कूनो के चीतों को रोजाना ₹35 हजार का बकरी मांस, साल भर में ₹1.27 करोड़ खर्च; विधानसभा में सरकार का खुलासा

Kuno Cheetah Food Cost: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कूनो नेशनल पार्क और वहां रह रहे चीतों के रखरखाव व खान-पान को लेकर सरकार ने आंकड़े पेश किए हैं. विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चीतों की मौजूदा संख्या और उनके खर्च का ब्यौरा दिया.

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वर्तमान में कुनो नेशनल पार्क में कुल 32 चीते मौजूद हैं. (FIle Photo) वर्तमान में कुनो नेशनल पार्क में कुल 32 चीते मौजूद हैं. (FIle Photo)

नीरज चौधरी

  • भोपाल,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:38 AM IST

मध्य प्रदेश सरकार कूनो नेशनल पार्क में रहने वाले चीतों को बकरी का मांस खिलाने के लिए हर दिन औसतन 35000 रुपये खर्च करती है. विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार साल 2024-25 में चीतों के लिए बकरी का मांस खरीदने पर 1.27 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं.

विधानसभा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि चीतों के भोजन के लिए कोई अलग से हेड नहीं है, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन की राशि से ही इसका भुगतान किया जाता है. अब तक 1 करोड़ 27 लाख 10 हजार 870 रुपये केवल मांस खरीदने पर खर्च हुए हैं. यानी औसतन 35000 रुपये प्रतिदिन.

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सरकार के अनुसार, रोजाना कितने बकरे खिलाए जाएंगे, इसका कोई फिक्स मानक नहीं है. यह पूरी तरह चीतों की जरूरत और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है.

कांग्रेस विधायक मल्होत्रा ने जब चीतों के सीमा से बाहर निकलने पर सवाल उठाया, तो सरकार ने कई चौंकाने वाली बातें स्वीकार कीं. मुख्यमंत्री ने माना कि खुले जंगल में रह रहे चीते अक्सर कूनो की सीमाएं लांघकर ग्वालियर, शिवपुरी, मुरैना और राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पहुंच जाते हैं. इस दौरान वे ग्रामीणों की बकरियों और मवेशियों का शिकार भी करते हैं.

विधायक ने आरोप लगाया कि पार्क के अंदर पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण चीते बाहर भाग रहे हैं. हालांकि, सरकार ने निगरानी टीम की सक्रियता का हवाला देते हुए इसे 'स्वभाविक विचरण' बताया.

क्या लापरवाह है सिस्टम?
दिसंबर 2025 में घाटीगांव हाईवे पर एक चीते की सड़क दुर्घटना में हुई मौत को लेकर सदन में तीखे सवाल हुए. कांग्रेस विधायक ने पूछा कि क्या कूनो स्टाफ और डिपार्टमेंटल ऑफिसर चीतों की भलाई और सुरक्षित रखने के लिए लापरवाह हैं?

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स्टाफ को क्लीन चिट 
सरकार ने लिखित जवाब में माना कि 6 दिसंबर 2025 को हाईवे पर भटकने के बाद एक एक्सीडेंट में चीते की जान गई थी. लापरवाही के सवाल पर सरकार ने अपने अधिकारियों का बचाव किया.

CM ने कहा कि ट्रैकिंग टीम प्रभावी ढंग से काम कर रही है और हाईवे पर हुई मौत महज एक दुर्घटना थी, इसके लिए किसी अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

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