मेघालय हाई कोर्ट ने सोमवार को ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सोनम रघुवंशी को ज़मानत दी गई थी. सोनम पर 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है. जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की सिंगल-जज बेंच ने राज्य सरकार की आपराधिक याचिका को खारिज कर दिया. सरकार ने 27 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई ज़मानत को रद्द करने की मांग की थी.
जस्टिस डिएंगडोह ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार जिस तरह से तैयार किए गए थे, उससे पता चलता है कि उसमें "न्यायिक सोच का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया". कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि ऐसी तैयारी बिना किसी सोच-विचार के की गई थी और कहीं भी कोई खास आरोप या जानकारी नहीं मिलती. पुलिस स्पष्ट भी नहीं कर सकी कि आखिर सोनम रघुवंशी के खिलाफ असल में क्या आरोप हैं?
कोर्ट ने राज्य की याचिका खारिज की
कोर्ट ने कहा कि अगर गिरफ्तारी के आधार की जानकारी इस तरह दी जाती है तो यह गिरफ्तारी करने वाली एजेंसी की ओर से न्यायिक सोच के पूरी तरह से इस्तेमाल न किए जाने को दिखाता है. कोर्ट ने राज्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उसके पास ज़मानत रद्द करने के लिए अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल करने का कोई आधार नहीं है.
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली सोनम को पिछले साल जून में अपने बिजनेसमैन पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था. यह जोड़ा 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में छुट्टियां मनाने के दौरान लापता हो गया था. इसके बाद 2 जून को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई में मिला. पुलिस का आरोप है कि सोनम ने ही अपने पति की हत्या की साजिश रची थी.
aajtak.in