'हर छात्र डॉक्टर या इंजीनियर ही क्यों बने?' राहुल गांधी का शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी कोटा पहुंचे. वहां छात्रों के साथ संवाद किया. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, करियर के सीमित विकल्पों और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य पर चर्चा करने का मंच है.

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कांग्रेस सांसद ने कहा भारत ऐसा चाहिए जहां कोई छात्र आत्महत्या न सोचे. (Photo: PTI) कांग्रेस सांसद ने कहा भारत ऐसा चाहिए जहां कोई छात्र आत्महत्या न सोचे. (Photo: PTI)

aajtak.in

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  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST

राजस्थान के कोटा में छात्रों से संवाद के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहुंचे. उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था, छात्रों पर बढ़ते दबाव और सीमित करियर विकल्पों को लेकर कई सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उनका ये कार्यक्रम राजनीतिक नहीं है, बल्कि पूरी तरह छात्रों के भविष्य पर केंद्रित है.

राहुल गांधी ने कहा कि कोटा में छात्रों के बीच खड़े होकर उन्हें खुशी और सम्मान का अनुभव हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है. यह बैठक युवाओं के बारे में है, उन छात्रों के बारे में है जो अपने भविष्य को बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनको लेकर वो चर्चा करना चाहते हैं.

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उन्होंने कहा, "मैं BJP, कांग्रेस, राजनीति या चुनाव जैसे शब्द नहीं कहूंगा. ये शब्द आज शाम मेरे मुंह से नहीं निकलेंगे. यह शाम आपके बारे में है. यह आपके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में है. यह उन मुश्किलों के बारे में है जिनका आप हर दिन सामना करते हैं. इसकी वजह से कई परेशान रहते हैं"

कन्याकुमारी से कश्मीर की यात्रा का जिक्र

छात्रों से राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले वह कन्याकुमारी से कश्मीर तक हजारों किलोमीटर पैदल चले थे. इस दौरान उनकी मुलाकात देशभर के लाखों युवाओं से हुई. उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान वो युवाओं से सवाल करते थे. 

उनसे पूछते थे कि वे जीवन में क्या बनना चाहते हैं. उन्हें लगभग हर जगह पांच तरह के जवाब मिले. उन्होंने कहा, "मुझे पांच जवाब मिले, लेकिन छठा जवाब कभी नहीं मिला. इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, IAS और फोर्सेस. यही पांच जवाब मुझे बार-बार सुनने को मिले. इस जवाब ने मुझे अंदर तक परेशान कर दिया."

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राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर भारत का शिक्षा तंत्र युवाओं के सामने सिर्फ पांच विकल्प ही क्यों रखता है. उन्होंने कहा कि यह सोचने वाली बात है कि देश के करोड़ों छात्रों के सपनों और प्रतिभाओं को इतने सीमित दायरे में क्यों बांध दिया गया है. भारतीय शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी यही है.

'बच्चों के सपनों का सम्मान नहीं करते'

राहुल गांधी ने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था बच्चों के सपनों को पूरा करने में मदद नहीं करती. व्यवस्था छात्रों की पसंद और उनकी व्यक्तिगत रुचियों का सम्मान करने में भी पीछे रह जाती है. उन्होंने कहा, "हमारे एजुकेशन सिस्टम की सबसे बड़ी कमी यह है कि हम अपने बच्चों के सपने पूरे नहीं करते."

राहुल गांधी ने कहा कि हर छात्र की अपनी क्षमता और रुचि होती है, लेकिन व्यवस्था अक्सर उन्हें तयशुदा रास्तों पर चलने के लिए मजबूर करती है. भारत जोड़ो यात्रा के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने विचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके मन में लगातार कई तरह के सवाल उठते हैं. 

उन्होंने पूछा कि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था कमजोर क्यों हुई और निजी शिक्षा इतनी महंगी क्यों हो गई. यह समझना जरूरी है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकारी शिक्षा संस्थानों की भूमिका लगातार घटती गई और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बड़ा हिस्सा महंगे निजी संस्थानों के हाथों में चला गया.

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'छात्रों पर दबाव डाल रहा है सिस्टम'

उनके मुताबिक, यह स्थिति लाखों परिवारों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि शिक्षा आज कई घरों के लिए आर्थिक बोझ बनती जा रही है. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर सबसे गंभीर टिप्पणी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर की. उन्होंने कहा कि एजुकेशन सिस्टम बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालता है.

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था छात्रों को तनाव देती है, उन्हें दबाती है और कई बार मानसिक रूप से तोड़ देती है. यह किसी भी देश के लिए अच्छी स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा, "एजुकेशन सिस्टम अपने बच्चों पर दबाव डालता है, उन्हें स्ट्रेस देता है, दबाता है और कुचलता है. ये देश के लिए अच्छा नहीं है."

'छात्र आत्महत्या के बारे में न सोचे'

कोटा जैसे शहर में, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र रहते हैं, राहुल गांधी ने छात्र आत्महत्या के मुद्दे का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि समाज, सरकार, संस्थान और सभी जिम्मेदार लोगों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जहां छात्र आत्महत्या करने के बारे में ना सोचे.

राहुल गांधी ने कहा, "मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर काम करें ताकि इस देश में कोई भी छात्र कभी खुदकुशी करने की इच्छा महसूस न करे." उन्होंने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर चर्चा करना है. शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के बारे में सोचना है.

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कोटा में छात्रों के साथ राहुल गांधी का यह संवाद शिक्षा, करियर, मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा. उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया.

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