चढ़ावा चोरी रोकने के लिए उज्जैन के महाकाल मंदिर में क्या हैं इंतजाम?

अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटनाएं सामने आने के बाद देशभर के मंदिर चर्चा का केंद्र बन गए हैं. चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ी हुई है.

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महाकाल मंदिर में चढ़ावे की गिनती के समय मौजूद रहते हैं अधिकारी (Photo: ITG) महाकाल मंदिर में चढ़ावे की गिनती के समय मौजूद रहते हैं अधिकारी (Photo: ITG)

संदीप कुलश्रेष्ठ

  • संदीप उज्जैन,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:02 PM IST

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर में भी चढ़ावा चोरी का आरोप लगा. दो बड़े मंदिरों में देशभर के मंदिरों में चढ़ावे को लेकर चर्चा छिड़ गई है. उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी हर दिन देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं, जो बाबा महाकाल के चरणों में सोने-चांदी सहित बहुमूल्य आभूषण और नकदी दान में चढ़ाते हैं. चढ़ावा चोरी की घटनाओं को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच अब महाकाल मंदिर प्रशासन का बयान आया है.

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महाकाल मंदिर प्रशासन ने दावा किया है कि दान राशि के एक-एक आने का हिसाब मंदिर समिति के पास मौजूद है. सोना कितने कैरेट का है, चांदी किस स्तर की है, इन सभी को परखने के लिए एक टीम भी है, जो लिखित में पूरा ब्यौरा देती है. दरअसल, हाल के दिनों में मंदिरों में आने वाले चढ़ावे को लेकर तरह तरह की खबरें सामने आई हैं. कहीं पर दान की राशि का गबन किया गया तो कहीं धातु बदले जाने की शिकायतें सामने आईं. वैष्णो देवी माता मंदिर से चढ़ावे में आई करीब 20 टन से अधिक चांदी जांच में नकली पाई गई, जिसकी अनुमानित कीमत 550 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

मंदिर प्रशासन का दावा है कि महाकाल मंदिर का त्रिनेत्र कंट्रोल एंड कमान सिस्टम सुरक्षा की पूरी व्यवस्था संभालता है. महाकाल मंदिर में कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी की निगरानी में आने वाले दान की एक-एक चीज चेक की जाती है. साथ ही दान का पूरा ब्यौरा कंप्यूटर और सरकारी दस्तावेजों में तुरंत दर्ज कर दिया जाता है, ताकि किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो. मंदिर प्रशासन की ओर से नियुक्त सुनारों की तीन सदस्यीय टीम चढ़ावे में आने वाले आभूषणों का बारीकी से परीक्षण करती है. दान चढ़ावे में आए धातू को परखा जाता है और शुद्धता का सत्यापन होने के बाद दानदाता को मंदिर समिति की ओर से बाकायदा रसीद दी की जाती है.

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सोने-चांदी को परखने की प्रक्रिया मंदिर समिति के कोठार प्रभारी और कर्मचारियों के साथ ही डिप्टी कलेक्टर स्तर के एक अधिकारी की मौजूदगी में पूरी की जाती है. इनकी देखरेख में ही दान की गई सामग्री को सुरक्षित कोठार शाखा, जिसे खजाना कहा जाता है, वहां रख दिया जाता है. महाकालेश्वर मंदिर समिति की उप प्रशासक सिमी यादव ने कहा कि व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाया जा रहा है. जल्द ही मंदिर में एक हाईटेक मशीन स्थापित की जाएगी. इस मशीन की मदद से चढ़ावे में आने वाले सोने और चांदी के असली या नकली होने का तुरंत पता लगाया जा सकेगा.

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मंदिर समिति की उप प्रशासक ने कहा कि सुनारों की तीन सदस्यीय टीम भी पहले की तरह आभूषणों की जांच का काम जारी रखेगी, जिससे सुरक्षा का घेरा दोगुना मजबूत हो जाएगा. महाकाल मंदिर में चढ़ावे की पारदर्शिता पर उठे सवालों के बीच उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री ने बताया कि महाकाल मंदिर में हर चढ़ावे की निगरानी सीसीटीवी से की जाती है और मंदिर में पूरी पारदर्शिता से हिसाब रखा जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विचारधाराएं सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं. मंत्री टेटवाल का कहना था कि देशभर में जहां भी कोई गड़बड़ी होगी, निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
 

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