Telegram को विवादों में लाने वाला फीचर अब WhatsApp पर, क्या बढ़ेगा साइबर फ्रॉड?

टेलीग्राम पिछले हफ्ते से सुर्खियों में है. दरअसल अब टेलीग्राम का पॉपुलर फीचर अब वॉट्सऐप में आ रहा है. यूजरनेम फीचर का ऐलान कर दिया गया है. बिना नंबर शो किए हुए लोग एक दूसरे से बातचीत कर सकेंगे.

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WhatsApp का यूजरनेम फीचर टेलीग्राम की तरह है? WhatsApp का यूजरनेम फीचर टेलीग्राम की तरह है?

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:20 PM IST

WhatsApp ने पहली बार ऐसा फीचर लॉन्च किया है जो अब तक Telegram और Signal जैसे ऐप्स की पहचान माना जाता था. कंपनी ने Username फीचर का ऐलान कर दिया है. दिलचस्प ये है कि पहली बार वॉट्सऐप की कमान भारतीय को सौंपी गई है. हाल ही में क्रेड फाउंडर कुणाल शाह को कंपनी का ग्लोबल सीईओ बनाया गया है. 

WhatsApp CEO कुणाल शाह ने X पर वॉट्सऐप के नए फीचर के बारे में पोस्ट किया है. कुणाल ने X पर लिखा है -  'समय सबकुछ है. मैने वॉट्सऐप ऐसे समय पर ज्वाइन किया है जब मैं अपना यूजरनेम दुनिया से पहले हासिल कर सकता हूं. आप भी रिजर्व कर सकते है'

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नंबर हाइड करके चैटिंग

इसके बाद यूजर अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी किसी नए शख्स से चैट कर सकेगा. कंपनी का कहना है कि इसका मकसद यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाना है. लेकिन इसी फीचर को लेकर एक नई बहस भी शुरू हो गई है. सवाल उठ रहा है कि क्या इससे वॉट्सऐप पर साइबर ठगों और फर्जी अकाउंट्स की संख्या बढ़ सकती है.

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गौरतलब है कि हाल ही में भारत सरकार ने NEET पेपरलीक मामले के बाद कुछ दिनों के लिए टेलीग्राम ऐप बैन कर दिया था. इल्जाम लगाए गए कि टेलीग्राम स्कैमर्स और आतंकियों का अड्डा बनता जा रहा है. ऐसा इसलिए, क्योंकि टेलीग्राम यूजर्स को ये ऑप्शन देता है कि वो अपना नंबर छुपा कर किसी से चैटिंग कर सकते हैं. 

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टेलीग्राम का यूजरनेम फीचर स्कैमर्स का फेवरेट

टेलीग्राम पर स्कैमर्स यूजरनेम फीचर सबसे ज्यादा यूज करते हैं. चूंकि यूजरनेम से किसी इंसान को ट्रेस कर पाना मुश्किल है. लेकिन अगर मोबाइल नंबर पता हो तो स्कैमर्स को पुलिस की मदद से ट्रेस किया जा सकता है. क्योंकि फोन नंबर किसी ना किसी के नाम से रजिस्टर्ड होता ही है. 

वॉट्सऐप पर भी यूजरनेम फीचर आ जाने के बाद मोबाइल नंबर शो किए बिना ही लोग एक दूसरे से चैटिंग कर पाएंगे. इस फीचर का फायदा स्कैमर्स लोगों को ठगने के लिए कर सकते हैं.

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हालांकि वॉट्सऐप सरकार के साथ मेटाडेटा शेयर कर सकता है, इस वजह से शायद स्कैमर्स इस फीचर का गलत इस्तेमाल ना करें. लेकिन साइबर क्राइम इस समय किसी भी दूसरे क्राइम से तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए स्कैमर्स इस फीचर का फायदा उठा कर वॉट्सऐप पर लोगों के साथ ठगी कर सकते हैं. 

अब तक वॉट्सऐप की सबसे बड़ी पहचान यह थी कि यहां हर अकाउंट एक मोबाइल नंबर से जुड़ा होता था. किसी अनजान शख्स का नंबर दिखता था, उसे ब्लॉक किया जा सकता था और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियां भी नंबर के आधार पर जांच आगे बढ़ा सकती थीं. अब यूजरनेम आने के बाद पहली बार किसी नए शख्स से बात करते समय आपका नंबर दिखाई नहीं देगा. 

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टेलीग्राम की पहचान है यूजरनेम फीचर

अगर आपने टेलीग्राम ऐप इस्तेमाल किया है तो यह फीचर आपको बिल्कुल नया नहीं लगेगा. टेलीग्राम पर कई सालों से यूजरनेम के जरिए चैट की जा सकती है. वहां लोग बिना नंबर बताए सिर्फ यूजरनेम शेयर करके बातचीत शुरू कर देते हैं. यही वजह है कि टेलीग्राम पर हजारों पब्लिक चैनल और ग्रुप चलते हैं, जहां लोगों की असली पहचान छिपी रहती है.

यहीं से चिंता भी शुरू होती है. पिछले कुछ सालों में भारत में कई साइबर फ्रॉड, फर्जी निवेश स्कीम, एग्जाम पेपर लीक, पायरेटेड कंटेंट और दूसरे गैरकानूनी कामों में टेलीग्राम का नाम सामने आता रहा है.

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हाल ही में भारत सरकार की एक रिपोर्ट में भी कहा गया कि टेलीग्राम के कुछ प्राइवेसी फीचर अपराधियों की पहचान करना मुश्किल बना देते हैं. इसी मामले में मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा पेपर लीक के बाद टेलीग्राम पर एक हफ्ते की रोक भी लगाई गई थी, जिसे बाद में हटा लिया गया.

यूजरनेम के जरिए वॉट्सऐप पर कोई आपको सर्च नहीं कर सकता

WhatsApp ने इस खतरे को कम करने के लिए कुछ एक्स्ट्रा सिक्योरिटी के इंतजाम भी किए हैं. कंपनी ने कहा है कि यूजरनेम की कोई सार्वजनिक डायरेक्टरी नहीं होगी. यानी टेलीग्राम की तरह कोई यूजरनेम सर्च करके लोगों की लिस्ट नहीं देख सकेगा. किसी से कॉन्टैक्ट करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा.

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What is WhatsApp Username key?

इसके अलावा कंपनी एक ऑप्शनल Username Key भी दे रही है. अगर यूजर चाहे तो वह इस ऑप्शनल सिक्योरिटी को ऑन कर सकता है, जिससे सिर्फ यूजरनेम जान लेना ही काफी नहीं होगा. 

इसके बावजूद साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि साइबर फ्रॉड बहुत तेजी से नए फीचर अपनाते हैं. आज भी वॉट्सऐप पर फर्जी बैंक अधिकारी, पुलिस, कस्टमर केयर, निवेश सलाहकार और नौकरी देने वाले बनकर लोगों को ठगा जाता है.

अगर फ्यूचर में ऐसे लोग मोबाइल नंबर की जगह केवल यूजरनेम से लोगों तक पहुंचने लगें, तो आम यूजर के लिए असली और नकली अकाउंट में फर्क करना और मुश्किल हो सकता है.

दूसरी तरफ लाखों ऐसे यूजर भी हैं जिन्हें इस फीचर का सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. पत्रकार, डॉक्टर, शिक्षक, महिलाएं, कंटेंट क्रिएटर और छोटे कारोबार चलाने वाले लोग अब बिना अपना निजी नंबर शेयर किए नए लोगों से बात कर सकेंगे. कई लोगों के लिए यह फीचर सुरक्षा बढ़ाने वाला साबित हो सकता है.

अगर कंपनी मजबूत वेरिफिकेशन, रिपोर्टिंग और एंटी-स्पैम सिस्टम बनाए रखती है, तो यूजरनेम फीचर यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ा सकता है. लेकिन अगर निगरानी कमजोर रही, तो यही फीचर साइबर अपराधियों के लिए नया रास्ता भी बन सकता है.

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