा.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि उसने अपनी असली पहचान पूरी तरह खत्म करने की कोशिश की. सरकारी रिकॉर्ड में खुद को मृत घोषित करा दिया और अपने परिवार व रिश्तेदारों से भी दूरी बना ली, ताकि किसी को उसके जिंदा होने की भनक न लग सके.

करीब तीन दशक तक आरोपी ने बेहद सतर्कता के साथ नई पहचान में जिंदगी बिताई. पुलिस को भी लंबे समय तक उसके बारे में कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका.

बकरीद की दावत में हुई बातचीत बनी सबसे बड़ा सुराग

27 साल से फरार आरोपी तक पहुंचने में एक सामान्य-सी बातचीत सबसे अहम कड़ी साबित हुई. हाल ही में जेल से रिहा हुए भूरा के एक पुराने साथी की बकरीद के मौके पर उसके जीजा से मुलाकात हुई. शराब पार्टी के दौरान बातचीत में उसने बताया कि करीब दो साल पहले उसकी भूरा से बात हुई थी.

यह सूचना खेरागढ़ पुलिस तक पहुंची तो जांच टीम ने तुरंत तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया. पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी और आरोपी की लोकेशन का पता लगाने के लिए लगातार निगरानी शुरू की.

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कई दिनों की मेहनत के बाद पुलिस ने भोपाल में जाल बिछाया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के दौरान उसने खुद को जमील बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ में उसने अपनी असली पहचान स्वीकार कर ली.

27 साल पुराने मामले में पुलिस को मिली बड़ी सफलता

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 27 साल बाद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी इस बहुचर्चित मामले में बड़ी उपलब्धि है. अब उससे फरारी के दौरान की गतिविधियों, उसे शरण देने वाले लोगों और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में पूछताछ की जा रही है.

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपी ने सरकारी रिकॉर्ड में खुद को मृत कैसे घोषित कराया और इस पूरी प्रक्रिया में किसने उसकी मदद की. इस पहलू की भी अलग से जांच की जा रही है.

भूरा की गिरफ्तारी के साथ ही आगरा के सबसे चर्चित और पुराने आपराधिक मामलों में से एक की अहम कड़ी पुलिस के हाथ लग गई है. पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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