ये कहानी राजस्थान के कोटा की है. एक घर में लोग किचन की ओर बढ़ रहे थे, तो दूसरे घर में दिन की शुरुआत की तैयारी थी. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उनके घर में रात के मेहमान इंसान नहीं, बल्कि एक जहरीला ब्लैक कोबरा और 8 फीट लंबा अजगर हैं. कोटा की ये दो घटनाएं मानसून में उस खतरे की कहानी हैं, जो कई बार चुपचाप घर के भीतर पहुंच जाता है.
पहली घटना नयागांव रोजड़ी इलाके की है. यहां रहने वाले फूल सिंह कुशवाहा के घर देर रात करीब साढ़े चार फीट लंबा ब्लैक कोबरा घुस आया. रात के समय जब परिवार के लोग उठे तो उनकी नजर पैरों के पास सरकते सांप पर पड़ी. सांप तेजी से रसोई की ओर गया और गैस चूल्हे के पास रखे रोटी के चकले के पीछे छिपकर बैठ गया. घर में मौजूद सदस्य घबरा गए और किसी तरह खुद को सुरक्षित करते हुए तुरंत स्नेक कैचर गोविंद शर्मा को सूचना दी.
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मौके पर पहुंचे गोविंद शर्मा ने सावधानी से कोबरा की तलाश शुरू की. कुछ देर बाद ब्लैक कोबरा चकले के पीछे छिपा मिला. रेस्क्यू के दौरान सतर्कता बरती गई और जहरीले सांप को सुरक्षित पकड़ लिया. इस घटना की सूचना वन विभाग को भी दी गई, इसके बाद सांप को जंगल में छोड़ दिया गया.
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दूसरी घटना दादाबाड़ी विस्तार योजना की है. यहां सुबह करीब साढ़े पांच बजे परिवार के लोग उठे तो घर के अंदर करीब 8 फीट लंबा अजगर घूमता नजर आया. अजगर को देखते ही पांचों सदस्य दहशत में आ गए और घर से बाहर निकल गए.
इसके बाद तुरंत स्नेक कैचर गोविंद शर्मा को बुलाया गया. गोविंद शर्मा ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से अजगर का रेस्क्यू किया और उसे लाडपुरा के जंगल में छोड़ दिया. इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारी भवानी सिंह को दी.
बारिश में क्यों बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं?
स्नेक कैचर गोविंद शर्मा ने बताया कि बारिश के मौसम में सांपों के बिलों और प्राकृतिक ठिकानों में पानी भर जाने की वजह से सांप और अन्य वन्यजीव सुरक्षित जगह की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं. ऐसे समय लोगों को घबराने या सांप को मारने की बजाय उससे सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
तुरंत वन विभाग या स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना देनी चाहिए, ताकि बिना किसी नुकसान के सांपों का रेस्क्यू किया जा सके. बारिश का दौर अभी जारी है. ऐसे में वन्यजीव विशेषज्ञों की सलाह है कि घर के आसपास झाड़ियां, कबाड़ और लकड़ी का ढेर न लगने दें. रात के समय टॉर्च का इस्तेमाल करें और खुले स्थानों पर सावधानी बरतें.
चेतन गुर्जर