ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में आज बुधवार शाम श्रद्धालुओं को चार घंटे तक भगवान के दर्शन नहीं होंगे. मंदिर प्रशासन ने घोषणा की है कि विशेष धार्मिक अनुष्ठान 'बनकलागी' के कारण शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक दर्शन व्यवस्था बंद रहेगी. यह कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि भगवान के दिव्य स्वरूप से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण परंपरा है.
एजेंसी के अनुसार, 'बनकलागी' को 'श्रीमुख श्रृंगार' भी कहा जाता है इस अनुष्ठान में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के चेहरे को नए सिरे से सजाया और रंगा जाता है. समय के साथ विग्रहों के मुखमंडल पर लगे रंग फीके पड़ जाते हैं. ऐसे में इस विशेष सेवा के दौरान उनके चेहरे पर फिर से प्राकृतिक रंग लगाए जाते हैं, ताकि उनका दिव्य स्वरूप पहले की तरह आकर्षक और पूर्ण बना रहे.
जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं में हर सेवा का अधिकार एक विशेष सेवायत समुदाय के पास होता है. बनकलागी की जिम्मेदारी 'दत्ता महापात्र' सेवायतों की होती है. यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. इस अनुष्ठान की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी आधुनिक या रासायनिक रंग का इस्तेमाल नहीं होता.
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भगवान के मुखमंडल को सजाने के लिए कस्तूरी, कपूर और विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह सिर्फ श्रृंगार नहीं बल्कि भगवान की सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
बनकलागी अनुष्ठान के दौरान भगवान के विग्रहों का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस वजह से गर्भगृह में केवल सेवायतों को ही प्रवेश की अनुमति होती है. यही कारण है कि शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे. अनुष्ठान पूरा होने के बाद मंदिर के द्वार दोबारा खोल दिए जाएंगे. जगन्नाथ मंदिर में होने वाले ऐसे विशेष अनुष्ठानों का महत्व रथ यात्रा के मौसम में और बढ़ जाता है. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु भगवान के इन पारंपरिक अनुष्ठानों को लेकर विशेष आस्था रखते हैं.
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