Kandoliya Temple: पौड़ी गढ़वाल के जंगलों में छिपा है ये रहस्यमयी मंदिर, दुल्हन कंडी में लाई थी देवता की मूर्ति, जानें कैसे पहुंचें?

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित कंडोलिया मंदिर बेहद प्रसिद्ध है. कुमाऊं और गढ़वाल की संस्कृति के प्रतीक इस मंदिर का इतिहास बेहद दिलचस्प है, यहां का सनसेट, कंडोलिया के आसपास की जगहें भी लोगों को खूब अट्रैक्ट करती हैं.

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रांसी स्टेडियम के पास न्याय के देवता का मंदिर है. (PHOTO:ITG/AI) रांसी स्टेडियम के पास न्याय के देवता का मंदिर है. (PHOTO:ITG/AI)

अमन मैखुरी / प्रियंका

  • नई दिल्ली,
  • 18 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:09 PM IST

Kandoliya Temple Pauri Garhwal: उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, क्योंकि यह एक ऐसा राज्य है जहां के पहाड़ों की खूबसूरती में अध्यात्म का वास है. बद्रीनाथ-केदारनाथ के दर्शन और ऋषिकेश-औली की वादियों की सैर करने तो हर साल हजारों लोग जाते हैं. लेकिन इनके अलावा उत्तराखंड में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनकी मान्यताएं खूब प्रचलित हैं.

अल्मोड़ा और नैनीताल के अलावा पौड़ी गढ़वाल भी बेहद सुंदर है. जहां आपको सुकून के साथ संस्कृति से भी जुड़ाव महसूस होगा. आज हम आपको पौड़ी के बेहद प्रसिद्ध मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पहाड़ों की घुमावदार सड़कों और चीड़-देवदार के घने जंगलों के बीच बसा है.

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इसे कंडोलिया मंदिर कहा जाता है, यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि नेचरल लवर्स और संस्कृति को करीब से जानने वाले मुसाफिरों के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन भी है.

जंगलों के बीच में बसा कंडोलिया मंदिर

पौड़ी शहर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर, समुद्र तल से 1814 मीटर की ऊंचाई पर देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित है. इस मंदिर के चारों ओर फैली हरी-भरी वादियां और हिमालय की ठंडी हवाएं यहां आपको अलग ही अहसास होगा, इसके साथ ही आपकी सारी थकावट भी छूमंतर हो जाएगी. यहां के स्थानीय लोग इन्हें अपना भूम्याल यानी भूमि के देवता मानते हैं, जो पूरे इलाके की रक्षा करते हैं. 

कंडी से कंडोलिया तक: मंदिर का दिलचस्प इतिहास

इस मंदिर के पीछे एक बेहद खूबसूरत और इमोशनल कर देने वाली लोककथा छिपी है. च्विन्चा गांव के स्थानीय निवासी अमन नेगी ने aajtak.in से बातचीत ने मंदिर के बारे में बताया कि सदियों पहले कुमाऊं की एक बेटी का शादी पौड़ी के डुंगरियाल नेगी परिवार में हुई थी. विदाई के समय वह अपने मायके के ईष्ट देवता को एक कंडी में अपने साथ ले आई थी.

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स्थानीय भाषा में टोकरी को कंडी कहा जाता है और इसी कंडी से देवता का नाम कंडोलिया पड़ा.  यह मंदिर कुमाऊं और गढ़वाल के सांस्कृतिक मिलन का एक अद्भुत प्रतीक भी माना जाता है.

न्याय के देवता और धंवर्या देवता

कहा जाता है कि बाद में देवता ने गांव के एक बुजुर्ग को सपने में दर्शन दिए और खुद को किसी ऊंचे स्थान पर स्थापित करने की इच्छा जताई. जिसके बाद इस ऊंचे और शांत शिखर पर कंडोलिया ठाकुर का भव्य मंदिर बनाया गया. 

स्थानीय लोग कंडोलिया देवता को न्याय का देवता और धंवर्या देवता भी कहते हैं. मान्यता है कि अगर किसी के साथ अन्याय हुआ हो और वह यहां आकर सच्चे मन से गुहार लगाए, तो उसे न्याय जरूर मिलता है. यही अटूट विश्वास इस जगह की एनर्जी को और भी जादुई बना देती है. 

देशभर में मशहूर है कंडोलिया महोत्सव

यहां हर साल 3 दिनों के लिए कंडोलिया महोत्सव होता है. तीनों दिनों तक विशेष पूजा और भव्य भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और टूरिस्ट पहुंचते हैं.  इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना है. इसमें स्थानीय लोक गायक और कलाकार परफॉर्म करते हैं, जिसमें गढ़वाली संस्कृति की झलक देखने को मिलती है.

मंदिर के आसपास घूमने की जगहें

कंडोलिया मंदिर के दर्शन के बाद आसपास के जंगलों में वॉक कर सकते हैं.शाम के समय यहां से दिखने वाला सनसेट आपकी ट्रिप की सबसे खूबसूरत याद बन जाएगा.  मंदिर के पास ही पौड़ी का कंडोलिया पार्क है, जहां से हिमालय की चोटियों और घाटियों के मंत्रमुग्ध करने वाला सीन दिखाई देता हैं. यहीं एशिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित स्टेडियमों में से एक रांसी स्टेडियम भी है. 

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कैसे पहुंचे कंडोलिया मंदिर

ऋषिकेश या देहरादून से पौड़ी के लिए सीधी टैक्सियां और बसें मिलती हैं. पौड़ी पहुंचने के बाद आप आसानी से लोकल ट्रांसपोर्ट से कंडोलिया मंदिर पहुंच सकते हैं.

 

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