'अनुशासन' में अर्शदीप का ब्रेक फेल, गिल का बल्ला गुल, सूर्या अस्त... हार के लिए गंभीर क्या अकेले दोषी?

टी20 क्रिकेट की अनिश्चितता एक बार फिर सामने आई, जब पिछले मैच में दक्षिण अफ्रीका को धूल चटाने वाली भारतीय टीम अगले ही मुकाबले में बिखर गई. भारत की बल्लेबाजी में गहरी अस्थिरता दिखी- शुभमन गिल और सूर्यकुमार यादव लगातार खराब फॉर्म से जूझते रहे. गेंदबाजी में अनुशासन ने टीम को और पीछे धकेला... सिर्फ एक ओवर में अर्शदीप सिंह ने सात वाइड फेंकीं...

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गंभीर की टीम पर सवाल… अफ्रीका ने दिखाई असली ताकत. (Photo, PTI) गंभीर की टीम पर सवाल… अफ्रीका ने दिखाई असली ताकत. (Photo, PTI)

विश्व मोहन मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 3:05 PM IST

T20 क्रिकेट का स्वभाव ही ऐसा है- कभी टीम अर्श पर होती है, तो कभी फर्श पर. भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मौजूदा सीरीज इसका ताजा उदाहरण है. पहले मुकाबले में जहां भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को बुरी तरह पछाड़ा था, वहीं दूसरे मैच में वही अफ्रीका पूरी तैयारी के साथ वापसी करता दिखा. यह उतार-चढ़ाव T20 फॉर्मेट की अनिवार्य सच्चाई है और टीम इंडिया के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत.

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मुल्लांपुर टी20 में हार का मूल्यांकन करते समय यह समझना जरूरी है कि दक्षिण अफ्रीका अब विश्व क्रिकेट में सिर्फ चुनौती नहीं, बल्कि एक संगठित दावेदार बनकर उभर रहा है. उनकी बल्लेबाजी की दृढ़ता, गेंदबाजी की सटीकता और फील्डिंग की प्रतिबद्धता इस मैच में साफ दिखी. टी20 वर्ल्ड कप की रेस में उन्होंने अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज करा दी है, मुकाबला अब बेहद कड़ा होगा.

टॉप ऑर्डर: बल्लेबाजी में फॉर्म का संकट

भारतीय बल्लेबाजी की अस्थिरता टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है. शीर्ष क्रम से लेकर मिडिल ऑर्डर तक वह भरोसेमंद प्रवाह नहीं दिख रहा, जो बड़े मैचों में फर्क पैदा करता है. शुभमन गिल और सूर्यकुमार यादव दोनों ही इस दौर में अपने सर्वश्रेष्ठ खेल से दूर नजर आ रहे हैं.

गिल की तकनीक और टाइमिंग पर कभी सवाल नहीं उठे, लेकिन हालिया मैचों में वह अनावश्यक जोखिम लेते हुए गलत शॉट चयन के शिकार बने हैं, और विकेट ऐसे समय गंवाया है जब टीम को उनसे ठहराव और संयम की सबसे ज्यादा जरूरत थी.

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न्यू चंडीगढ़ में 'गोल्डन डक' : गिल ने टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ा दीं. (Photo, PTI)

इसी तरह सूर्यकुमार यादव, जो टी20 में भारत के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज माने जाते हैं- लंबे समय से अपने '360-डिग्री' खेल का पुराना असर नहीं दिखा पा रहे. गेंदबाज अब उनके कमजोर क्षेत्रों को पहचान चुके हैं और स्कोरिंग के शुरुआती मौके सीमित कर रहे हैं, जिससे उनका नैचुरल फ्लो टूट रहा है.

पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी इस चिंता को खुलकर सामने रखा, 'शुभमन गिल और सूर्यकुमार की फॉर्म क्या कहती है? गेंदबाजी में 13 फुल टॉस- इसे कैसे रोका जाएगा? टीम इंडिया को आगे बढ़ते हुए इन सवालों के जवाब ढूंढने ही होंगे.'

यह टिप्पणी भारतीय बल्लेबाजी और गेंदबाजी- दोनों क्षेत्रों में निरंतरता की कमी का संकेत है.

गेंदबाजी: अनुशासन की कमी ने मैच पलटा

इस मैच में भारतीय गेंदबाजी अनुशासनहीन दिखी. सबसे अहम क्षण अर्शदीप सिंह का 11वां ओवर रहा, जिसमें 7 वाइड गेंदें फेंकी गईं और यह ओवर 13 गेंदों का बन गया. पूरी पारी में भारतीय गेंदबाजों ने 16 वाइड एक्स्ट्रा दे दिए- यह शीर्ष स्तर की प्रतियोगिता में बड़ा झटका है.

फील्डिंग भी अपनी चपलता और धार नहीं दिखा सकी. कई आधे-मौकों पर फील्डर आखिरी कदम देर से उठाते दिखाई दिए, जिससे दबाव बनाने के मौके हाथ से निकल गए. गिल तो कई बार बाउंड्री बचाने से चूके... हालांकि उनकी कोशिश पुरजोर दिखी, लेकिन गुरुवार का दिन उनके पक्ष में नहीं था.

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T20 क्रिकेट में ये ‘फ्री रन’ और छोटे-मोटे चूक निर्णायक अंतर पैदा कर देते हैं. यह मैच इसका उदाहरण रहा.

कोच गौतम गंभीर को दोष देना जल्दबाजी

हार के तुरंत बाद कई बार निशाना कोच पर साधा जाता है, लेकिन यहां यह प्रतिक्रिया तथ्य आधारित नहीं है. गौतम गंभीर ने जुलाई 2024 में भारतीय टीम की कमान संभाली है. किसी भी इंटरनेशनल टीम को स्थिर रणनीति और संयोजन में समय लगता है. और सबसे महत्वपूर्ण- इस मैच की ज्यादातर गलतियां रणनीति नहीं, मैदान पर एक्जिक्यूशन की चूकें थीं.

फुल टॉस, वाइड, गलत लाइन-लेंथ और सुस्त फील्डिंग किसी भी कोचिंग प्लान का हिस्सा नहीं होतीं. यह खिलाड़ियों की अनुशासन और तत्परता से जुड़ी बातें हैं. कोच दिशा देता है, क्रियान्वयन खिलाड़ी करते हैं. इसलिए गंभीर को इस हार का केंद्रीय दोषी बताना एक सरलीकृत तर्क होगा.

टीम इंडिया के लिए यह हार सिर्फ एक परिणाम नहीं- चेतावनी

टी20 वर्ल्ड कप नजदीक है और इस मैच ने बता दिया कि बल्लेबाजी में स्थिरता,गेंदबाजी में अनुशासन और दबाव में बेहतर एक्जिक्यूशन...इन तीनों क्षेत्रों में तुरंत सुधार की आवश्यकता है.भारत के पास प्रतिभा भी है और गहराई भी. लेकिन T20 क्रिकेट किसी भी तरह की ढिलाई को माफ नहीं करता. यह उसी टीम का साथ देता है जो उस दिन बेहतर एक्जिक्यूशन दिखाती है- नाम नहीं, काम मायने रखता है.

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