भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने अपने करियर को लेकर एक बेहद निजी और भावुक खुलासा किया है. दुनिया के सबसे सफल बल्लेबाजों में शामिल होने के बावजूद कोहली ने माना कि वह लंबे समय तक इम्पोस्टर सिंड्रोम (Impostor Syndrome) यानी खुद की क्षमता पर शक करने वाली मानसिक स्थिति से जूझते रहे.
बेंगलुरु में आयोजित आरसीबी इनोवेशन लैब इंडियन स्पोर्ट्स समिट पावर्ड बाय लीडर्स के दौरान कोहली ने बताया कि कप्तानी का लगातार दबाव उन्हें मानसिक रूप से थका चुका था. उन्होंने कहा कि तीनों फॉर्मेट की जिम्मेदारी निभाते-निभाते वह पूरी तरह 'मेंटली ड्रेन' हो गए थे और क्रिकेट खेलने का असली आनंद कहीं खो गया था.
कोहली ने इस मुश्किल दौर में पूर्व भारतीय कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाजी कोच की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि दोनों ने सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि इंसान के रूप में भी उनका ध्यान रखा.
कोहली ने कहा कि कप्तानी छोड़ने के बाद वह खुद को फिर से समझने की कोशिश कर रहे थे. उसी दौरान द्रविड़ और राठौर ने उन्हें खुलकर खेलने और दबाव से बाहर निकलने का मौका दिया. उनके सहयोग की वजह से वह दोबारा क्रिकेट का आनंद महसूस कर सके.
पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी माना कि लगभग दो दशक तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने के बावजूद उनके भीतर असुरक्षा की भावना खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि कई बार इतनी उपलब्धियों के बाद भी ऐसा लगता है कि शायद वह उतने अच्छे नहीं हैं, जितना लोग मानते हैं.
इम्पोस्टर सिंड्रोम (Impostor Syndrome) एक ऐसी मानसिक स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति अपनी सफलता के बावजूद खुद को कमतर समझता है और हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं लोग उसकी 'सच्चाई' न जान जाएं. विराट ने माना कि यह भावना आज भी कभी-कभी उन्हें परेशान करती है.
कोहली का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वह आधुनिक क्रिकेट के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं. ऐसे में उनका खुलकर मानसिक संघर्ष पर बात करना खेल जगत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
क्या है इम्पोस्टर सिंड्रोम?
इम्पोस्टर सिंड्रोम एक लगातार, मन में बैठा हुआ विश्वास है कि आप एक फ्रॉड हैं और अपनी सफलता के लायक नहीं हैं, भले ही आपकी काबिलियत के साफ सबूत हों. इससे बहुत ज्यादा खुद पर शक, एंग्जायटी और 'पता चल जाने' का डर पैदा होता है. अच्छी बात यह है कि इन भावनाओं को पहचानना ही इन पर काबू पाने का पहला कदम है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क