अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के एक व्यक्ति का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है. उन्होंने भारत और अमेरिका के वर्क कल्चर के बीच का अंतर बताया है. उनका कहना है कि अमेरिका में कर्मचारियों के पर्सनल टआइम का ज्यादा सम्मान किया जाता है और वहां काम खत्म होने के बाद लोगों से अतिरिक्त समय तक रुकने की उम्मीद नहीं की जाती.
भारतीय मूल के नितिन मल्होत्रा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसका टाइटल था- भारत VS अमेरिका, वर्क-लाइफ बैलेंस. इस वीडियो में उन्होंने दोनों देशों में काम करने के अपने अनुभव शेयर किए. नितिन ने बताया कि उन्होंने अमेरिका आने से पहले भारत में करीब पांच साल तक नौकरी की थी. इसके बाद वे अमेरिका चले गए, जहां उन्हें रहते हुए लगभग 15 साल हो चुके हैं, अब वे अमेरिकी नागरिक भी बन चुके हैं.
भारत में समय पर घर जाने पर उठते थे सवाल
नितिन के अनुसार, भारत में जब वे अपनी 8 घंटे की ड्यूटी पूरी करके शाम 6 या 6:30 बजे ऑफिस से निकलते थे, तो कई लोग उन्हें हैरानी से देखते थे. साथ काम करने वाले अक्सर पूछते थे कि वे इतनी जल्दी क्यों जा रहे हैं और कुछ देर और रुक कर काम क्यों नहीं करते. उनका कहना है कि कई जगहों पर ऐसा माहौल होता है, जहां देर तक ऑफिस में रुकना मेहनती कर्मचारी की पहचान माना जाता है. ऐसे में समय पर घर जाना कुछ लोगों को अजीब लग सकता है.
अमेरिका में अलग है लोगों की सोच
नितिन ने बताया कि अमेरिका में उनका एक्सपीरियंस बिल्कुल अलग रहा. वहां कर्मचारी अपना तय काम पूरा होने के बाद बिना किसी झिझक के ऑफिस से निकल जाते हैं या कंप्यूटर लॉग ऑफ कर देते हैं. सबसे खास बात यह है कि वहां न तो सहकर्मी और न ही मैनेजर इसे गलत मानते हैं. सभी जानते हैं कि काम के घंटे तय हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए.
मैनेजर की बात ने कर दिया हैरान
नितिन ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार उनके मैनेजर ने ऑफिस समय खत्म होने के बाद उन्हें फोन किया. उन्होंने फोन उठाकर बात कर ली. लेकिन अगले दिन मैनेजर ने उन्हें धन्यवाद कहा और यह भी सुनिश्चित किया कि उन्हें अतिरिक्त समय देने के बदले उचित पेमेंट मिले. यह बात नितिन के लिए काफी हैरान करने वाली थी.
ओवरटाइम का मिलता है अतिरिक्त पैसा
नितिन का कहना है कि अमेरिका में कई कंपनियां कर्मचारियों से तय समय से ज्यादा काम कराने पर अतिरिक्त भुगतान करती हैं. कई मामलों में ओवरटाइम की दर सामान्य वेतन से भी अधिक होती है. उनका मानना है कि भारत में भी लेबर लॉ और नियम मौजूद हैं, लेकिन अमेरिका में कर्मचारियों के निजी समय को लेकर लोगों की सोच अधिक मजबूत दिखाई देती है. नितिन ने बताया कि अमेरिका में मैनेजर आमतौर पर ऑफिस समय के बाद कर्मचारियों से तभी संपर्क करते हैं, जब कोई बहुत जरूरी काम हो. इससे लोगों को अपने परिवार, दोस्तों और निजी जीवन के लिए पर्याप्त समय मिल पाता है. उनके मुताबिक, यही कारण है कि वहां काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन देखने को मिलता है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
नितिन का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कई लोगों ने उनके अनुभवों से सहमति जताई, जबकि कुछ लोगों ने अलग राय भी रखी. कई यूजर्स का कहना है कि भारत में भी अब वर्क-लाइफ बैलेंस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, ताकि कर्मचारियों को काम के साथ-साथ अपने निजी जीवन के लिए भी पर्याप्त समय मिल सके. कुल मिलाकर, नितिन मल्होत्रा का अनुभव यह दिखाता है कि अलग-अलग देशों की कार्य संस्कृति में काफी अंतर हो सकता है. जहां भारत में कई जगहों पर देर तक काम करना सामान्य माना जाता है, वहीं अमेरिका में तय समय के बाद काम से अलग होकर निजी जीवन को महत्व दिया जाता है.
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