भारत बना रहा तीन छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर... सामने आया 60 महीने के प्लान का ब्लूप्रिंट

भारत तीन स्वदेशी छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) बना रहा है- 200 MW BSMR, 55 MW SMR और 5 MWth GCR हाइड्रोजन उत्पादन के लिए. इनकी लागत लगभग 5750 करोड़ रुपये है. ये 5-7 साल में बनेंगे. ये स्वच्छ बिजली और हाइड्रोजन देकर उद्योगों और परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाएंगे, जिससे भारत का नेट-जीरो लक्ष्य मजबूत होगा.

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केद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि मॉड्यूलर रिएक्टर कब तक और कैसे बनेगा. (Photo: Representational/AFP) केद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि मॉड्यूलर रिएक्टर कब तक और कैसे बनेगा. (Photo: Representational/AFP)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 9:30 AM IST

भारत अब ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठा रहा है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 24 जुलाई 2025 को राज्यसभा में बताया कि भारत तीन तरह के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) बना रहा है, जिनमें से एक खास तौर पर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए होगा. ये रिएक्टर न सिर्फ बिजली बनाएंगे, बल्कि उद्योगों और परिवहन के लिए स्वच्छ ऊर्जा देकर पर्यावरण को बचाने में भी मदद करेंगे.

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SMR क्या है?

छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर हैं, जो पारंपरिक बड़े रिएक्टरों से अलग हैं. ये 200 मेगावाट से कम बिजली पैदा करते हैं. इन्हें फैक्ट्री में बनाकर आसानी से कहीं भी लगाया जा सकता है. इनके फायदे हैं...

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  • छोटा आकार: इन्हें कम जगह चाहिए, इसलिए इन्हें उद्योगों या छोटे शहरों के पास लगाया जा सकता है.
  • सुरक्षित: ये आधुनिक तकनीक से बने हैं, जो दुर्घटना का खतरा कम करते हैं.
  • लागत कम: बड़े रिएक्टरों की तुलना में इन्हें बनाना और चलाना सस्ता है.
  • स्वच्छ ऊर्जा: ये कार्बन उत्सर्जन नहीं करते, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता.

भारत में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) मिलकर इन रिएक्टरों को बना रहे हैं.

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भारत के तीन SMR: क्या खास है?

जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत तीन तरह के SMR डिज़ाइन कर रहा है, जो पूरी तरह स्वदेशी होंगे...

200 मेगावाट BSMR (भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर)

  • ये रिएक्टर बिजली उत्पादन के लिए है. इसे NPCIL के साथ परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के साइट्स पर लगाया जाएगा.  
  • लागत: पहला रिएक्टर बनाने में करीब 5,750 करोड़ रुपये खर्च होंगे.  
  • उपयोग: बड़े उद्योगों और शहरों को स्वच्छ बिजली देगा.

55 मेगावाट SMR

ये छोटा रिएक्टर उन जगहों के लिए है, जहां कम बिजली की जरूरत हो.  इसे पुराने कोयला संयंत्रों को बदलने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि कार्बन उत्सर्जन कम हो.

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5 MWth हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर (GCR)

ये रिएक्टर खास तौर पर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए बनाया जा रहा है.  

  • इसे थर्मोकेमिकल प्रक्रिया (जैसे कॉपर-क्लोराइड या आयोडीन-सल्फर साइकिल) से जोड़ा जाएगा, जो हाइड्रोजन बनाएगी.  
  • उपयोग: हाइड्रोजन का इस्तेमाल परिवहन (जैसे हाइड्रोजन कारें) और उद्योगों (जैसे स्टील और रसायन) में होगा.

खास बात: इन रिएक्टरों को बनाने की मंजूरी मिल चुकी है. 60-72 महीने (5-6 साल) में ये बनकर तैयार हो सकते हैं, बशर्ते प्रशासनिक मंजूरी जल्द मिले.

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हाइड्रोजन उत्पादन: क्यों अहम है?

हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन माना जाता है, क्योंकि ये जलने पर सिर्फ पानी छोड़ता है, कोई कार्बन नहीं. लेकिन इसे बनाना महंगा और जटिल है. भारत का 5 MWth GCR रिएक्टर थर्मोकेमिकल प्रक्रिया से हाइड्रोजन बनाएगा, जिसमें... 

  • कॉपर-क्लोराइड (Cu-Cl) और आयोडीन-सल्फर (I-S) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होगा.  
  • BARC ने इन तकनीकों को पहले ही विकसित और टेस्ट कर लिया है.  
  • ये हाइड्रोजन ट्रक, बस और कारों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होगी, जिससे पेट्रोल-डीजल की जरूरत कम होगी.

भारत की परमाणु ताकत: अभी और भविष्य

फिलहाल भारत में 25 परमाणु रिएक्टर हैं, जो 8880 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं. इनमें से एक रिएक्टर (RAPS-1, 100 MW) बंद है. हाल ही में... 

  • काकरापार (KAPS-3 और 4) और राजस्थान (RAPP-7) में तीन नए 700 मेगावाट रिएक्टर शुरू हो चुके हैं.  
  • 18 और रिएक्टर (13,600 MW) बन रहे हैं, जिनमें 500 MW प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (BHAVINI) भी शामिल है.  
  • इनके पूरा होने पर भारत की परमाणु क्षमता 22,480 मेगावाट हो जाएगी.

SMR इस क्षमता को और बढ़ाएंगे, क्योंकि ये छोटे, तेजी से बनने वाले और सस्ते हैं. ये पुराने कोयला संयंत्रों को बदलने और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद करेंगे.

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भारत के लिए फायदे

स्वच्छ ऊर्जा: SMR कोयले जैसे प्रदूषणकारी ईंधन की जगह लेंगे, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा. ये भारत के नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे.

उद्योगों के लिए बिजली: स्टील, सीमेंट और रसायन जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी. इससे भारत का मेक इन इंडिया मिशन और मजबूत होगा.

हाइड्रोजन क्रांति: हाइड्रोजन से चलने वाले वाहन और उद्योग भारत को पेट्रोल-डीजल आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे.

आर्थिक विकास: इन रिएक्टरों का ज्यादातर उपकरण भारत में ही बनेगा, जिससे स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा. DAE ने कहा कि भारतीय कंपनियां इन रिएक्टरों को बनाने में सक्षम हैं.

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