घड़ी के विज्ञापनों में हमेशा 10:10 ही क्यों दिखता है? वजह जानेंगे तो कहेंगे- अरे, ये बात थी!

क्या आपने कभी सोचा है कि घड़ी के ज्यादातर विज्ञापनों में समय 10:10 ही क्यों दिखाया जाता है? इसके पीछे कोई संयोग नहीं, बल्कि डिजाइन, मनोविज्ञान और मार्केटिंग से जुड़ी एक सोची-समझी रणनीति काम करती है.

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घड़ी कंपनियां अपना लोगो 12 बजे के ठीक नीचे लगाती हैं (Photo:Pexel) घड़ी कंपनियां अपना लोगो 12 बजे के ठीक नीचे लगाती हैं (Photo:Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST

अगर आपने कभी घड़ी, स्मार्टवॉच या दीवार घड़ी का विज्ञापन ध्यान से देखा हो, तो शायद एक बात नोटिस की होगी. ज्यादातर विज्ञापनों में समय 10 बजकर 10 मिनट (10:10) ही दिखाई देता है. यह कोई संयोग नहीं, बल्कि दशकों पुरानी मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा है.

हाल ही में इस विषय पर फिर चर्चा शुरू हुई है. दरअसल, अधिकांश घड़ी कंपनियां आज भी अपने विज्ञापनों में 10:10 का समय ही दिखाती हैं. इसके पीछे सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि मनोविज्ञान और ब्रांडिंग भी काम करती है.

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10:10 ही क्यों?

10:10 पर घड़ी की दोनों सुइयां अंग्रेजी के 'V' जैसी आकृति बनाती हैं. इससे डायल संतुलित, साफ और आकर्षक दिखाई देता है. सुइयां एक-दूसरे को ढकती भी नहीं हैं, इसलिए पूरी घड़ी आसानी से नजर आती है.

ब्रांड का लोगो भी साफ दिखता है

ज्यादातर घड़ी कंपनियां अपना लोगो 12 बजे के ठीक नीचे लगाती हैं. 10:10 पर सुइयां उस हिस्से को नहीं ढकतीं, बल्कि लोगो को फ्रेम करती हुई दिखाई देती हैं. इसके अलावा डेट विंडो, क्रोनोग्राफ और दूसरे छोटे डायल भी साफ नजर आते हैं.घड़ी उद्योग के विशेषज्ञ भी 10:10 को सिर्फ एक संयोग नहीं मानते.

लक्जरी वॉच रिटेलर टूरनो के पूर्व एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एंड्रयू ब्लॉक के मुताबिक, 10:10 पर घड़ी की सुइयां ब्रांड के लोगो को दोनों ओर से फ्रेम करती हैं, जिससे डायल अधिक आकर्षक दिखाई देता है. वहीं, स्विस वॉच कंपनी यूलिस नार्डिन की पूर्व मार्केटिंग प्रमुख सुजैन हर्नी का कहना है कि 10:10 की पोजिशन देखने पर डायल मुस्कुराते चेहरे जैसा आभास देता है, जो ग्राहकों पर सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालता है. इसी वजह से दुनिया की ज्यादातर घड़ी कंपनियां अपने विज्ञापनों में 10:10 का समय दिखाना पसंद करती हैं.

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Photo: pexel

मुस्कुराते चेहरे जैसा लगता है डायल

मार्केटिंग विशेषज्ञों के अनुसार, 10:10 पर बनी सुइयों की आकृति कई लोगों को मुस्कुराते चेहरे जैसी महसूस होती है. इससे घड़ी देखने वाले के मन में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. यही वजह है कि यह समय विज्ञापनों में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

पहले 8:20 भी दिखाया जाता था

आज 10:10 सबसे लोकप्रिय समय है, लेकिन शुरुआती दौर में कुछ कंपनियां 8:20 भी दिखाती थीं. बाद में 10:10 ज्यादा प्रचलित हो गया, क्योंकि इससे डायल अधिक खुला और संतुलित दिखाई देता है.

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क्या सभी कंपनियां 10:10 ही दिखाती हैं?

नहीं. हालांकि ज्यादातर कंपनियां 10:10 या उसके आसपास का समय चुनती हैं, लेकिन कुछ ब्रांड इसमें थोड़ा बदलाव भी करते हैं.उदाहरण के लिए, Apple Watch के प्रचार में अक्सर 10:09 का समय दिखाया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह भी डिजाइन और समरूपता को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है, हालांकि Apple ने इसकी कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है.

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कब से चली आ रही है यह परंपरा?

घड़ी उद्योग में 10:10 का इस्तेमाल कई दशकों से होता आ रहा है. समय के साथ यह एक तरह का इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन गया. आज मैगजीन, ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट, होर्डिंग और स्टोर डिस्प्ले में दिखाई देने वाली ज्यादातर घड़ियां इसी समय पर सेट होती हैं.

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10:10 यह बताता है कि किसी प्रोडेक्ट की तस्वीर में छोटी-से-छोटी बात भी कितनी सोच-समझकर तय की जाती है. सुइयों की एक छोटी-सी पोजिशन घड़ी को ज्यादा आकर्षक, संतुलित और प्रीमियम दिखा सकती है. इसलिए अगली बार जब किसी घड़ी के विज्ञापन में 10:10 का समय दिखे, तो समझ जाइए कि यह संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी मार्केटिंग रणनीति है.

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