एक ही परिवार के पीछे पड़ा ये हाथी, 14 साल में बारी-बारी से 4 सदस्यों को मार डाला!

नेपाल में एक ही परिवार के चार लोगों को एक हिंसक हाथी ने 14 वर्षों के भीतर मार डाला. जबकि, पहली घटना के बाद पूरा परिवार इस उम्मीद में अपना गांव छोड़कर भाग गए थे कि उनका सामना फिर कभी हाथी से न हो. फिर भी वे बच नहीं सके.

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नेपाल में एक हाथी ने एक ही परिवार के चार लोगों की 14 साल के भीतर कुचलकर जान ले ली (Photo - Pexels) नेपाल में एक हाथी ने एक ही परिवार के चार लोगों की 14 साल के भीतर कुचलकर जान ले ली (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

किसी के पीछे पड़ जाने की फितरत अक्सर इंसानों में ही देखने को मिलती है. चाहे वो एक तरफा प्यार के लिए हो, या फिर ईष्या की वजह से या किसी दुश्मनी के कारण. कुछ लोग इस हद तक चले जाते हैं कि अपनी मंशा पूरी करने के लिए सालों तक मौके की तलाश में रहते हैं. सोचिए, अगर ऐसी ही मंशा किसी जानवर में पनपने लगे तो इसका परिणाम कितना भयावह हो सकता है. 

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यहां हम जो कहानी बताने जा रहे हैं, वो किसी इंसान के बदले या रंजिश की नहीं एक जंगली जानवर से जुड़ी है. एक हिंसक हाथी ने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया. ऐसा उसने अचानक से हुए किसी एक हमले में नहीं किया. 14 साल तक एक ही परिवार के लोगों की अलग- अलग मौके पर जान ले ली. 

नेपाल में एक हाथी ने 14 साल के भीतर एक ही परिवार के चार सदस्यों को मार डाला.जबकि, परिवार उस जानवर से बचने के लिए अपना घर- बार तक छोड़ दिया था और उसकी रेंज से काफी दूर जाकर रहने लगे थे. परिवार वालों को उम्मीद थी कि अब हाथी इतनी दूर आकर उन्हें नुकसान हीं पहुंचाएगा.  फिर भी हिंसक हाथी ने उस परिवार के ठिकाने को खोज लिया और परिवार के बचे सदस्यों को भी मार डाला. 

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हैरान कर देगी नेपाल की ये कहानी 
नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित माडी शहर में रहने वाले शनिचरा बोते नाम के शख्स की फैमिली के लिए दिसंबर 2012 में ऐसी घटना घटी, जो उनके लिए बुरे सपने से कम नहीं था.  काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, धुरबे नाम के एक हिंसक हाथी ने शनिचरा के माता-पिता को कुचलकर मार डाला. हाथी की हिंसक प्रवृति इस घटना के बाद भी नहीं रुकी.

माता- पिता की इस घटना में मौत के बाद शनिचरा बोते ने अपने परिवार को गांव से  लगभग नौ मील दूर ले जाने का फैसला किया और खतरे से बचने की उम्मीद में राप्ती नदी को पार करके जगतपुर में बस गए.

हाथी के डर से परिवार ने छोड़ दिया था गांव
कई सालों तक वहां रहते हुए परिवार को यही लगता रहा कि वे बच गए हैं. लेकिन इस महीने की शुरुआत में बोते की फैमिली के लिए एक बार फिर त्रासदी लेकर आया. काठमांडू पोस्ट के अनुसार, धुरबे नाम का हाथी बोते के जगतपुर स्थित घर में फिर से घुस गया और उसने बोते की बहू, 25 साल की आशिका बोते और उसके चार साल के पोते, भरत बोते को कुचलकर मार डाला. 

बोते ने बताया  कि हमें विश्वास था कि इन नदियों को पार करने से हम सुरक्षित रहेंगे. लेकिन इतने वर्षों बाद, वही हाथी फिर से हमारे पास आ गया, हमारे घर पर हमला किया और मेरी बहू और मेरे छोटे पोते को कुचल दिया.  अब हमारे पास भागने के लिए कोई जगह नहीं बची है. 

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इस ताजा हमले का मतलब है कि बोते के परिवार के चार सदस्यों को लगभग 14 साल बाद भी उसी एक हाथी ने मार डाला.धुरबे नेपाल के सबसे कुख्यात और हिंसक हाथियों में से एक है और पिछले कई वर्षों में घातक हमलों की एक श्रृंखला से जुड़ा हुआ है.

चितवन राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों ने बताया कि 2010 से अब तक इस हाथी के कारण 25 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. चितवन राष्ट्रीय उद्यान के प्रतिनिधि अबिनाश थापा मागर ने बताया कि इस दुखद घटना से पहले, धुरबे आधिकारिक तौर पर 23 लोगों की जान ले चुका है. उन्होंने आगे कहा कि जगतपुर में हुई इन दो ताजा मौतों के साथ, इस एक हाथी के कारण हुई मौतों की संख्या अब बढ़कर 25 हो गई है.धुरबे का विकिपीडिया पेज भी है जिसमें उसके द्वारा ली गई 25 जिंदगियों का विवरण दिया गया है.

वन्यजीव अधिकारियों ने आगे के हमलों के जोखिम को कम करने के प्रयास में धुरबे हाथी पर वर्षों से निगरानी रखी है. हाथी को 2016 में फिर से देखा गया और उसे एक ट्रैकिंग कॉलर पहनाया गया. रिपोर्ट के अनुसार, मूल कॉलर के काम करना बंद कर देने के बाद, 2020 में एक नया कॉलर लगाया गया, और फिर 2023 में इसे बदला गया.

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