MP में जंगली भैंसों की वापसी... कान्हा में लाए जा रहे 50 वाइल्ड बफेलो; गैंडे भी आएंगे भोपाल, बदले में असम को मिलेंगे बाघ

Wild Buffalo Translocation: MP में चीतों के बाद अब जंगली भैंसों की 'घर वापसी'! असम के काजीरंगा से वाइल्ड बफेलो कान्हा टाइगर रिजर्व लाए जा रहे हैं. CM मोहन यादव 28 अप्रैल को अभियान का शुभारंभ करेंगे. जानें पूरी योजना...

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कान्हा के घास मैदानों में फिर दिखेंगे जंगली भैंसे. (Photo: AI-generated) कान्हा के घास मैदानों में फिर दिखेंगे जंगली भैंसे. (Photo: AI-generated)

aajtak.in

  • बालाघाट,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

मध्यप्रदेश के वन्यजीव इतिहास में 28 अप्रैल का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. 'टाइगर' और 'चीता' स्टेट के बाद अब मध्यप्रदेश अपनी धरती पर 'जंगली भैंसों' को दोबारा बसाने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव बालाघाट के सूपखार क्षेत्र में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़कर इस अभियान का आगाज करेंगे.

तकरीबन 100 साल पहले मध्यप्रदेश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को वापस लाने के लिए असम सरकार के साथ एक खास समझौता हुआ है.

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इसके तहत पहले चरण में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से 4 भैंसों (3 मादा, 1 नर) का दल कान्हा पहुंच रहा है. 'फाउंडर पॉपुलेशन' के रूप में कुल 50 जंगली भैंसों को लाने का लक्ष्य है, जिनमें से इस सीजन में 8 भैंसें लाई जाएंगी. काजीरंगा और कान्हा के विशेषज्ञ डॉक्टरों और अधिकारियों की टीम इस पूरे 'ट्रांसलोकेशन' की निगरानी कर रही है.

MP-असम के बीच वाइल्ड लाइफ एक्सचेंज
मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के सीएम हिमंता विश्व सरमा के बीच हुए समझौते के तहत दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान होगा.

असम से MP आएगा: जंगली भैंसें और गैंडों (Rhino) के दो जोड़े, जिन्हें भोपाल के वन विहार में रखा जाएगा.

MP से असम जाएगा: 3 बाघ (Tigers) और 6 मगरमच्छ. 

कान्हा ही क्यों बना पहली पसंद?
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के अध्ययन के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व का सूपखार और टोपला क्षेत्र जंगली भैंसों के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है. यहां के बड़े घास के मैदान (Grasslands) और प्रचुर जल स्रोत इस प्रजाति के फलने-फूलने के लिए अनुकूल हैं.

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विलुप्ति की कगार से वापसी
मध्यप्रदेश में आखिरी बार 1979 में सूपखार क्षेत्र में एक जंगली भैंसा देखा गया था. शिकार और आवास की कमी के कारण यह प्रजाति यहां खत्म हो गई थी. वर्तमान में इनकी मुख्य आबादी केवल असम में है. इस पहल से न केवल एक दुर्लभ प्रजाति बचेगी, बल्कि कान्हा का इकोसिस्टम भी सशक्त होगा.

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