Vastu Tips for Roti: क्या आप भी गिनकर बनाते हैं रोटियां? जान लें इसके वास्तु नियम

Vastu Tips for Roti: रोटी बनाना सूर्य, मंगल, राहु ग्रह और ज्योतिष से संबंधित है. रोटियों की गिनती करने से सूर्य और मंगल ग्रह कमजोर हो सकते हैं जबकि राहु का नकारात्मक प्रभाव जीवन पर पड़ता है. तो आइए जानते हैं कि गिनकर रोटी क्यों नहीं बनानी चाहिए?

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रोटी के वास्तु टिप्स (Photo: ITG) रोटी के वास्तु टिप्स (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:21 AM IST

Vastu Tips for Roti: क्या आप रोज रोटियां बनाते समय यह सोचते हैं कि यह बस एक सामान्य काम है? क्या आपने कभी सोचा है कि इस छोटे से कार्य का आपके घर की ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि पर कितना गहरा असर पड़ता है? अगर नहीं, तो अब जान लें कि भारतीय संस्कृति में रसोई सिर्फ भोजन बनाने की जगह नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र भी मानी जाती है. यहां तैयार होने वाला भोजन न सिर्फ शरीर को पोषण देता है, बल्कि घर के वातावरण को भी प्रभावित करता है. खासकर रोटी, जिसे परंपरा में सूर्य से जुड़ा माना गया है. रोटी बनाते समय की गई छोटी-छोटी गलतियां भी बड़े वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं कि रोटियां बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि बनी रहे.

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रोटियां गिनकर बनाना क्यों माना जाता है गलत?

वास्तु के अनुसार ऐसा करना अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि रोटियों को गिनना सूर्यदेव का अपमान होता है, जिससे आर्थिक समस्याएं, नौकरी या व्यापार में रुकावटें आ सकती हैं. बेहतर है कि हमेशा अनुमान से थोड़ी अधिक रोटियां बनाएं, ताकि कोई अतिथि भूखा न जाए और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.

पहली और आखिरी रोटी का महत्व

वास्तु शास्त्र में पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा है. यह न केवल पुण्य का काम माना जाता है, बल्कि इससे घर में लक्ष्मी का वास और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा भी होती है. अगर आसपास गाय न हो, तो पहली रोटी किसी जरूरतमंद को देना भी शुभ माना गया है.

हमेशा ताजा आटा ही इस्तेमाल करें

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बासी आटा राहु का प्रतीक माना जाता है, जो नकारात्मकता को बढ़ाता है. इसलिए रोटियों के लिए हमेशा ताजा आटा गूंथें और बचे हुए आटे का अगले दिन इस्तेमाल न करें. इससे घर में अशांति और आर्थिक परेशानियों से बचाव होता है.

चूल्हे की दिशा का रखें ध्यान

वास्तु के अनुसार, रसोई का चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए. रोटी बनाते समय रसोई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है. इससे भोजन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और घर में मानसिक व शारीरिक संतुलन बना रहता है.

तवा और कढ़ाई को जूठा न छोड़ें

रात में तवा या कढ़ाई जूठी छोड़ देना वास्तु दोष को बढ़ाता है और राहु की अशुभता ला सकता है. इन्हें हमेशा साफ करके सूखी जगह पर रखें. रोटी बनाने से पहले तवे को हल्का गरम कर उस पर एक चुटकी नमक डालना भी शुभ माना जाता है.

चकला-बेलन की सफाई और सही उपयोग

चकला-बेलन को हर बार इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह साफ करना चाहिए. अगर इससे आवाज आती हो, तो नीचे कपड़ा रख लें. गंदे या गलत स्थान पर रखे चकला-बेलन घर में दरिद्रता और कलह का कारण बन सकते हैं.

अंतिम बात

कहा जाता है कि ईश्वर हर घर में रसोई के माध्यम से प्रवेश करते हैं. रोटियां सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा का केंद्र होती हैं. अगर आप इन छोटे-छोटे वास्तु नियमों का ध्यान रखते हैं, तो घर में सकारात्मकता, संतुलन और समृद्धि अपने आप बनी रहती है. रोटियां बनाने को हमेशा पवित्र कर्म समझें, जो पूरे परिवार की खुशहाली की नींव रखता है.

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