निपाह वायरस (Nipah Virus) पश्चिम बंगाल में दो मामले सामने आए हैं. जिसके बाद एशियाई देशों जैसे थाईलैंड, सिंगापुर, हांगकांग, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और पाकिस्तान में हवाई अड्डों पर कोविड जैसी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है. भारत में सरकार का कहना है कि यह प्रकोप नियंत्रित हो चुका है. कोई नया केस नहीं मिला है.
अभी स्थिति क्या है? कितने केस हैं?
जनवरी 2026 तक, भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में केवल दो कन्फर्म मामले हैं. दोनों मरीज 25 साल के नर्स हैं (एक महिला और एक पुरुष), जो एक ही प्राइवेट अस्पताल (बारासात, उत्तर 24 परगना जिला) में काम करते थे. लक्षण दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्ते में शुरू हुए.
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पुरुष मरीज रिकवर कर रहा हैं. महिला मरीज अभी क्रिटिकल कंडीशन में हैं. 196 कॉन्टैक्ट्स की भी जांच हुई है. सभी नेगेटिव हैं. कोई लक्षण नहीं है. सरकार और WHO का कहना है कि बीमारी को कंटेन किया जा चुका है. कोई कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं है. यह अस्पताल के अंदर स्वास्थ्यकर्मियों के बीच फैला है. पहले कुछ रिपोर्ट्स में 5 केस बताए गए थे. जांच में सिर्फ 2 पुष्ट हुए. घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सतर्क रहें.
निपाह वायरस का इतिहास क्या है?
निपाह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया और सिंगापुर में सूअरों के किसानों में मिला. तब से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया (बांग्लादेश, भारत, मलेशिया, फिलीपींस) में कभी-कभी आता है.
वायरस कैसे फैलता है?
निपाह मुख्य रूप से फ्रूट बैट्स (Pteropus genus, फल खाने वाले चमगादड़) का नेचुरल होस्ट है. बैट्स में बीमारी नहीं होती, लेकिन वे वायरस फैलाते हैं.
फैलने के तरीके
जानवर से इंसान: बैट्स का पेशाब, लार या मल से दूषित फल/खजूर का रस पीना या खाना. सूअर, घोड़े जैसे जानवर भी इंटरमीडिएट होस्ट बन सकते हैं.
इंसान से इंसान: करीबी संपर्क से – मरीज की सांस की बूंदें, लार, खून, पेशाब. सबसे ज्यादा खतरा अस्पताल में डॉक्टर/नर्स को या घर पर देखभाल करने वाले को. रेस्पिरेटरी लक्षण वाले मरीज ज्यादा फैलाते हैं.
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इंक्यूबेशन पीरियड: 4-14 दिन (कभी-कभी 45 दिन तक). यह वायरस हवा से लंबे समय तक नहीं फैलता, लेकिन क्लोज कॉन्टैक्ट में खतरनाक है.
लक्षण कितने गंभीर हो सकते हैं?
शुरुआत में (3-14 दिन): तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और उल्टी.
बाद में (गंभीर केस में): चक्कर, नींद आना, भ्रम, दौरे (सीजर्स). दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) - बेहोशी, कोमा.
सर्वाइव करने वालों में 20% को लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम (दौरे, थकान, व्यवहार बदलना) रह सकती है. कभी-कभी महीनों बाद रिलैप्स हो सकता है.
इलाज और रिसर्च की स्थिति क्या है?
कोई खास दवा या वैक्सीन अभी लाइसेंस्ड नहीं है. इलाज सिर्फ सपोर्टिव है. आराम, पानी/तरल, बुखार-दर्द की दवा, सांस की मदद के लिए ऑक्सीजन/वेंटिलेटर और दौरे रोकने की दवा.
रिसर्च चल रही है... ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी बांग्लादेश में वैक्सीन के फेज-2 ट्रायल कर रही है. कुछ एंटीबॉडी (m102.4) और एंटीवायरल (रेमडेसिविर) पर टेस्ट हो रहे हैं, लेकिन अभी आम इस्तेमाल नहीं हो रहा है. बचाव ही सबसे मजबूत हथियार है.
बचाव के लिए क्या करें?
क्यों इतना डर?
मौत की दर ज्यादा है. कोई स्पेसिफिक इलाज नहीं है. इसलिए WHO इसे हाई रिस्क मानता है. लेकिन फैलाव सीमित है – ज्यादातर केस स्पोरैडिक या छोटे क्लस्टर होते हैं. भारत ने पहले केरल में कई बार सफलतापूर्वक कंट्रोल किया है.
आजतक साइंस डेस्क