राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान चोरी के मामले में पूछताछ तेज हो गई है. SIT रिकॉर्ड खंगाल रही हैं, सीसीटीवी फुटेज देख रही हैं, दानपात्रों की गिनती कर रही हैं और मंदिर प्रशासन से जुड़े प्रमुख लोगों से पूछताछ कर रही हैं. लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं खड़ा है जब तीन-तीन शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं तो अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई?
राम जन्मभूमि परिसर में पिछले कुछ दिनों से चल रही गतिविधियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) लगातार दूसरे दिन भी सक्रिय रहा और उसने मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों से लेकर नकदी गिनने वाले कर्मचारियों तक कई लोगों से सवाल-जवाब किए.
चंपत राय और गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ की. पूछताछ के दौरान दान की रकम, उसकी निगरानी व्यवस्था, मंदिर के अंदर की प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई. जांच दल में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन ने यह पूछताछ की. बताया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों को भी दूर रखा गया ताकि पूछताछ स्वतंत्र रूप से की जा सके.
सीसीटीवी से लेकर दस्तावेज तक खंगाले गए
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसआईटी ने केवल मौखिक जानकारी पर भरोसा नहीं किया. टीम ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को बारिकी से देखा और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए. दानपात्रों की संख्या की जांच की गई, उनके रखरखाव की प्रक्रिया समझी गई और दान संग्रहण से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले गए. जांच दल यह समझने की कोशिश कर रहा है कि दान राशि की गिनती, रिकॉर्डिंग और बैंकिंग की प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है और उसमें किसी स्तर पर कोई चूक या अनियमितता तो नहीं हुई.
आभूषणों वाले कक्ष तक पहुंची जांच
एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत ने उस कमरे का भी निरीक्षण किया जहां रामलला को दान में प्राप्त आभूषण और अन्य बहुमूल्य धातुएं रखी जाती हैं. यह कक्ष गर्भगृह के सामने स्थित है और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.इस व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट कर्मचारी कृष्णदेव तिवारी से भी पूछताछ की गई. जांच अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि दान में मिलने वाले सोने-चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है और उनकी सुरक्षा के लिए कौन-कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं.
40 कर्मचारी जांच के घेरे में क्यों?
जांच के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि दान राशि की गिनती में करीब 40 लोग शामिल होते हैं. इनमें ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और संग्रहण एजेंसी से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं. ये कर्मचारी दो अलग-अलग पालियों में काम करते हैं और दानपात्रों से निकलने वाली नकदी की गिनती तथा रिकॉर्ड तैयार करने का कार्य संभालते हैं. ऐसे में जांच एजेंसियों की नजर अब इस पूरी चेन पर है. सवाल यह है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो वह कहां और कैसे हुई? हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं ठहराया गया है और जांच प्रारंभिक चरण में है.
तीन शिकायतें, लेकिन एफआईआर नहीं
पूरे विवाद का सबसे चर्चित पहलू यही है कि अलग-अलग लोगों द्वारा शिकायतें दिए जाने के बावजूद पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है. धर्म सेना के नेता संतोष दुबे और उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने राम जन्मभूमि थाने में शिकायत दी है. इसके अलावा एक अन्य शिकायत भी संबंधित अधिकारियों तक पहुंची है. इसके बावजूद मामला अभी तक प्राथमिकी दर्ज होने की स्थिति तक नहीं पहुंचा है. यही वजह है कि विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
करणी सेना ने भी उठाए सवाल
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने अयोध्या में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने पूछा कि यदि चोरी या वित्तीय अनियमितता के आरोप इतने गंभीर हैं तो फिर एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
राजनीति भी गरमाई
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती जा रही है. समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय ने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है. उनका तर्क है कि मंदिर ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर हुआ था, इसलिए इस मामले में भी अदालत की निगरानी जरूरी है. उन्होंने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. पांडेय ने यहां तक मांग कर दी कि आरोपों का सामना कर रहे ट्रस्ट सदस्यों को जांच पूरी होने तक मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह मामला 7 जून को अचानक राष्ट्रीय चर्चा में आया था. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया था कि राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त करोड़ों रुपये की राशि को लेकर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने न्यायालय से मामले का संज्ञान लेने की मांग की थी. इसके बाद राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हुई और देखते ही देखते मामला सरकार, ट्रस्ट और जांच एजेंसियों तक पहुंच गया.
अब सबकी नजर एसआईटी रिपोर्ट पर
फिलहाल इस पूरे विवाद में कई सवाल हैं लेकिन जवाब बहुत कम. क्या वास्तव में दान राशि में कोई गड़बड़ी हुई है? क्या आरोप केवल अफवाह हैं? क्या रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज किसी अनियमितता की पुष्टि करेंगे? और सबसे महत्वपूर्ण, तीन शिकायतों के बावजूद एफआईआर क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब फिलहाल एसआईटी की जांच रिपोर्ट में छिपे हैं. अयोध्या में राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. ऐसे में इस मामले की हर छोटी-बड़ी जानकारी पर देशभर की नजर टिकी हुई है.
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