मिडिल ईस्ट टेंशन से ड्यूक्स गेंदों की सप्लाई घटी, इंग्लैंड में घरेलू क्रिकेट पर छाया संकट! ECB ने दी सफाई

मिडिल ईस्ट में जारी टेंशन का असर अब क्रिकेट पर भी पड़ा है. दरअसल, इस संकट की वजह से इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट सीजन में इस्तेमाल होने वाली ड्यूक्स की सप्लाई संकट में है. कंपनियों को शुरुआती दौर में केवल 50% गेंदें देने की नौबत आ गई है. पर, ECB ने कहा है कि फिलहाल सीजन पर कोई तत्काल खतरा नहीं है.

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ड्यूक्स बॉल बनाने वाली कंपनी के माल‍िक दिलीप जाजोदिया हैं (Photo: PTI) ड्यूक्स बॉल बनाने वाली कंपनी के माल‍िक दिलीप जाजोदिया हैं (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:45 PM IST

इंग्लैंड के आगामी घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत से पहले एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इसकी वजह है मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष. जिसका असर अब क्रिकेट पर पड़ने लगा है. 

'डेली मेल' की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक- इंग्लैंड में टेस्ट और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के लिए इस्तेमाल होने वाली ड्यूक्स (Dukes) गेंदों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. 

1760 से संचालन कर रही ड्यूक्स (Dukes) कंपनी  हर साल लगभग 4,000 से 5,000 लाल गेंदें तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल इंग्लैंड के समर सीजन (जो 3 अप्रैल से शुरू हो रहा है) में किया जाता है. लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं हैं. 

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कंपनी के मालिक दिलीप जाजोदिया जो पिछले करीब 40 साल से इस बिजनेस से जुड़े हैं, उन्होंने बताया कि सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के चलते उन्हें काउंटी क्लब्स को सीजन की शुरुआत में केवल 50 प्रतिशत गेंदें ही देनी पड़ रही हैं. 

जाजोदिया ने कहा- हम इस समय बड़े संकट से जूझ रहे हैं. हमें क्लब्स को आधी गेंदें देकर शुरुआत करनी पड़ रही है और हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं.

दरअसल, ड्यूक्स गेंदों के निर्माण की प्रक्रिया कई देशों से होकर गुजरती है. गेंद के लिए चमड़ा ब्रिटेन की गायों से लिया जाता है और उसे चेस्टरफील्ड में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद सिलाई के लिए यह मटेरियल दक्षिण एशिया भेजा जाता है और फिर तैयार गेंदें वापस यूके लाई जाती हैं.

लेकिन इस बार वापसी की प्रक्रिया सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. जाजोदिया के मुताबिक, साउथ एशिया में तैयार माल फैक्ट्रियों में पड़ा है, लेकिन एयरलाइंस कार्गो नहीं उठा रही हैं. मिडिल ईस्ट के रास्तों पर तनाव के चलते उड़ानों में भारी रुकावट आई है.

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उन्होंने बताया- आमतौर पर 120 गेंदों के एक बॉक्स की एयर फ्रेट लागत करीब 5 डॉलर प्रति किलो होती थी, लेकिन अब यह बढ़कर 15 डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गई है. ज्यादातर शिपमेंट मिडिल ईस्ट से होकर जाती है, और वहां हालात खराब होने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है.

इस संकट का सीधा असर काउंटी क्रिकेट पर पड़ सकता है, जहां टीमों को सीजन की शुरुआत में सामान्य से कम गेंदों के साथ काम चलाना पड़ सकता है.

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने ड्यूक्स गेंदों के संकट पर क्या कहा? 
इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने फिलहाल स्थिति को लेकर चिंता से इनकार किया है. ECB ने अपने बयान में कहा कि प्रोफेशनल काउंटी क्लब्स को सीजन शुरू होने से पहले उतनी ही Dukes गेंदें मिल चुकी हैं, जितनी आमतौर पर दी जाती हैं. Dukes गेंदों का इस्तेमाल सिर्फ इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि आयरलैंड और वेस्टइंडीज में खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट में भी किया जाता है.

 

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