वोट के लिए खजाना खुला... बंगाल से तमिलनाडु तक चुनावी कैंपेन कैश बेनिफिट स्कीम भरोसे

2026 के विधानसभा चुनावों से पहले लोगों, खासकर महिला वोटर, को लुभाने की सरकारी योजनाएं चल पड़ी हैं. हाल ही में तमिलनाडु में महिलाओं के लिए एक योजना शुरू की गई, और अब पश्चिम बंगाल में युवा साथी स्कीम शुरू की गई है - बिहार के बाद गंगा बंगाल में बहती है, और बाकी जगह भी गंगाजल छिड़का जाना है.

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पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक महिला वोटर पर मेहरबान सभी राजनीतिक दल. (Photo: Prasun Bose/India Today) पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक महिला वोटर पर मेहरबान सभी राजनीतिक दल. (Photo: Prasun Bose/India Today)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:55 PM IST

लोगों के खाते में सीधे एक निश्चित रकम भेजने की स्कीम चुनाव जीतने का कारगर नुस्खा बनती जा रही है. यह सिलसिला तो पुराना चला आ रहा है, लेकिन बिहार चुनाव ने ऐसी सरकारी योजनाओं को चुनावी राजनीति में मील का पत्थर बना दिया है - बिहार के उदाहरण को देखते हुए उन सभी मुख्यमंत्रियों में वोटर के हिसाब से ऐसी योजनाएं चलाने की होड़ मची हुई है. 

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बिहार के महिलाओं को चुनाव से पहले पैसे देने के मुद्दे पर जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर तो विधानसभा चुनाव रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट ही पहुंच गए थे. नसीहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बैरंग लौटा दिया, ये बोलकर कि वह चाहें तो पटना हाई कोर्ट जा सकते हैं. 

बिहार चुनाव से पहले मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र चुनाव तक डायरेक्ट कैश ट्रांसफर स्कीम का चमत्कार देखा जा चुका था. दिल्ली में तो सत्ता में न होने के बावजूद बीजेपी फायदा मिला. चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल लोगों को बार बार समझा रहे थे    कि बीजेपी सत्ता में आई तो उनकी शुरू की हुई सभी योजनाएं बंद कर देगी. लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक ही बयान लोगों बीजेपी पर भरोसा कर लिया. प्रधानमंत्री मोदी का कहना था कि पहले से चली आ रही कोई भी कल्याणकारी योजना बंद नहीं की जाएगी. 

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2026 में भी जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं, वहां भी बारी बारी लोगों के खातों में सीधे रकम भेजने वाली योजनाएं लाई जा रही हैं. पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक, और असम से लेकर केरल तक - चुनाव जीतने का एक ही कारगर नुस्खा आजमाने की कोशिश चल रही है. 

युवा वोटर पर ममता की नजर

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव से पहले 'बांग्लार युवा साथी' स्कीम लेकर आई हैं. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर बीजेपी का आरोप रहा है कि वो केंद्र सरकार की योजनाएं राज्य में नहीं लागू करती हैं. असल में, ममता बनर्जी केंद्र सरकार की योजनाओं जैसी अपनी स्कीम चलाती हैं, और किसी न किसी बहाने केंद्र की कई योजनाओं को नजरअंदाज कर देती हैं. 

नई योजना 'बांग्लार युवा साथी' के 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने की अपेक्षा जताई जा रही है. ध्यान रहे, ठीक उसी दौरान जब पश्चिम बंगाल में घोर चुनावी माहौल बना हुआ होगा. बांग्लार युवा साथी योजना के तहत युवाओं को रोजगार तलाशने या स्किल डेवलपमेंट के लिए पश्चिम बंगाल सरकार हर महीने 1,500 रुपये देगी. 

चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने बंगाल के युवाओं का ध्यान तृणमूल कांग्रेस की तरफ खींचने के मकसद से इस योजना की शुरुआत की है. स्कीम के तहत टीएमसी सरकार ने 21 से 40 साल के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह स्कीम उन युवाओं के लिए है, जो दसवीं से आगे पढ़ाई नहीं कर पाए हैं.

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, 15 फरवरी से इस स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है. रजिस्ट्रेशन शुरू होते ही बंगाल के 294 विधानसभा क्षेत्रों में लगे कैंप के बाहर पहले ही कतारें लग गईं. ये कैंप 26 फरवरी तक रोजाना सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक रजिस्ट्रेशन के लिए खुले रहेंगे.

पहले यह योजना 15 अगस्त से लागू की जानी थी, लेकिन इसे एडवांस करके 1 अप्रैल, 2026 कर दिया गया है. 

संयोग से राज्य में विधानसभा चुनाव भी कुछ ही महीनों में होने हैं. जो लोग पहले से सरकार की किसी दूसरी कल्याणकारी योजना का लाभ ले रहे हैं, वे बांग्लार युवा साथी योजना के लिए पात्र नहीं होंगे, लेकिन स्कॉलरशिप पर यह नियम लागू नहीं होगा. 

तमिलनाडु में महिलाओं के लिए स्कीम

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 'कलैगनार मगलिर उरिमै थोगाई' योजना की रकम डबल कर देने का वादा किया है. एमके स्टालिन ने कहा है कि डीएमके अगर सत्ता में लौटती है, तो महिलाओं को हर महीने दी जाने वाली 1,000 रुपये की मदद बढ़ाकर 2,000 कर दी जाएगी.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो संदेश में बताया गया है कि फरवरी से तीन महीने तक यह एक्स्ट्रा मदद दी जाएगी, और गर्मियों में खर्च के लिए अलग से 2,000 और दिए जाएंगे. और, इस तरह कुल पांच हजार रुपये महिलाओं के खाते में भेजे जाने का ऐलान किया गया है. 

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एमके स्टालिन ने महिलाओं से अपील की है कि वे इस रकम का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, दवाई और जरूरी घरेलू खर्चों के लिए करें. स्टालिन ने 1.31 करोड़ महिलाओं के खाते में एक साथ 5000 रुपये देने का ऐलान किया है. इसमें कलैगनार स्कीम के 3000 रुपये के साथ 2000 रुपये समर हेल्प राशि भी शामिल है.

असम में अरुणोदय 3.0

असम में 20 फरवरी को महिलाओं को 8 हजार रुपये भेजे जाने का ऐलान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले ही कर चुके हैं. असम सरकार ने राज्य की 37 लाख से ज्‍यादा महिलाओं को 'अरुणोदोई' योजना के तहत बोहाग बिहू से पहले ये रकम देने की घोषणा की थी. बोहाग बिहू असम में नए साल का त्योहार होता है, जिसे हर साल अप्रैल महीने में मनाया जाता है. और, उसी वक्त असम में विधानसभा के चुनाव हो रहे होंगे. 

यह भी बताया गया है कि 8 हजार में 3 हजार रुपये की अतिरिक्त रकम बिहू के उपहार के तौर पर दी जाएगी. और, बाकी अरुणोदोई योजना की तीन किस्तों के तौर पर होगी. ये किस्तें एक साथ और एडवांस में दी जानी हैं. 

अरुणोदोई स्कीम को असम में 'ओरुणोदोई' योजना भी कहते हैं. यह स्कीम 2 अक्टूबर, 2020 को शुरू की गई थी. शुरू में योजना के तहत हर महीने 830 रुपये दिए जाते थे. अक्टूबर, 2021 से इसे बढ़ाकर 1,000 प्रति माह कर दिया गया, और 14 दिसंबर, 2022 को शुरू हुई अरुणोदोई योजना 2.0 में 250 रुपये बढ़ाकर ये रकम 1,250 कर दी गई थी - अरुणोदोई योजना 3.0 में रकम बढ़कर अब 1500 रुपये हो चुकी है, जिसमें 1250 रुपये कैश और 250 रुपये एलपीजी सब्सिडी के रूप में दी जा रही है.

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वैसे ही असल के युवाओं के लिए ‘निजुत मोइना' योजना बनाई गई है. इस योजना के तहत पोस्टग्रेजुएट छात्रों को 2,000 रुपये प्रति माह, अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वालों को 1,000 रुपये हर महीने मदद राशि के रूप में दी जानी है.

केरल में महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए स्कीम

केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना की शुरुआत की है. आधिकारिक रूप से यह योजना 22 दिसंबर, 2025 से प्रभावी है. योजना का मकसद महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को आर्थिक मदद देकर उनको आत्मनिर्भर बनाना है, जिनके पास आमदनी का कोई और साधन नहीं है. 

स्त्री सुरक्षा योजना के तहत केरल की पात्र महिलाओं और ट्रांसजेंडर को हर महीने 1,000 रुपये बतौर पेंशन दिए जाने का प्रावधान किया गया है. केरल की 35 से 60 साल की उम्र की बेरोजगार महिलाओं और ट्रांसजेंडर को हर महीने यह रकम सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी.

हालांकि, जो महिलाएं पहले से विधवा पेंशन, अविवाहित महिला पेंशन, दिव्यांग पेंशन, सर्विस पेंशन, फैमिली पेंशन या EPF पेंशन ले रही हैं, वे इस स्कीम के लिए पात्र नहीं हैं.

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