नरवणे, एपस्टीन, ट्रेड डील... बजट सेशन में राहुल गांधी एजेंडा सेट करने में कामयाब रहे?

राहुल गांधी ने संसद सत्र में बजट को छोड़कर बहुत सारी बातें विस्तार से की. अलग अलग मुद्दे भी उठाए, जिस पर सरकार से टकराव हुआ. विपक्ष की तरफ से स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी दिया गया, लेकिन सत्ता पक्ष की तरफ से बोलकर भी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं लाया गया.

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राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी नरम रुख क्यों अपना रही है? (Photo: PTI) राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी नरम रुख क्यों अपना रही है? (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:45 PM IST

राहुल गांधी ने लोकसभा में ऐसे मुद्दे उठाए हैं, जो सीधे सीधे बजट सेशन से नहीं जुड़े थे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर सत्ता पक्ष के सीनियर मंत्री और नेता विपक्ष के राहुल गांधी की बातों को खारिज करते रहे, लेकिन राहुल गांधी ने शुरू से आखिर तक हमलावर बने रहे. 

विपक्ष के नेता के आक्रामक रुख को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिए जाने की बात कही थी, लेकिन बाद में मालूम हुआ कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है. हां, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ सब्सटैंसिव मोशन का नोटिस जरूर दिया है. 

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कांग्रेस नेता का कहना है कि ऐसी किसी भी चीज से वो डरने वाले नहीं हैं. जैसे 30-32 मामले हैं, एक और एफआईआर सही. और, अपनी ताजा लड़ाई को भी राहुल गांधी फिर से किसानों के हित से जोड़ दिया है. राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील में किसानों के हितों से समझौते का आरोप लगाया है.

बजट सत्र में राहुल गांधी ने की 'मन की बात'

1. बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में जब राहुल गांधी के बोलने का टाइम आया, तो वो बजट के बजाय भारत-चीन विवाद का मुद्दा उठा दिए. राहुल गांधी ने एक मैगजीन के हवाले से पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंश पढ़ने की कोशिश की, लेकिन स्पीकर ने अनुमति नहीं दी. 

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बाद में राहुल गांधी किताब की एक कॉपी लेकर संसद पहुंचे, तो बवाल और बढ़ गया. किताब के प्रकाशन स्टेटस को लेकर सवाल उठे. पब्लिशिंग हाउस पेंग्विन की तरफ से बताया गया कि किताब प्रकाशित हुई ही नहीं है, और फिर नरवणे का भी बयान आया कि स्टेटस वही है जो पेंग्विन की तरफ से बताया गया है. मामला दिल्ली पुलिस तक पहुंचा, केस दर्ज हुआ - और राहुल गांधी मुद्दे से आगे बढ़ गए. 

2. राहुल गांधी का संसद में भाषण पार्ट - 2 भी हुआ. राहुल गांधी ने एप्सटीन फाइल्स और अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील का मुद्दा उठाया. देश को बेच डालने से लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम एप्सटीन फाइल्स में होने के आरोप लगाए, और सवाल उठाए जाने पर कहा कि सबूत भी पेश करेंगे. और, अब भी उस बात पर कायम हैं. 

आरोपों पर सफाई देने के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तत्काल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और विस्तार से एप्स्टीन से मुलाकातों और मंशा के बारे में बताया. हरदीप सिंह पुरी ने मुलाकातों की बात तो मानी है, लेकिन उनका कहना है कि ये पूरी तरह प्रोफेशनल संपर्क था. हालांकि, हरदीप सिंह पुरी के बयान के बाद भी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस की तरफ से मुलाकातों को लेकर सवाल उठाए गए.  

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3. राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में कई किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है. राहुल गांधी ने किसान नेताओं के साथ अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते का विरोध करने के साथ ही किसानों और खेतिहर मजदूरों की आजीविका की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़े आंदोलन की जरूरत पर भी चर्चा की है. 

राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं, 'एफआईआर हो, मुकदमा दर्ज हो या प्रिविलेज मोशन लाएं... मैं किसानों के लिए लड़ूंगा. जो भी ट्रेड डील किसानों की रोजी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान विरोधी है... अन्नदाताओं के हितों से किसान विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे.'

क्या राहुल गांधी एजेंडा सेट करने लगे हैं?

राहुल गांधी अक्सर प्रसंग की परवाह नहीं करते, लेकिन कांग्रेस के मामलों में अलग स्टैंड लेना और संसद में बयान अलग अलग चीजें हैं. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने महंगाई पर रैली की थी. राहुल गांधी माइक पकड़े और हिंदुत्व पर बोलने लगे. खूब बोले. हिंदू, हिंदुत्व और हिंदूवादी पर बहस शुरू करा दी. चुनाव हुए, और प्रियंका गांधी की तमाम कोशिशों के बाद भी कांग्रेस को कुछ हासिल नहीं हुआ.  

1. बजट सेशन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बोलना था, लेकिन वो नहीं हो सका. प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ राज्यसभा में बोले. स्पीकर ओम बिरला की तरफ से बताया गया कि माहौल ठीक न होने के कारण ऐसा करना पड़ा. 

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2. राहुल गांधी के 'देश बेच देने' जैसे आरोपों के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु ने नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का नोटिस दिए जाने की बात कही थी, लेकिन बाद में बताया कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा. 

3. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सब्स्टेंटिव मोशन लाने के लिए नोटिस दिया है. अब ये स्पीकर के रुख पर निर्भर करता है कि वह क्या फैसला लेते हैं. निशिकांत दुबे चाहते हैं कि राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म करने के साथ ही आजीवन उनके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा दी जाए. 

4. लेकिन, विपक्ष की तरफ से ऐसा कोई परहेज नहीं देखा गया. विपक्ष की तरफ से स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है. और, नोटिस दिए जाने के तत्काल बाद से ही स्पीकर ने आसन से दूरी बना ली थी. 

राहुल गांधी की तरफ से लगातार चैलेंज किए जाने के बावजूद सत्ता पक्ष कोई ठोस एक्शन लिए जाने की तरफ बढ़ रहा हो, ऐसा नजर नहीं आता. राहुल गांधी के आरोपों को काउंटर करने के लिए भी सिर्फ बयानबाजी हो रही है, और कांग्रेस नेता के भाषण के कुछ अंश कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने की की बात कही गई है - तो क्या राहुल गांधी एजेंडा सेट करने लगे हैं, और केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी सिर्फ रिएक्ट कर रही है?

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