लाइलाज बीमारी से जूझ रहे 15 साल के गर्वित बने एक दिन के कलेक्टर... कुर्सी संभालते ही बुलाई अफसरों की मीटिंग

डीडवाना-कुचामन जिले के कलेक्ट्रेट में बेहद भावुक और इंस्पायर करने वाली कहानी सामने आई. लाइलाज बीमारी से जूझ रहे 15 साल के गर्वित रेवाड़ को एक दिन का कलेक्टर बनाया गया. डीएमडी जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद 10वीं में 82.83% अंक हासिल करने वाले गर्वित ने कलेक्टर की कुर्सी संभालकर न सिर्फ अपना सपना जिया, बल्कि प्रशासनिक कामकाज की एक झलक भी देखी.

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लाइलाज बीमारी से जूझ रहे 15 साल के गर्वित. (Photo: ITG) लाइलाज बीमारी से जूझ रहे 15 साल के गर्वित. (Photo: ITG)

केशाराम गढ़वार

  • डीडवाना/कुचामन,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST

डीडवाना जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट ऑफिस में एक ऐसी अनूठी और भावुक कर देने वाली पहल देखने को मिली, जिसकी लोग खूब सराहना कर रहे हैं. यहां लाडनूं क्षेत्र के ग्राम रोडू के रहने वाले 15 साल के गर्वित रेवाड़ को एक दिन के लिए कलेक्टर बनाया गया. गर्वित ने बाकायदा कलेक्टर की कुर्सी संभाली और अधिकारियों की बैठक ली.

इस विशेष दिन की शुरुआत बेहद सम्मानजनक रही. गर्वित रेवाड़ को पूरे प्रोटोकॉल के साथ राजकीय वाहन से कलेक्ट्रेट लाया गया. जैसे ही गाड़ी कलेक्ट्रेट परिसर में रुकी, खुद जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने आगे बढ़कर गुलदस्ता भेंट किया और गर्मजोशी के साथ 'एक दिन के कलेक्टर' का स्वागत और अभिनंदन किया. इसके बाद गर्वित को कलेक्टर के मुख्य चेंबर में ले जाया गया, जहां कलेक्टर की कुर्सी संभाली.

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कुर्सी संभालने के बाद एक दिन के कलेक्टर गर्वित रेवाड़ ने कलेक्ट्रेट के विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक की. बैठक में गर्वित ने परिपक्वता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि:जनता की जो भी शिकायतें और समस्याएं हैं, उनका निस्तारण सबसे पहले और समय से होना चाहिए.

गर्वित ने एक दिन के राजकीय अवकाश की भी घोषणा की, जिस पर वहां मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने मेज थपथपाकर और तालियां बजाकर खुशी जाहिर की. इस दौरान कई स्थानीय नागरिकों ने गर्वित को अपनी समस्याओं के ज्ञापन सौंपे और विभिन्न कार्यक्रमों के लिए इनवाइट किया.

10वीं में हासिल किए 82.83 फीसदी अंक

24 अगस्त 2010 को जन्मे गर्वित की कहानी भावुक करने के साथ इंस्पायर भी करती है. गर्वित डीएमडी नाम की गंभीर और लाइलाज जेनेटिक बीमारी से पीड़ित हैं. इस बीमारी के कारण शरीर का कोई भी अंग हाथ की हथेली और मस्तिष्क को छोड़कर काम नहीं करता. डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित बच्चे अमूमन 18 से 20 साल तक ही सर्वाइव कर पाते हैं.

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शुरुआती 7-8 साल तक गर्वित बिल्कुल सामान्य बच्चों की तरह खेलता-कूदता था, लेकिन इसके बाद अचानक बीमारी के लक्षण दिखने लगे. शारीरिक अक्षमता के बावजूद गर्वित का दिमाग बेहद शार्प है. उसने हाल ही में घोषित हुए साल 2026 के 10वीं के परीक्षा परिणामों में 82.83 प्रतिशत अंक हासिल किए. शारीरिक रूप से लिखने में असमर्थ गर्वित प्रश्नों के उत्तर बोलता था और उसकी जगह 9वीं कक्षा के छात्र ने परीक्षा में उत्तर लिखे.

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गर्वित के पिता सरकारी टीचर हैं और वर्तमान में खुद आरएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. गर्वित ने बताया कि मेरे घर में हमेशा से ही शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं का माहौल रहा है. मेरे पिता ही मेरी प्रेरणा हैं. उन्हें देखकर ही मेरे मन में देश की सेवा करने और आईएएस बनने का सपना जागा.

गर्वित ने कहा कि लाइफ में चाहे कितनी भी बड़ी परेशानी क्यों न हो, इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए. अपनी पढ़ाई और काम को 100 प्रतिशत दो. अगर आप पूरी लगन से मेहनत करोगे, तो वह मेहनत कभी बेकार नहीं जाएगी, सफलता के रूप में एक दिन उसका रिवॉर्ड (पुरस्कार) जरूर मिलेगा.

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डीडवाना-कुचामन के जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने कहा कि गर्वित के माता-पिता कुछ दिन पहले मुझसे मिले थे और उन्होंने बच्चे की इस इच्छा के बारे में बताया था. डीएमडी जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद इस बच्चे ने 10वीं में जो सफलता हासिल की है, वह हमारे पूरे जिले के लिए गर्व की बात है. इसे एक दिन का कलेक्टर बनाने का उद्देश्य यही था कि समाज और जिले के अन्य युवा मोटिवेट हो सकें. जिंदगी में परिस्थितियां कैसी भी हों, हमें कभी भी गिवअप (हार मानना) नहीं करना चाहिए.

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