लापता हो गया मॉनसून... 70-80% भारत के ऊपर नहीं दिख रहे बारिश वाले बादल

कुछ दिन पहले तक देशभर में हो रही थी झमाझम बारिश, लेकिन अब सैटेलाइट तस्वीरों में भारत का बड़ा हिस्सा बिना बारिश वाले बादलों के दिख रहा है. आखिर मौसम ने इतनी जल्दी करवट क्यों बदली?

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इस नक्शे में आप देख सकते हैं कि भारत के बड़े हिस्से मॉनसून के बादल गायब है. (Photo: IMD) इस नक्शे में आप देख सकते हैं कि भारत के बड़े हिस्से मॉनसून के बादल गायब है. (Photo: IMD)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:39 PM IST

देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से बारिश अचानक कम हो गई है. 11 जुलाई को सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के करीब 70-80% हिस्से पर बहुत कम या बिल्कुल भी बारिश वाले बादल नहीं दिखे. ऐसा तब हुआ है, जब 9 जुलाई को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पूरे देश में पहुंच चुका था. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसकी वजह भारत से हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी प्रशांत महासागर में बना एक ताकतवर चक्रवात है. इसी कारण मॉनसून फिलहाल कमजोर पड़ गया है. कई राज्यों में बारिश कम हो गई है.

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कुछ दिन पहले तक देश के कई हिस्सों में लगातार तेज बारिश हो रही थी. कई शहरों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात भी बन गए थे. लेकिन अब मौसम अचानक बदल गया है. सैटेलाइट तस्वीरों में देश का बड़ा हिस्सा साफ दिख रहा है और कई इलाकों में बारिश लगभग रुक गई है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या मॉनसून कमजोर पड़ गया है.

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मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. मॉनसून खत्म नहीं हुआ है. यह अभी सिर्फ कमजोर दौर से गुजर रहा है. मौसम का सिस्टम दोबारा मजबूत होने पर बारिश फिर बढ़ सकती है.

क्यों कमजोर पड़ा मॉनसून?

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून हिंद महासागर से आने वाली नमी वाली हवाओं के सहारे पूरे देश में बारिश लाता है. लेकिन इस समय पश्चिमी प्रशांत महासागर में एक ताकतवर चक्रवात बना हुआ है. इस चक्रवात ने नमी और हवा के बहाव को अपनी ओर खींच लिया है. इसका असर भारत के मॉनसून पर पड़ा है.

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इसी वजह से मॉनसून ट्रफ कमजोर हो गई है और देश के बड़े हिस्से में बारिश कम हो गई है. मौसम विभाग ने भी अगले कुछ दिनों तक मध्य भारत और दक्षिण भारत के कई इलाकों में कम बारिश होने का अनुमान जताया है.

इस साल अब तक कैसा रहा मॉनसून?

इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने 9 जुलाई को पूरे देश को कवर किया. यह सामान्य समय से सिर्फ एक दिन बाद पहुंचा. हालांकि इसकी शुरुआत कमजोर रही. जून के आखिर तक देश में करीब 40% कम बारिश दर्ज की गई थी, जो हाल के वर्षों में सबसे कमजोर शुरुआत में से एक रही.

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इसके बाद जून के आखिरी दिनों और जुलाई के पहले हफ्ते में कई राज्यों में अच्छी बारिश हुई. इससे पूरे देश में बारिश की कमी घटकर करीब 14% रह गई. हालांकि हर राज्य में बराबर बारिश नहीं हुई. पश्चिम और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन मध्य भारत के कई राज्यों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है.

आगे क्या होगा?

मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के बाकी दिनों में भी कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. विभाग के मुताबिक, पूरे महीने की बारिश सामान्य औसत से कम रहने की संभावना है.

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वैज्ञानिकों की नजर प्रशांत महासागर में बन रही अल-नीनो की स्थिति पर भी है. अगर अल-नीनो मजबूत होता है, तो इसका असर मॉनसून पर पड़ सकता है. आमतौर पर ऐसे समय में बारिश कमजोर हो जाती है. अगले सक्रिय मॉनसून दौर तक देश के कई हिस्सों में दिन का तापमान भी सामान्य से ज्यादा रह सकता है.

फिलहाल मॉनसून भारत से गायब नहीं हुआ है. यह सिर्फ कुछ समय के लिए कमजोर पड़ा है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे ही पश्चिमी प्रशांत महासागर में बने सिस्टम का असर कम होगा और मॉनसून फिर मजबूत होगा, वैसे ही देश के कई हिस्सों में बारिश दोबारा शुरू हो सकती है.

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