उम्र 82 साल, 12 घंटे सड़क पर मेहनत, बुजुर्ग की कमाई जान भर आएंगी आंखें!

कहते हैं, जिंदगी जब तक है, तब तक संघर्ष भी है. मुंबई के 82 वर्षीय मनसुख काका की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है. उम्र के इस पड़ाव पर भी वह रोज घंटों मेहनत कर परिवार का सहारा बन रहे हैं. उनका अनुशासन, आत्मसम्मान और काम के प्रति समर्पण देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भावुक हो गए हैं.

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82 साल के बुजुर्ग रोज 12 घंटे बेचते हैं नमकीन (Photos: @storiesbyaradhana/Instagram) 82 साल के बुजुर्ग रोज 12 घंटे बेचते हैं नमकीन (Photos: @storiesbyaradhana/Instagram)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

जिस उम्र में ज्यादातर लोग आराम करना चाहते हैं, उस उम्र में मुंबई के 82 साल के मनसुख काका रोज सुबह अपना छोटा-सा ठेला सजाते हैं और करीब 12 घंटे सड़क किनारे बैठकर घर में बने नमकीन बेचते हैं. उनकी कहानी सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का दिल जीत रही है. लोग कह रहे हैं कि मेहनत और आत्मसम्मान की इससे बेहतर मिसाल शायद ही देखने को मिले.

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यह वीडियो मुंबई की कंटेंट क्रिएटर आराधना चटर्जी ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. उन्होंने बताया कि एक दिन सड़क किनारे गुजरते समय उनकी नजर एक बुजुर्ग पर पड़ी, जो बड़े सलीके से नमकीन के पैकेट सजा रहे थे. जब उन्होंने उनसे बात की, तो उनकी जिंदगी की कहानी सुनकर भावुक हो गईं.

कोविड के दौरान चली गई जॉब

आराधना के मुताबिक, मनसुख काका कई सालों तक एक साड़ी की दुकान में सेल्समैन के तौर पर काम करते थे. लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और बीमारी के कारण उन्हें जॉब छोड़नी पड़ी. इसी दौरान उनके बेटे को भी उनकी देखभाल के लिए अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी.

स्वस्थ होने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी. परिवार पर बोझ बनने के बजाय उन्होंने अपने घर के पास ही एक छोटा-सा स्टॉल लगाकर फिर से काम शुरू करने का फैसला किया.

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बहन बनाती हैं नमकीन, काका बेचते हैं

वीडियो में दिखाया गया है कि मनसुख काका के स्टॉल पर खाखरा, चकली और फरसान समेत करीब 20 तरह के घर में बने स्नैक्स मिलते हैं.आराधना ने बताया कि इन सभी नमकीनों को मनसुख काका की बहन घर पर ताजा तैयार करती हैं. इसके बाद उन्हें पैक करके स्टॉल तक लाया जाता है, जहां मनसुख काका पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करते हैं.

देखें वीडियो

 

12 घंटे की मेहनत, कमाई सिर्फ 300 रुपये

वीडियो के मुताबिक, मनसुख काका रोज करीब 12 घंटे सड़क किनारे बैठते हैं. इतनी लंबी मेहनत के बाद भी उनकी औसत कमाई सिर्फ करीब 300 रुपये प्रतिदिन होती है. वह हर बिक्री और खर्च को छोटी-सी डायरी में बड़े ध्यान से लिखते नजर आते हैं. उनकी ईमानदारी और अनुशासन ने भी लोगों का दिल जीत लिया.

सलीके ने भी जीता लोगों का दिल

वीडियो में कई लोगों ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि मनसुख काका हमेशा साफ-सुथरे कपड़े पहनते हैं. उनकी शर्ट करीने से अंदर की हुई होती है और ग्राहकों से बात करने का उनका विनम्र अंदाज लोगों को बेहद पसंद आया.कई लोगों ने कमेंट में लिखा कि आत्मसम्मान और मेहनत की ऐसी मिसाल आज के समय में कम देखने को मिलती है.

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आराधना चटर्जी ने वीडियो के साथ लोगों से अपील की कि अगर कोई उनके स्टॉल के आसपास रहता है या वहां से गुजरता है, तो एक बार जरूर जाकर उनके हाथ से बने नमकीन खरीदे. उन्होंने बताया कि जरूरतमंद की मदद करने का सबसे अच्छा तरीका उसके काम को समर्थन देना है.

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