जब दुनिया ISIS की बर्बरता की कहानियां सुन रही थी, तब आतंकी संगठन सिर्फ लोगों की हत्या ही नहीं कर रहा था, बल्कि महिलाओं को गुलाम बनाकर उनके साथ कैसा व्यवहार करना है, इसके लिए बाकायदा लिखित नियम भी तैयार कर रहा था. अब एक अदालत में ऐसे दस्तावेजों का जिक्र हुआ है, जिन्होंने एक बार फिर ISIS की क्रूर सोच को दुनिया के सामने ला दिया है.
डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत में 'ISIS की दुल्हन' नाम की एक महिला, जो संगठन से जुड़ी थी, उसके खिलाफ चल रही सुनवाई के दौरान उन दस्तावेजों और हैंडबुक का खुलासा किया गया, जिनमें ISIS ने महिला कैदियों और गुलामों के साथ दरिंदगी करने के अपने तथाकथित नियम लिखे थे. इन दस्तावेजों से पता चलता है कि संगठन ने महिलाओं को इंसान नहीं, बल्कि खरीदने-बेचने की वस्तु की तरह देखा.
महिलाओं को गुलाम बनाने के लिए बनाई थी गाइडबुक
अदालत में बताया गया कि ISIS के रिसर्च और फतवा विभाग ने एक पुस्तिका प्रकाशित की थी. इसमें कैदियों और गुलामों से जुड़े सवाल-जवाब दिए गए थे. जांच अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज में महिलाओं को गुलाम बनाने, उन्हें खरीदने-बेचने, उपहार में देने या दूसरे लोगों से अदला-बदली करने, उनसे रेप करने जैसी बातों को जायज ठहराने की कोशिश की गई थी. इतना ही नहीं, इसमें महिला कैदियों को सजा देने और उनके साथ व्यवहार करने के तरीके भी बताए गए थे.
अदालत में पेश जानकारी के मुताबिक, ISIS ने अपनी प्रचार सामग्री में भी इन प्रथाओं का बचाव किया था. संगठन की पत्रिका में ऐसे लेख प्रकाशित किए गए, जिनमें यजीदी महिलाओं को बंदी बनाने, उनसे दुष्कर्म करने और उन्हें गुलाम बनाने को सही ठहराने की कोशिश की गई.
जांचकर्ताओं का कहना है कि बाद में संगठन ने गुलामी और बंदी बनाने को लेकर अलग से पुस्तिकाएं भी जारी कीं, जिनमें इन प्रथाओं को वैचारिक आधार देने की कोशिश की गई.
हजारों यजीदी महिलाएं और बच्चे बनाए गए थे बंदी
अदालत में बताया गया कि अगस्त 2014 में इराक के सिंजर क्षेत्र पर ISIS के हमले के बाद बड़ी संख्या में यजीदी समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया. अनुमान है कि इस हमले में हजारों लोग मारे गए और करीब 6800 यजीदी महिलाएं और बच्चे ISIS के कब्जे में चले गए। इनमें से कई आज भी लापता हैं.
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जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन महिलाओं और बच्चों को अलग-अलग लड़ाकों के बीच खरीदा-बेचा जाता था. कई लोगों को बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया गया. इनके साथ एक के बाद एक लगातार रेप भी किया जाता था.
अदालत में सामने आई पीड़िता की कहानी
सुनवाई के दौरान एक यजीदी लड़की का मामला भी सामने आया. आरोप है कि जब वह 15 साल की थी, तब ISIS लड़ाकों ने उसके परिवार पर हमला किया. उसकी मां और भाई की हत्या कर दी गई और उसे बंदी बना लिया गया.
अदालत में कहा गया कि अगले कई वर्षों तक उसे अलग-अलग लोगों के बीच बेचा और उसके साथ रेप किया जाता रहा. उसे काफी यातनाएं दी गई. बाद में कथित तौर पर एक परिवार ने उसे 10 हजार अमेरिकी डॉलर में खरीदा.
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जांचकर्ताओं का आरोप है कि लड़की को घर के काम कराने के लिए रखा गया था, उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया जाता था और उसे कहीं आने-जाने की आजादी नहीं थी. उसके पास फोन भी नहीं था और वह इलाके से परिचित नहीं थी.
ISIS के शासन में महिलाओं की हालत सबसे खराब थी
एक्सपर्ट का मानना है कि ISIS के नियंत्रण वाले इलाकों में महिलाओं, खासकर यजीदी महिलाओं की स्थिति बेहद खराब थी. उन्हें अपनी इच्छा के खिलाफ बंदी बनाकर रखा जाता था और उनके बुनियादी अधिकार भी छीन लिए जाते थे. उनके साथ यौन दास की तरह व्यवहार किया जाता था.
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यही वजह है कि ISIS पर संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मानवता के खिलाफ अपराध, गुलामी और यौन हिंसा जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.
क्या बताती है यह पूरी कहानी?
अदालत में सामने आए दस्तावेज और गवाहियां इस बात की याद दिलाती हैं कि ISIS की हिंसा केवल युद्ध या हत्या तक सीमित नहीं थी. संगठन ने महिलाओं को गुलाम बनाने और उनके साथ अमानवीय व्यवहार को वैचारिक रूप से सही साबित करने की कोशिश की थी. यही कारण है कि आज भी ISIS के अत्याचारों की कहानियां दुनिया को झकझोर देती हैं और हजारों पीड़ित परिवार न्याय का इंतजार कर रहे हैं.
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