16 साल बाद आमने-सामने मेक्सिको-साउथ अफ्रीका, 2026 फीफा वर्ल्ड कप का होगा आगाज

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का उद्घाटन मैच मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के बीच खेला जाएगा. साल 2010 के बाद दोनों टीमें फिर ओपनर में आमने-सामने हैं.

Advertisement
16 साल बाद फिर वही मुकाबला, मेक्सिको बनाम साउथ अफ्रीका से वर्ल्ड कप की शुरुआत (Photo: Getty) 16 साल बाद फिर वही मुकाबला, मेक्सिको बनाम साउथ अफ्रीका से वर्ल्ड कप की शुरुआत (Photo: Getty)

दीपू राय

  • नई दिल्ली,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:57 PM IST

जब 11 जून को मेक्सिको और साउथ अफ्रीका की टीमें एस्टाडियो एज़्टेका में उतरेंगी, तो स्कोरबोर्ड पर 0-0 लिखा होगा, लेकिन उनके बीच के इतिहास में पहले से ही एक स्कोर दर्ज है: 1-1. 

पिछली बार इन दोनों टीमों ने 2010 में जोहान्सबर्ग में वर्ल्ड कप की शुरुआत की थी, जब सिफिवे त्शाबालाला के जबरदस्त शॉट और राफेल मार्केज के देर से किए गए बराबरी के गोल से टूर्नामेंट के पहले गोल हुए थे.

Advertisement

सोलह साल बाद, यही दोनों टीमें मेक्सिको सिटी में 2026 एडिशन की पहली किक लगाएंगी.

भारत में किक-ऑफ 12 जून को रात 12:30

यह संयोग लॉटरी से हुआ है, जान-बूझकर नहीं. लेकिन इससे अब तक के सबसे बड़े वर्ल्ड कप की शुरुआत में एक अच्छा तालमेल दिखता है: 48 टीमें, 104 मैच और 16 स्टेडियम. एज़्टेका स्टेडियम भी अपना इतिहास बना रहा है. FIFA के मुताबिक, 1970 और 1986 के बाद, यह तीन वर्ल्ड कप ओपनिंग मैचों की मेजबानी करने वाला पहला स्टेडियम बन जाएगा.

हालांकि, मैदान पर मौजूद दोनों टीमों के लिए यह समानता सिर्फ राष्ट्रगान तक ही सीमित है. वे अपने-अपने वर्ल्ड कप अनुभव के बिल्कुल अलग-अलग पड़ावों से इस ओपनिंग मैच में पहुंच रही हैं.

मेजबान जो कभी बड़ी कामयाबी हासिल नहीं कर पाया...

मेक्सिको वर्ल्ड कप का एक जाना-माना नाम है. इस टूर्नामेंट से पहले टीम 17 बार वर्ल्ड कप में हिस्सा ले चुकी है. साल 2026 में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए इसे सह-मेजबान के तौर पर सीधे एंट्री मिल गई, जिससे इसे CONCACAF (नॉर्थ और सेंट्रल अमेरिकन कॉन्फेडरेशन) के लंबे क्वालिफिकेशन प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ा.

Advertisement

इतनी बार हिस्सा लेने के बावजूद, मेक्सिको का प्रदर्शन हमेशा एक खास स्तर से आगे नहीं बढ़ पाया है. FIFA वर्ल्ड कप डेटाबेस के मुताबिक, 60 वर्ल्ड कप मैचों में टीम ने 17 जीते, 13 ड्रॉ खेले और 30 हारे. इस दौरान टीम ने 62 गोल किए और 101 गोल खाए.

टीम का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन अपने ही देश में हुआ है- 1970 और 1986 में टीम क्वार्टर-फाइनल तक पहुंची थी. ये ही दो मौके थे, जब टीम 'लास्ट 16' के दौर से आगे बढ़ पाई.

'एल ट्राई' (मेक्सिको की टीम) इन्हीं उम्मीदों और दबाव के साथ एज़्टेका स्टेडियम में 80,000 से ज्यादा घरेलू दर्शकों का साथ उतरेगी. एक ऐसा टूर्नामेंट, जिसे उनका देश आयोजित करने में मदद कर रहा है और क्वार्टर-फाइनल से बेहतर प्रदर्शन करने का 40 साल का इंतजार.

लंबे वक्त बाद वापसी करने वाली टीम!

दक्षिण अफ्रीका की कहानी छोटी और ज्यादा सीधी-सादी है. यह ओपनिंग मैच उसका सिर्फ चौथा वर्ल्ड कप है और 16 साल में पहला है. 'बाफ़ाना बाफ़ाना' ने आखिरी बार 2010 में फाइनल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था, जिसकी मेजबानी खुद उसी देश ने की थी.

वर्ल्ड कप के नौ मैचों में टीम ने दो जीते हैं, चार ड्रॉ खेले हैं और तीन हारे हैं और कभी भी ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पाई है. साल 2010 में यह पहले राउंड में बाहर होने वाला पहला मेजबान देश बना था.

Advertisement

ओपनिंग मैच में एक ऐसी टीम है, जो 17 बार खेल चुकी है लेकिन शायद ही कभी आगे बढ़ पाई है और दूसरी ऐसी टीम है, जो कभी ग्रुप स्टेज से आगे नहीं निकल पाई. दोनों टीमें एक ही चीज हासिल करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनकी शुरुआत बहुत अलग-अलग रही है.

साल 2010 का ओपनिंग मैच तनावपूर्ण और बराबरी का था. बुकिंग रिकॉर्ड भी यही दिखाता है. 90 मिनट में चार येलो कार्ड दिखाए गए, दोनों टीमों को दो-दो थे. त्शाबालाला (Tshabalala) ने 55वें मिनट में गोल करके बराबरी तोड़ी और मार्केज ने 79वें मिनट में गोल करके स्कोर बराबर कर दिया.

स्कोरबोर्ड पर इतिहास शायद ही कभी दोहराया जाता है, लेकिन यह उम्मीदें जरूर जगाता है. यहां मैच ड्रॉ होना मैक्सिको के मुकाबले दक्षिण अफ्रीका के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा. जिस ग्रुप में साउथ कोरिया और चेकिया भी शामिल हैं, वहां शुरुआती 90 मिनट का खेल बहुत अहमियत रखता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »