आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को यूज करके क्राइम दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है. बेंगलुरु के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में AI का ऐसा इस्तेमाल सामने आया है, जिसने पुलिस और टेक इंडस्ट्री दोनों के होश उड़़ा रखे हैं.
इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि मुख्य आरोपी ने कई महीनों तक एक AI चैटबॉट का इस्तेमाल किया. इस दौरान मर्डर की प्लानिंग से लेकर सबूत मिटाने तक के लिए उससे जानकारी ली. अब पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी से आरोपी की चैट हिस्ट्री मांगी है, ताकि उसे डिजिटल सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके.
यह मामला 22 जून का है. बेंगलुरु के सीगेहल्ली इलाके में सोमसुंदर, उनकी पत्नी मुथुलक्ष्मी और बेटी सुप्रिया की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. कुछ दिन बाद पुलिस ने उनकी बड़ी बेटी श्वेता और उसके लिव-इन पार्टनर केनेथ को पुडुचेरी से गिरफ्तार किया. पुलिस का दावा है कि दोनों ने मिलकर इस वारदात की साजिश रची थी.
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जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि केनेथ ने करीब छह महीने तक AI चैटबॉट से बातचीत की थी. पुलिस के मुताबिक उसने कथित तौर पर यह जानने की कोशिश की कि किसी की हत्या कैसे की जाए, खून के निशान कैसे हटाए जाएं, शवों को कैसे ठिकाने लगाया जाए और सबूत कैसे मिटाए जाएं.
पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया कि डेड बॉडी को भट्ठी में जलाने का विचार भी उसे AI चैटबॉट से बातचीत के बाद आया था. ये सभी आरोप पुलिस जांच का हिस्सा हैं और अदालत में अभी इनकी जांच और सुनवाई बाकी है.
अब बेंगलुरु पुलिस ने उस AI कंपनी को लेटर लिखा है, जिसके चैटबॉट का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है. पुलिस आरोपी की पूरी चैट हिस्ट्री और लॉग्स हासिल करना चाहती है. जांच एजेंसियों का मानना है कि अगर ये रिकॉर्ड मिलते हैं तो यह केस में अहम डिजिटल सबूत बन सकते हैं.
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यह मामला इसलिए भी अलग है क्योंकि पहली बार भारत में किसी बड़े हत्या के मामले में AI चैटबॉट की चैट हिस्ट्री को जांच का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है. इससे पहले अमेरिका में हए एक शूटआउट के बाद भी OpenAI पर आरोप लगे थे. आरोप ये था कि ChatGPT का यूज करके शूटआउट किया गया. इसी तरह कनाडा में भी घटना हुई जिसके बाद जांच में आया कि आरोपी ने AI से प्लान करके लोगों मारा था.
इस मामले में ये देखना दिलचस्प होगा कि AI कंपनियां यूजर्स का डेटा कितने समय तक सुरक्षित रखती हैं और पुलिस को किस कानूनी प्रक्रिया के तहत यह जानकारी दे सकती हैं. फिलहाल पुलिस ने कंपनी से सहयोग मांगा है, लेकिन यह साफ नहीं है कि उसे पूरी चैट हिस्ट्री मिलेगी या नहीं.
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AI एक्सपर्ट्स का मानना है कि ChatGPT, Gemini, Claude या दूसरे AI चैटबॉट खुद कोई अपराध नहीं करते. वे यूजर के सवालों का जवाब देने वाले टूल हैं. बड़ी AI कंपनियां ऐसे सवालों पर सुरक्षा फिल्टर लगाती हैं और हिंसा या गैरकानूनी ऐक्टिविटी से जुड़े कई रिक्वेस्ट्स को ब्लॉक करने की कोशिश करती हैं.
इसके बावजूद अगर कोई व्यक्ति गलत इरादे से AI का इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, तो यह कानून और जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन सकता है. हालांकि क्रिमिनल्स एआई को बेवकूफ बना कर किसी तरह का जवाब हासिल कर लेते हैं.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क