होर्मुज की तरह दुनिया के ये भी हैं 10 बड़े चोक पॉइंट, अगर यहां टोल लग जाए तो कितनी बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है

होर्मुज की तरह अगर दुनिया के 10 बड़े चोक पॉइंट- मलक्का, स्वेज, पनामा, जिब्राल्टर और बाकी सब टोल वसूलने लगें तो 80% ग्लोबल समुद्री व्यापार टोल का जाल बन जाएगा. जहाजों की लागत 2-5 गुना बढ़ेगी, महंगाई का तूफान आ जाएगा. भारत जैसे देशों में पेट्रोल ₹300/लीटर और दाल ₹200/किलो हो सकता है. देशों के बीच झगड़े, युद्ध का खतरा और पर्यावरणीय नुकसान बढ़ जाएगा.

Advertisement
पनामा कैनाल से गुजरता बहामास का एलएनजी टैंकर. (Photo: Reuters) पनामा कैनाल से गुजरता बहामास का एलएनजी टैंकर. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:33 PM IST

दुनिया का 80 प्रतिशत व्यापार समुद्र के रास्ते होता है. अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की तरह हर बड़ा समुद्री मार्ग और नहर टोल वसूलने लगे तो पूरी दुनिया का समुद्री व्यापार टोल-टैक्स का जाल बन जाएगा. तटीय देश कहेंगे कि पैसा दो, वरना घुसने नहीं देंगे. तेल, कंटेनर, खाना, कारें – हर चीज की कीमत आसमान छू लेगी.

शिपिंग कंपनियां या तो भारी टोल भरेंगी या अफ्रीका घूमकर लंबा रूट लेंगी. दोनों ही हालत में महंगाई का तूफान आएगा. अमीर देश कुछ संभाल लेंगे, लेकिन भारत, चीन, यूरोप और अफ्रीका जैसे देशों में पेट्रोल ₹300/लीटर और दाल ₹200/किलो जैसी स्थिति बन सकती है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: इंसान लड़ते क्यों हैं? गृहयुद्धों का चिम्पैंजियों से कौन सा कनेक्शन जोड़ रहे साइंटिस्ट

दुनिया का समुद्री व्यापार कैसे टोल के जाल में फंस जाएगा? 

कोई भी बड़ा जहाज समंदर पार करने के लिए कई चोक पॉइंट पार करता है. हर जगह पैसे मांगे जाएंगे. शिपिंग कंपनियों की लागत 2 से 5 गुना बढ़ जाएगी. या तो वे टोल भरकर सीधा रास्ता लेंगी या महीनों का समय और ईंधन खर्च करके लंबा रूट चुनेंगी. बंदरगाहों पर जहाजों की कतारें लग जाएंगी.

स्वेज कैनाल. (Photo: Getty)

बीमा प्रीमियम आसमान छू लेगा. स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आएगी. छोटे-छोटे देश जो इन समुद्री मार्गों को नियंत्रित करते हैं, वे अचानक अमीर बन जाएंगे. लेकिन पूरा वैश्विक व्यापार ठप हो जाएगा.

क्या-क्या समस्याएं खड़ी होंगी?

सबसे बड़ी समस्या आर्थिक तबाही होगी. ग्लोबल ट्रेड का खर्चा इतना बढ़ जाएगा कि सस्ता सामान भी महंगा हो जाएगा. महंगाई 10-20 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो सकती है. तेल, गैस, खाद्य पदार्थ, इलेक्ट्रॉनिक्स – सबकी सप्लाई चेन टूट जाएगी. गरीब देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि भारत जैसे देश 90 प्रतिशत व्यापार समुद्र से करते हैं. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: मोसाद के ऑपरेशन 'नेगेव डेजर्ट' की कहानी जिसमें PAK के सीक्रेट ठिकाने पर कब्जे का किया गया था रिहर्सल

जियो-पॉलिटिकल लड़ाई भी शुरू हो जाएगी. हर देश अपना होर्मुज बनाने की कोशिश करेगा. ईरान, मलेशिया, मिस्र, पनामा, तुर्की, इंडोनेशिया – सब टोल किंग बन जाएंगे. देशों के बीच झगड़े बढ़ेंगे. ये हमारा समुद्री रास्ता है, टोल हम ही वसूलेंगे, वाली बहस छिड़ जाएगी. छोटे-मोटे नौसैनिक टकराव, ब्लॉकेड और नये युद्ध का खतरा पैदा हो जाएगा. 

पर्यावरण को भी नुकसान होगा. लंबे रूट लेने से जहाज ज्यादा ईंधन जलाएंगे. CO₂ उत्सर्जन बढ़ेगा. पाइरेट्स भी सक्रिय हो जाएंगे. जो टोल नहीं भरेंगे, उन्हें निशाना बनाएंगे या प्रोटेक्शन फीस मांगेंगे. UNCLOS यानी समुद्री कानून सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाएगा.

बाब अल-मंदेब. (Photo: Reuters)

10 सबसे बड़े चोक पॉइंट जहां टोल सबसे पहले लग सकता है

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) ... ईरान और ओमान के बीच. रोज 21-21 मिलियन बैरल तेल गुजरता है. दुनिया के हर पांचवें में एक तेल जहाज और LNG का रास्ता. ईरान-ओमान टोल वसूलेंगे तो पूरी दुनिया का पेट्रोल महंगा हो जाएगा.

स्ट्रेट ऑफ मलक्का (Strait of Malacca) ... दुनिया का सबसे व्यस्त. इंडोनेशिया-मलेशिया-सिंगापुर के बीच. 40 प्रतिशत ग्लोबल ट्रेड और 80 प्रतिशत चीन का तेल इसी से गुजरता है. तीनों देश टोल लगाएंगे तो एशिया का पूरा व्यापार प्रभावित होगा.

Advertisement

यह भी पढ़ें: क्या पाक में सेफ हैं अमेरिकी-ईरानी डेलिगेशन? तेहरान से वॉशिंगटन तक यही है चिंता

बाब अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) ... लाल सागर का दरवाजा. यमन और जिबूती के बीच. स्वेज नहर से जुड़ा.  यहां टोल लगने से यूरोप और एशिया के बीच का रास्ता महंगा हो जाएगा.

स्वेज नहर (Suez Canal) ... मिस्र में. एशिया और यूरोप के बीच 8900 किलोमीटर का छोटा रूट. पहले से टोल लेती है, लेकिन अब और महंगा हो जाएगा. मिस्र राजा बन जाएगा.

पनामा नहर (Panama Canal) ... पनामा में. प्रशांत और अटलांटिक महासागर को जोड़ती है. पहले से टोल लेती है, लेकिन अब और भारी टोल लगेगा. पनामा अपना मुनाफा बढ़ा लेगा.

स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर. (Photo: Reuters)

स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर (Strait of Gibraltar) ... अटलांटिक महासागर से भूमध्य सागर. स्पेन और मोरक्को के बीच. दोनों देश टोल लगाएंगे तो यूरोप-अफ्रीका व्यापार प्रभावित होगा.

तुर्की के स्ट्रेट्स (Turkish Straits – Bosphorus + Dardanelles) ... ब्लैक सागर का रास्ता. तुर्की पहले से नियंत्रण रखता है. अब टोल बोर्ड लगाकर और कमाई करेगा.

डेनिश स्ट्रेट (Danish Straits / Great Belt / Oresund) ... बाल्टिक सागर का प्रवेश द्वार. डेनमार्क सबसे ज्यादा कमाएगा. 

इंग्लिश चैनल / स्ट्रेट ऑफ डोवर (English Channel / Strait of Dover) ... दुनिया का सबसे व्यस्त शिपिंग लेन. रोज 500 से ज्यादा जहाज गुजरते हैं. UK और फ्रांस दोनों टोल वसूलेंगे.

Advertisement

यह भी पढ़ें: इजरायल ने लेबनान पर 10 मिनट में 160 बम गिराए, तस्वीरों में कैद तबाही का मंजर

स्ट्रेट ऑफ ताइवान (Taiwan Strait) ... दूसरी पंक्ति का लेकिन बहुत महत्वपूर्ण. चीन और ताइवान के बीच. ट्रैफिक बहुत ज्यादा.

अन्य महत्वपूर्ण: सुंडा-लोम्बोक (मलक्का का विकल्प), बोस्निया नहीं बल्कि केप ऑफ गुड होप (अफ्रीका घूमने का रूट) और बेरिंग स्ट्रेट (आर्कटिक रूट खुलने पर).

दुनिया दो हिस्सों में बंट जाएगी

दुनिया टोल देने वाले और टोल न देने वाले देशों में बंट जाएगी. व्यापार या तो बहुत महंगा हो जाएगा या बहुत धीमा. नये गठबंधन बनेंगे – टोल-फ्री कोरिडोर वाले देश एक साथ आएंगे. रेल, सड़क और हवाई मार्ग बढ़ेंगे, लेकिन वे भी सीमित और महंगे हैं. 
 
आखिर में, होर्मुज जैसा सीन हर चोक पॉइंट पर हो गया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल जाएगी. छोटे-छोटे देश बड़ी ताकत बन जाएंगे. लेकिन आम आदमी की जेब पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ेगा. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement