मध्य प्रदेश की सियासत में अक्सर विवादित बयानों देने वाले पिछोर से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर विवाद में घिर गए हैं. इस बार उन्होंने ग्वालियर-चंबल अंचल के कुख्यात और 15 लाख रुपये के इनामी रहे डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना 'भाई' और 'सुख-दुख का साथी' बताकर उसकी जमकर तारीफ की है.
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम में बीजेपी विधायक ने डकैत की तस्वीर पर न सिर्फ फूल-माला चढ़ाई, बल्कि मंच से उसे हालात का शिकार बताते हुए खुद को भाग्यशाली भी करार दिया.
शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से विधायक प्रीतम लोधी क्षेत्र में बघेल समाज के बैनर तले आयोजित माता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे.
इस दौरान मंच पर अहिल्याबाई होल्कर की तस्वीर के ठीक बगल में 100 से अधिक हत्या, लूट और अपहरण के मामलों के आरोपी डकैत रामबाबू गड़रिया की भी फोटो रखी गई थी. विधायक ने लोकमाता के साथ-साथ डकैत की तस्वीर पर भी पुष्प अर्पित किए.
'जेल और जंगल में हुई थी हमारी मुलाकात'
मंच से जनता को संबोधित करते हुए प्रीतम लोधी ने डकैत का खुलकर बचाव किया और कहा, ''मैंने हमेशा डकैत रामबाबू गड़रिया का साथ दिया है, वह मेरे सुख-दुख का साथी था, मेरा भाई था. आज मुझे रामबाबू की फोटो पर माल्यार्पण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और यह मेरे लिए गर्व की बात है.
रामबाबू परिस्थितियों का शिकार था. समाज के कुछ लोगों ने उसे इतना परेशान किया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया, अन्यथा वह ऐसा व्यक्ति नहीं था. हमारी मुलाकात जेल में भी हुई थी और जंगल में भी हुई थी. मुझे उसकी जेल से लेकर जंगल तक की एक-एक बात आज भी याद है.''
विधायक ने समाज के लोगों के सामने भावुक कार्ड खेलते हुए सवाल दागा, "उस दौर में लोगों को सिर्फ इतना दिखाई देता था कि एक गुंडा एक डकैत का सहयोग कर रहा है, लेकिन क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते? एक बहन पर अत्याचार हुआ था तो मैंने 5 हजार लोगों के साथ कमिश्नरी घेरी थी." देखें VIDEO:-
'अब मेरा हाथ ढाई सौ किलो का है'
बघेल समाज को साधते हुए प्रीतम लोधी ने मंच से कसम खाई कि जिस तरह उन्होंने रामबाबू के परिवार का साथ दिया था, उसी तरह वह पाल-बघेल समाज का साथ देंगे और कभी पीछे नहीं हटेंगे. अपनी ताकत का अहसास कराते हुए विधायक ने फिल्मी अंदाज में कहा, "जब मैंने पहले रामबाबू का साथ दिया था, तब मेरा हाथ ढाई किलो का था. अब आप लोगों ने उसे बढ़ाकर 250 किलो का कर दिया है. आपकी रक्षा और सुरक्षा के लिए प्रीतम लोधी का यह 250 किलो का हाथ हमेशा तैयार रहेगा." देखें VIDEO:-
कौन था डकैत रामबाबू गड़रिया?
पुलिस रिकॉर्ड में 'टी-वन' पर रहने वाला रामबाबू गड़रिया और उसका भाई दयाराम गड़रिया चंबल संभाग के सबसे खूंखार डकैतों में गिने जाते थे.
13 गुर्जरों का नरसंहार
इस गैंग का सबसे बर्बर चेहरा तब सामने आया था, जब इन्होंने ग्वालियर जिले के भंवरपुरा गांव में साल 2004 में 13 गुर्जर समाज के लोगों को एक लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया था.
इंजीनियर-शिक्षकों का अपहरण
इस गिरोह पर मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इस गैंग ने इंजीनियरों से लेकर शिक्षकों और कई सरकारी अधिकारियों का फिरौती के लिए अपहरण किया था.
डकैत बनने की कहानी
साल 1998 में परिवार की एक महिला को लेकर हुए विवाद के बाद रघुवर, रामबाबू और दयाराम गडरिया अपने ही एक रिश्तेदार की हत्या कर फरार हो गए थे. तत्कालीन एसपी प्रदीप रुनवाल ने गांव में पुलिस सुरक्षा दी, इसके बावजूद इस कुख्यात कुनबे ने एक और हत्या कर दी और बाद में पूरा गिरोह चंबल के जंगलों में आतंक का पर्याय बन गया था.
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बता दें कि प्रीतम लोधी का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है. इस बयान से ठीक पहले THAR से राह चलते लोगों को कुचलने वाले अपने बेटे दिनेश लोधी का पक्ष लेते हुए BJP विधायक ने करैरा के SDOP आयुष जाखड़ को लेकर बेहद अमर्यादित और विवादित टिप्पणी की थी.
उन्होंने सरेआम IPS अफसर को चुनौती देते हुए कहा था, "करैरा तेरे डैडी का नहीं है, एसडीओपी. मेरा बेटा करैरा आएगा और चुनाव भी लड़ेगा. अगर तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना."
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इससे पहले भी वे ब्राह्मणों और कथावाचकों पर टिप्पणी कर BJP से निष्कासित हो चुके हैं, हालांकि बाद में उनकी वापसी हुई और वे विधायक बने.
मनोज भार्गव