बंगाल पर फतह के साथ ही, बीजेपी 2024 के जोर के झटके से दो साल में धीरे धीरे उबर गई. राज्यसभा में हाल ही में नंबर में बढ़ा चुकी भारतीय जनता पार्टी, पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है - और असम में जोरदार वापसी के साथ ही पु्ड्डुचेरी में भी सरकार बनाने जा रही है.
'अबकी बार 400 पार' का नारा 2024 में अधूरा रह गया था, विधानसभा चुनाव की ताजातरीन जीत ने उसकी पूरी तरह भरपाई कर दी है. राजनीति ही नहीं, किसी भी फील्ड में लगा झटका नेता हो या पार्टी सबको डावांडोल कर देता है. कांग्रेस को तो संभलने में 10 साल लग गए, लेकिन बीजेपी ने तो 24 महीने में ही हिसाब बराबर कर लिया है.
पश्चिम बंगाल की जीत का रिहर्सल तो बीजेपी ने दिल्ली चुनाव में ही कर लिया था. दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के बाद बीजेपी ने राज्यसभा में भी AAP को कमजोर कर दिया. और, आम आदमी पार्टी से 7 सांसदों के मिल जाने के बाद राज्यसभा में भी बीजेपी बहुमत के करीब पहुंच चुकी है.
लोकसभा में बीजेपी को महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर हार का मुंह देखना पड़ा था, बंगाल और तमिलनाडु के नतीजे बीजेपी के जख्मों पर मरहम का काम कर रहे होंगे - मिशन बाउंसबैक के दौरान बीजेपी ने ब्रांड मोदी को समृद्ध तो किया ही, विपक्ष के बिखरे होने का भी पूरा फायदा उठाया है.
बीजेपी के लिए बंगाल की जीत के मायने
पश्चिम बंगाल पर बीजेपी की नजर तो 2014 से ही टिकी हुई थी. पांच साल बाद 2019 के आम चुनाव में उसकी मजबूत झलक भी दिखी थी. सात साल बाद 2021 में अपनी तरफ से बीजेपी ने भरपूर कोशिश भी की थी, लेकिन ख्वाहिशें अधूरी रह गई थीं. 10 साल बाद 2024 के चुनाव में बीजेपी को पिछले चुनाव वाली कामयाबी तो नहीं मिली, लेकिन आगे की कामयाबी का नुस्खा जरूर मिला.
भवानीपुर की लड़ाई की नींव आम चुनाव के नतीजों ने ही डाली थी, जब आठ वार्डों में से पांच में बीजेपी ने टीएमसी को पछाड़ दिया था. यही वो बात है जिसने बीजेपी को भवानीपुर से भी शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ाने के लिए प्रेरित किया - और चुनावी रुझान बता रहे हैं कि फैसला सही था.
2024 के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने ज्यादातर चुनावों में जीत हासिल की है. आम चुनाव के ठीक बाद 2024 में हरियाणा में चुनाव हुए, बीजेपी ने सत्ता में वापसी की. फिर महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा के चुनाव हुए, बीजेपी ने महाराष्ट्र को तरजीह दी, और झारखंड में बस कोरम पूरा किया. महाराष्ट्र बीजेपी के लिए ज्यादा जरूरी था, चुनाव जीतने के साथ ही बीजेपी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर फिर से कब्जा जमा लिया.
2025 में दिल्ली और बिहार में चुनाव हुए. दिल्ली की जीत के साथ ही बीजेपी ने बंगाल की भी तैयारी तेज कर दी थी. असल में, दिल्ली और बंगाल दोनों ही राज्यों में बीजेपी बार बार चूक जा रही थी. दिल्ली में अपना मुख्यमंत्री बनाने के बाद बिहार चुनाव जीतने के कुछ दिन बाद अपना मुख्यमंत्री बनाया - और फिर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो कहा ही था, गंगा बिहार से बंगाल की ओर ही बहती है.
बंगाल की जीत के साथ ही बीजेपी के मिशन 'पंचायत से पार्लियामेंट तक' का रास्ता थोड़ा आसान हो गया है. आसान इसलिए क्योंकि केरल से लेफ्ट और तमिलनाडु से डीएमके का कब्जा हट गया है. तमिलनाडु में बीजेपी पहले से ही AIADMK के साथ गठबंधन में है. केरल में सत्ता में आ रहे कांग्रेस गठबंधन से बीजेपी के लिए लड़ना आसान होगा, और तमिलनाडु में बदले हालात में पांव जमाने में भी पहले जैसी मुश्किल तो नहीं ही होगी.
अगले साल होने वाले चुनावों में दो राज्यों पर बीजेपी की नजर होगी. पंजाब और हिमाचल प्रदेश में 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जिसे बीजेपी से दिल्ली चुनाव के बाद हाल ही में एक और बड़ा झटका मिला है. 2022 में बीजेपी गुजरात चुनाव पर फोकस रही, और एक फीसदी से भी कम वोट शेयर के अंतर से कांग्रेस ने सत्ता झटक ली.
राज्यसभा में बीजेपी की स्थिति मजबूत
आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के बीजेपी में शामिल हो जाने से राज्यसभा में एनडीए का नंबर बढ़कर 147 हो गया है. वैसे बीजेपी अकेले अब भी साधारण बहुमत से 10 कदम दूर है. राज्यसभा में साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है.
झारखंड से एक सीट खाली वैकेंट होने के कारण राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या फिलहाल 244 है. दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों की जरूरत होती है, और बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए को इसके लिए अब भी 18 सदस्यों की दरकार है.
दो-तिहाई बहुमत तो एनडीए की लोकसभा में भी नहीं है, वरना महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल कहां गिर पाता - पश्चिम बंगाल चुनाव की जीत संसद की विशेष बैठक में विपक्ष से मिले दर्द की भी दवा साबित हुई है.
ब्रांड मोदी और हिंदुत्व एजेंडा
2025 के दिल्ली चुनाव में बीजेपी मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाई थी. लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा होते हुए महाराष्ट्र और फिर दिल्ली जीतकर बीजेपी ने ब्रांड मोदी को फिर से स्थापित कर दिया. बिहार में तो ब्रांड मोदी ने बीजेपी को ऐसी जीत दिलाई कि 2014 की तरह विपक्ष को सबसे कम सीटों पर समेट दिया.
ब्रांड मोदी के जरिए बीजेपी ने बिहार वाली बयार बंगाल में भी बहा डाली है. ब्रांड मोदी, केंद्र सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं और डबल इंजन की सरकार के नारे के साथ बीजेपी फिलहाल 16 राज्यों में शासन कर रही है, और अब पश्चिम बंगाल को मिलाकर ये संख्या 17 हो जाएगी. और, वैसे ही बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए शासित राज्यो की संख्या 23 हो जाएगी.
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की हार को बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने सनातन से जोड़ कर पेश किया. शुभेंदु अधिकारी ने कहा, सरकार के खिलाफ माहौल है, हिंदू वोट कमल के पक्ष में एकजुट हुए हैं.
वैसे ही तमिलनाडु में डीएमके की हार को भी बीजेपी समर्थक सनातन से जोड़ कर पेश कर रहे हैं. डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने सनातन को डेंगू और मलेरिया की तरह खत्म करने की बात कही थी.
बिखरे विपक्ष का पूरा फायदा बीजेपी को मिला है
कभी नीतीश कुमार भी बीजेपी और मोदी विरोध की बुलंद आवाज हुआ करते थे, लेकिन एक दिन ऐसा आया जब नीतीश कुमार कहने लगे थे कि गलती हो गई थी. अब कहीं नहीं जाएंगे, और अब तो ये सब बीते दिनों की बातें हो चुकी हैं.
नीतीश कुमार के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अलावा, मोदी और बीजेपी विरोध की दो आवाजें अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी हुआ करते थे. दिल्ली चुनाव में हार के बाद अरविंद केजरीवाल को उनके राज्यसभा सांसदों ने ही जोरदार झटका दिया है. राहुल गांधी भूल जाते हैं कि क्षेत्रीय दलों के मजबूत होने से ही विपक्ष मजबूत होता है, लेकिन दिल्ली जैसा ही स्टैंड कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में भी लिया. नतीजा सबके सामने है.
अव्वल तो ममता बनर्जी चुनाव जीत जातीं तो भी इंडिया ब्लॉक में कहर बरपातीं, लेकिन अब बात ही और है. केरल में भी भले ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन को सत्ता मिलने जा रही है, लेकिन तमिलनाडु में एमके स्टालिन की हार ने राहुल गांधी को कमजोर तो किया ही है - और ऐसी सारी चीजें बीजेपी की ताकत में लगातार इजाफा कर रही हैं.
मृगांक शेखर