भारत की तरक्की को एनर्जी देगा 'न्यूक्लियर प्लांट प्रोग्राम', बजट में निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए इम्पोर्ट होने वाले सामानों पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी छूट को 2035 तक बढ़ा दिया है. सभी प्लांट्स (बड़े-छोटे, SMR सहित) पर लागू होगा. इससे प्रोजेक्ट लागत 5-10% कम होगी. निवेश बढ़ेगा. जॉब्स आएंगे और क्लीन एनर्जी लक्ष्य (2047 तक 100 GW) तेजी से पूरा होगा.

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न्यूक्लियर एनर्जी को लेकर इस बार बजट में बड़ी घोषणा है. (File Photo: AFP) न्यूक्लियर एनर्जी को लेकर इस बार बजट में बड़ी घोषणा है. (File Photo: AFP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में यूनियन बजट 2026-27 में न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिला है. सरकार ने न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए इम्पोर्ट होने वाले सामानों पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) छूट को 2035 तक बढ़ा दिया है. साथ ही, यह छूट अब सभी न्यूक्लियर प्लांट्स पर लागू होगी, चाहे उनकी क्षमता कितनी भी हो.

क्या है यह ऐलान और क्यों महत्वपूर्ण?

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पहले यह छूट कुछ खास न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स (जैसे बड़े रिएक्टर वाले) पर सीमित थी. समय-समय पर बढ़ाई जाती थी. अब इसे 2035 तक एक्सटेंड किया गया है.सभी प्लांट्स (छोटे-बड़े, SMR से लेकर बड़े रिएक्टर तक) को शामिल किया गया है.

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इससे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले आयातित सामान (जैसे स्पेशल स्टील, कंट्रोल रॉड्स, रिएक्टर पार्ट्स, टर्बाइन कंपोनेंट्स आदि) सस्ते होंगे. कस्टम्स ड्यूटी माफ होने से प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 5-10% तक कम हो सकती है, जो बड़े निवेश को बुलाएगा.

भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम की स्थिति

भारत का लक्ष्य 2047 तक क्लीन और सस्ती ऊर्जा के लिए बड़ी योजनाएं चला रहा है. फिलहाल भारत की कुल बिजली क्षमता में न्यूक्लियर का हिस्सा सिर्फ 3% के करीब है (लगभग 7-8 GW). लेकिन सरकार का प्लान है कि 2030 तक 22 GW और 2047 तक 100 GW तक पहुंचना.

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  • नए प्रोजेक्ट्स: कुडनकुलम, काकरापार, रोपड़, महि भानसा आदि में काम चल रहा है.
  • छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR): बजट में पहले से ₹20,000 करोड़ की न्यूक्लियर एनर्जी मिशन घोषित है, जो SMR पर फोकस करेगी.
  • क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन: कोयला और तेल पर निर्भरता कम करने के लिए न्यूक्लियर, सोलर, हाइड्रोजन जैसे विकल्प बढ़ाए जा रहे हैं.

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इस छूट से क्या फायदे होंगे?

  • लागत कम: आयातित सामान सस्ता होने से प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे होंगे.
  • निवेश बढ़ेगा: प्राइवेट कंपनियां (जैसे टाटा, रिलायंस) और विदेशी पार्टनर (रूस, फ्रांस, अमेरिका) ज्यादा दिलचस्पी लेंगे.
  • जॉब्स और विकास: न्यूक्लियर प्लांट्स बनाने, चलाने और मेंटेनेंस से हजारों हाई-स्किल जॉब्स आएंगी. लोकल मैन्युफैक्चरिंग भी बढ़ेगी।
  • एनर्जी सिक्योरिटी: 24x7 क्लीन बिजली मिलेगी, जो इंडस्ट्री और घरों के लिए फायदेमंद है. इससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा.
  • ट्रंप टैरिफ्स का जवाब: अमेरिका में ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से इम्पोर्ट महंगा हो सकता है, लेकिन यह छूट भारत को बाजार में बनाएगी.

चुनौतियां क्या हैं?

न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा, पर्यावरण और लोकल विरोध की चुनौतियां रहती हैं. लेकिन सरकार Atomic Energy Act में संशोधन और सिविल लायबिलिटी एक्ट में बदलाव कर रही है ताकि प्राइवेट सेक्टर आसानी से आए. यह बजट ऐलान भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लंबे समय तक मजबूती देगा.

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2035 तक छूट से बड़े-छोटे सभी प्लांट्स सस्ते बनेंगे, जिससे क्लीन एनर्जी का लक्ष्य तेजी से पूरा होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे भारत की तरक्की को नया बूस्टर मिलेगा, क्योंकि सस्ती और भरोसेमंद बिजली से इंडस्ट्री, जॉब्स और अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी. 

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