आगरा के कथित धर्मांतरण रैकेट की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं. आरोपियों से पूछताछ में बटला हाउस और शाहीन बाग तक जुड़े कनेक्शन के साथ फंडिंग नेटवर्क का सुराग मिला है, जबकि रिकॉर्ड एक डॉक्टर के यहां छिपाए जाने की बात भी सामने आई है. पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद कोर्ट ने इस मामले के चार आरोपियों को जेल भेजने के आदेश दिए, जबकि रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग खारिज कर दी गई.
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में तलमीज उर रहमान, परवेज अख्तर, जाविश उर्फ जतिन और मौलाना हसन शामिल हैं. पुलिस ने रिमांड के दौरान इनसे पूछताछ की, जिसमें कई अहम खुलासे हुए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, जांच में फंडिंग और कथित ब्रेनवॉशिंग से जुड़े पहलुओं पर जानकारी मिली है.
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में यह भी सामने आया कि कुछ अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड दिल्ली के बटला हाउस इलाके में एक डॉक्टर के यहां छिपाए गए थे. इसके अलावा शाहीन बाग में लेन-देन से जुड़े दस्तावेज होने की बात भी सामने आई है. इन जानकारियों के आधार पर पुलिस अब संबंधित स्थानों और नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है.
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इस मामले में मुख्य सरगना अब्दुल रहमान और आयशा समेत कुल 14 आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं. पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जो विभिन्न स्तरों पर काम कर रहा था. जांच एजेंसियां अब इस रैकेट की फंडिंग के सोर्स और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने में लगी हैं. साथ ही, बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं. वहीं, सुरक्षा एजेंसियां भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं.
नितिन उपाध्याय