मायरे के वीडियो बने सुराग, 1000 CCTV कैमरे भी नहीं रोक पाए, ऐसे खुला 53 लाख की चोरी का पूरा खेल

नागौर के डांगावास में 53 लाख रुपये की चोरी का पुलिस ने 13 दिन में खुलासा किया. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर मायरे के वीडियो देखकर इलाके में गहनों की अधिकता का अंदाजा लगाया और चोरी की साजिश रची. पुलिस ने हनुमानगढ़ के दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है.

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हनुमानगढ़ के दो शातिर चोर पुलिस ने पकड़े. (Photo: ITG) हनुमानगढ़ के दो शातिर चोर पुलिस ने पकड़े. (Photo: ITG)

केशाराम गढ़वार

  • नागौर ,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:20 PM IST

राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास स्थित श्रीराम कॉलोनी में 27 मई को हुई 53 लाख रुपये की बड़ी चोरी का पुलिस ने 13 दिनों में खुलासा कर दिया है. इस मामले में हनुमानगढ़ के दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस की जांच में सामने आया कि इस चोरी के पीछे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मायरे के वीडियो और सुनियोजित रेकी की बड़ी भूमिका रही. घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी, जब पीड़ित देवाराम जाट ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ रिश्तेदारी में गए हुए थे. इसी दौरान अज्ञात चोरों ने उनके घर का मुख्य ताला तोड़ दिया और अलमारी व बक्सों को खंगालकर सोने-चांदी के आभूषण और नकदी चोरी कर ली. घर लौटने पर उन्हें वारदात का पता चला.

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पीड़ित की शिकायत के आधार पर मेड़ता सिटी थाने में मामला दर्ज किया गया. इसके बाद नागौर पुलिस, डीएसटी और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की. पुलिस ने इलाके और आसपास के रूटों पर लगे 1000 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंची. जांच में सामने आया कि इस वारदात को अंजाम देने वाले दोनों आरोपी बेहद पेशेवर तरीके से काम करते थे. वो ट्रेन से अलग-अलग शहरों में पहुंचते थे और रेलवे स्टेशन के आसपास से मोटरसाइकिल चोरी कर लेते थे. इसके बाद इन्हीं वाहनों का इस्तेमाल करके सूने मकानों की रेकी करते थे.

घर सूना पाकर चोरों ने तोड़े ताले, ले उड़े आभूषण और नकदी

आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए मास्क, कैप, गमछा और काला चश्मा का इस्तेमाल करते थे ताकि सीसीटीवी कैमरों में उनकी पहचान न हो सके. पुलिस के अनुसार यह गिरोह राजस्थान के कई जिलों में पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका है. पूछताछ में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मायरे के वीडियो देखकर इस इलाके को टारगेट किया था. इन वीडियो में महिलाओं को भारी मात्रा में सोने-चांदी के गहनों के साथ देखा जाता था. इसी आधार पर आरोपियों ने यह अंदाजा लगाया कि इस क्षेत्र के घरों में बड़ी मात्रा में कीमती आभूषण रखे होते हैं.

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इसके बाद दोनों आरोपियों ने नागौर क्षेत्र को चुना और कई दिनों तक रेकी की. उन्होंने ऐसे मकानों की पहचान की जहां परिवार बाहर गया हुआ हो या घर पर ताला लगा हो. इसी योजना के तहत 27 मई को उन्होंने डांगावास स्थित घर को निशाना बनाया. चोरी की इस वारदात के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच को तेज किया और संदिग्धों के मूवमेंट को ट्रेस किया. करीब 1000 से 1200 सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनकी मदद से दोनों आरोपियों की पहचान हुई.

13 दिन में हनुमानगढ़ के दो शातिर आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने हनुमानगढ़ के सन्त्री माली और हरदीप सिंह संधू को गिरफ्तार किया है. दोनों के खिलाफ पहले से ही चोरी, लूट और नकबजनी के कई मामले दर्ज हैं. पुलिस का कहना है कि यह गिरोह काफी संगठित तरीके से काम करता है और अन्य जिलों में भी इनके कनेक्शन की जांच की जा रही है. पुलिस अब चोरी गए सामान की बरामदगी के प्रयास कर रही है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गैंग ने राजस्थान के अन्य जिलों में कितनी वारदातों को अंजाम दिया है. जिला पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह पूरा मामला सोशल मीडिया के दुरुपयोग और अपराधियों की नई कार्यशैली का उदाहरण है. पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही पूरी गैंग का नेटवर्क उजागर किया जाएगा.
 

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