स्वस्तिक के प्रयोग के पीछे हैं ये वैज्ञानिक कारण, इस तरह करें उपयोग

माना जाता है कि, इसके प्रयोग से सम्पन्नता, समृद्धि और एकाग्रता की प्राप्ति होती है. जिस पूजा उपासना में स्वस्तिक का प्रयोग नहीं होता, वह पूजा लम्बे समय तक अपना प्रभाव नहीं रख पाती.

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स्वस्तिक का निशान स्वस्तिक का निशान

रोहित

  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 2:17 PM IST

स्वस्तिक एक विशेष आकृति है, जिसको किसी भी कार्य की शुरुआत के पूर्व बनाया जाता है. इसका का अर्थ होता है- कल्याण या मंगल करने वाला. माना जाता है कि यह चारों दिशाओं से शुभ और मंगल को आकर्षित करता है. क्योंकि इसे कार्य की शुरुआत और मंगल कार्य में रखते हैं, अतः यह भगवान गणेश का रूप भी माना जाता है.

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माना जाता है कि, इसके प्रयोग से सम्पन्नता, समृद्धि और एकाग्रता की प्राप्ति होती है. जिस पूजा उपासना में स्वस्तिक का प्रयोग नहीं होता, वह पूजा लम्बे समय तक अपना प्रभाव नहीं रख पाती.

आइए जानते हैं क्या है स्वस्तिक का वैज्ञानिक महत्व...

- सही तरीके से बने हुए स्वस्तिक से ढेर सारी सकारात्मक उर्जा निकलती है

- यह उर्जा वस्तु या व्यक्ति की रक्षा , सुरक्षा करने में मददगार होती है

- स्वस्तिक की उर्जा का अगर घर , अस्पताल या दैनिक जीवन में प्रयोग किया जाय तो व्यक्ति रोगमुक्त और चिंता मुक्त रह सकता है

- गलत तरीके से प्रयोग किया गया स्वस्तिक भयंकर समस्याएँ भी दे सकता है

 स्वस्तिक के प्रयोग के सही नियम क्या हैं?

- स्वस्तिक की रेखाएं और कोण बिलकुल सही होने चाहिए

- भूलकर भी उलटे स्वस्तिक का निर्माण और प्रयोग न करें

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- लाल और पीले रंग के स्वस्तिक ही सर्वश्रेष्ठ होते हैं

- अगर स्वस्तिक को धारण करना है तो इसे गोले के अन्दर धारण करें

किस प्रकार करें स्वस्तिक का प्रयोग?

- जहां जहां वास्तु दोष हो या फिर घर के मुख्यद्वार पर लाल रंग का स्वस्तिक बनाएं

- पूजा के स्थान, पढाई के स्थान और वाहन में सामने, स्वस्तिक बनाएं

- एकाग्रता के लिए, सोने या चांदी में बना हुआ स्वस्तिक, लाल धागे में धारण करें

- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर छोटे-छोटे स्वस्तिक लगाने से, वे जल्दी खराब नहीं होते

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