'साहब, मैं जिंदा हूं...', मंत्री के पैरों में गिरकर मांगी 'जिंदगी', 14 साल बाद हुआ 'जिंदा'

80 वर्षीय भूरा आदिवासी को सरकारी रिकॉर्ड में 14 साल पहले मृत घोषित कर दिया गया था. अपनी ही जमीन और वजूद को वापस पाने के लिए इस बुजुर्ग ने 11 साल तक दर-दर की ठोकरें खाईं.

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लंबी लड़ाई के बाद जमीन और पहचान दोनों वापस.(Photo:ITG) लंबी लड़ाई के बाद जमीन और पहचान दोनों वापस.(Photo:ITG)

दिलीप शर्मा (दीपक)

  • पन्ना ,
  • 22 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 1:31 PM IST

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 80 वर्षीय बुजुर्ग को सरकारी रिकॉर्ड में 14 साल पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था. कागजों में मृत बताए गए बुजुर्ग भूरा वास्तविक रूप से जीवित थे और पिछले 11 साल से अपने जिंदा होने का प्रमाण शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को देते रहे.

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पन्ना जिला मुख्यालय से महज सात किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत जनवार के भूरा आदिवासी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित होने के बाद पटवारी और तहसीलदार स्तर पर फौती और नामांतरण की प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई.

इतना ही नहीं, बुजुर्ग की जमीन-जायदाद तक का विक्रय कर दिया गया. जिंदा होते हुए भी भूरा कागजों में 'मरा' रहा और न्याय के लिए दर-दर भटकता रहा. आखिरकार बुजुर्ग ने पन्ना के प्रभारी मंत्री के पैरों में गिरकर अपनी व्यथा सुनाई.

मामला मंत्री के संज्ञान में आते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और वर्षों पुरानी गलती का एहसास हुआ. इसके बाद जांच कराई गई, जिसमें बुजुर्ग के जीवित होने की पुष्टि हुई. करीब 11 साल की लंबी लड़ाई के बाद प्रशासन ने गलती सुधारते हुए बुजुर्ग को सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा' घोषित किया और विक्रय की गई जमीन भी वापस दिलाई गई.

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गांव के दबंगों से परेशान होकर भूरा आदिवासी रोजी-रोटी की तलाश में कटनी चले गए थे. उनके लंबे समय तक गांव न लौटने का फायदा उठाकर पटवारी और तहसील स्तर पर उन्हें मृत (फौती) घोषित कर दिया गया.

23 दिसंबर 2011 को उनकी 2.19 हेक्टेयर जमीन उनके बेटों (रूपलाल और रामेश्वर) के नाम कर दी गई और बाद में जमीन का एक हिस्सा बेच भी दिया गया. जब भूरा वापस गांव लौटे, तो उन्हें पता चला कि सरकारी दस्तावेजों में वह मर चुके हैं और उनकी जमीन भी उनकी नहीं रही.

मंत्री के पैरों में गिरकर मांगी 'जिंदगी'

पिछले 11 वर्षों से भूरा आदिवासी कलेक्टर से लेकर नेताओं तक के चक्कर काट रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार जब एक कार्यक्रम में जनवार पहुंचे, तो 80 साल का यह बुजुर्ग उनके चरणों में गिर पड़ा और रोते हुए कहा, "साहब, मैं जिंदा हूं!'' मंत्री के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा और आनन-फानन में जांच शुरू हुई.

11 साल बाद मिला न्याय

प्रशासन ने अपनी गलती मानते हुए 15 दिसंबर 2025 को ऐतिहासिक सुधार किया. बेची गई जमीन की रजिस्ट्री को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया. सरकारी कागजों में भूरा को दोबारा 'जीवित' दर्ज किया गया. SDM संजय कुमार नागवंशी खुद टीम के साथ पहुंचे और बुजुर्ग को उनकी जमीन वापस दिलाने के आदेश दिए.

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SDM संजय कुमार नागवंशी ने, "जांच में पाया गया कि भूरा आदिवासी जीवित हैं, इसलिए उनकी जमीन लौटाने का आदेश दिया गया है. जो जमीन बिक चुकी थी, उसकी रजिस्ट्री भी शून्य कर दी गई है. भविष्य में भी ऐसे मामले सामने आएंगे तो आदिवासियों के हितों की रक्षा करते हुए प्रशासन तत्परता से काम करेगा."

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