नाबालिग से रेप केस में आसाराम को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी, जोधपुर जेल में किया सरेंडर

स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत रद्द किए जाने के बाद जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया. हाईकोर्ट ने 2013 के नाबालिग रेप मामले में उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. अदालत ने फैसले में पीड़िता की गरिमा और विश्वास के साथ हुए विश्वासघात पर कड़ी टिप्पणी भी की.

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आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर किया. (Photo: ITG) आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर किया. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • जोधपुर ,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:26 PM IST

नाबालिग से दुष्कर्म मामले में स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने साल 2013 के चर्चित रेप मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. इसके साथ ही अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत भी रद्द कर दी. इसके बाद आसाराम ने गुरुवार शाम जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया. 

आसाराम के जोधपुर पहुंचने की खबर मिलते ही एयरपोर्ट पर उनके समर्थकों की बड़ी भीड़ जमा हो गई. एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय उन्होंने गाड़ी के अंदर से समर्थकों का अभिवादन किया और आशीर्वाद भी दिया. इसके बाद वह पाल गांव स्थित अपने आश्रम पहुंचे.

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कुछ समय आश्रम में बिताने के बाद आसाराम मेडिकल जांच के लिए एम्स पहुंचे. मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्होंने शाम को जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचकर सरेंडर कर दिया. राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने बुधवार को यह फैसला सुनाया था. जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने विस्तृत फैसला देते हुए ट्रायल कोर्ट की सजा को सही माना. अदालत ने कहा कि यह मामला केवल अपराध का नहीं बल्कि विश्वास और गरिमा के टूटने का भी है.

आसाराम ने जोधपुर जेल में किया सरेंडर

फैसले के समय आसाराम अक्टूबर से मिली अंतरिम जमानत पर उत्तराखंड के हरिद्वार में रह रहे थे. हाईकोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत, जिसे 7 जुलाई तक बढ़ाया गया था, रद्द कर दी. अदालत ने अपने फैसले में पीड़िता को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का जन्म 4 जुलाई को हुआ था, जो अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है और स्वतंत्रता, गरिमा और आत्मसम्मान का प्रतीक माना जाता है. खंडपीठ ने कहा कि 15 अगस्त 2013 की रात, जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, उसी रात जोधपुर की एक झोपड़ी में उस बच्ची की स्वतंत्रता, गरिमा और मासूमियत छीन ली गई, जिसने आरोपी को भगवान जैसा माना था.

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कोर्ट ने यह भी कहा कि धार्मिक गुरुओं के प्रति लोगों का विश्वास बहुत गहरा होता है और कई बार अनुयायी बिना सवाल किए उनकी हर बात को मान लेते हैं. अदालत ने कहा कि इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. फैसला सुनाने से पहले अदालत ने कथित तौर पर कहा कि आरोपी के लिए फैसले में अच्छी और बुरी दोनों खबरें हैं और पूछा कि वह पहले कौन सी सुनना चाहता है.

सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में आसाराम पक्ष

हालांकि अदालत ने आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, लेकिन उन्हें गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट के तहत गैंग पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट से जुड़े कुछ आरोपों से बरी कर दिया. बता दें, आसाराम को साल 2018 में दोषी ठहराया गया था. आरोप था कि 2013 में जोधपुर स्थित उनके आश्रम में एक नाबालिग भक्त से दुष्कर्म किया गया था. आसाराम के वकील ने कहा है कि वे हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रहे हैं और आगे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने को लेकर फैसला लिया जाएगा.
 

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