'सोन चिरैया' के कुनबे में आए 3 नए मेहमान, विलुप्ति की कगार पर खड़ी 'गोडावण' की संख्या बढ़कर हुई 94

राजस्थान के जैसलमेर में प्रोजेक्ट बस्टर्ड के तहत गोडावण यानी सोन चिरैया के 3 नए चूजों का जन्म हुआ है. संरक्षण केंद्रों में इनकी संख्या बढ़कर 94 हो गई है.

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सोन चिरैया के संरक्षण में 'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' का कमाल.(Photo:ITG) सोन चिरैया के संरक्षण में 'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' का कमाल.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • जैसलमेर,
  • 28 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:43 PM IST

राजस्थान से वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी सोन चिरैया के तीन नए चूजों का जन्म हुआ है. इन नए जन्मों के बाद संरक्षण केंद्रों में सुरक्षित रखे गए गोडावणों की संख्या बढ़कर 94 हो गई है. इसे इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण अभियान में बड़ी सफलता माना जा रहा है. सोन चिरैया का अंग्रेजी नाम ग्रेट इंडियन बस्टर्ड है, इसे राजस्थान में गोडावण कहा जाता है.

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दरअसल, जैसलमेर में चल रहे 'प्रोजेक्ट बस्टर्ड' के तहत संचालित कंजर्वेशन ब्रीडिंग प्रोग्राम में ये तीनों चूजे जन्मे हैं. इनमें से एक चूजा प्राकृतिक परिवेश में दिए गए अंडे से निकला, जबकि दो चूजे संरक्षण केंद्र में दिए गए अंडों से पैदा हुए हैं.

चार साल में 26 चूजों का जन्म

जैसलमेर के दो ब्रीडिंग सेंटरों में पिछले चार वर्षों के दौरान अब तक कुल 26 चूजों का जन्म हो चुका है. इनमें 18 चूजे आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन, 4 प्राकृतिक प्रजनन यानी नेचुरल ब्रीडिंग और 4 चूजे जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडों से निकले हैं. यह लगातार मिल रही सफलता संरक्षण विशेषज्ञों के लिए उत्साहजनक संकेत है.

जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडों से चूजों ने लिया जन्म.

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'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' से भी मिली सफलता

वन विभाग ने 'जंपस्टार्ट इंटरवेंशन' के तहत जंगल से सुरक्षित लाए गए तीन अंडों से भी स्वस्थ चूजे तैयार किए हैं. इस पहल का उद्देश्य सोन चिरैया की आनुवंशिक विविधता  यानी जेनेटिक डायवर्सिटी को बनाए रखना और अंडों को शिकारियों व अन्य खतरों से सुरक्षित रखना है.

कृत्रिम प्रजनन ने रचा नया इतिहास.

अभी और बढ़ सकती है संख्या

राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रजनन सीजन में अभी और चूजों के जन्म की संभावना है. यदि ऐसा होता है तो सोन चिरैया की घटती आबादी को बचाने की उम्मीद और मजबूत होगी.
 

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