10 साल पहले हुआ था तलाक, दो बेटियों की खातिर फिर एक हुआ परिवार; इस कहानी ने छुआ दिल

MP News: मध्य प्रदेश के दतिया में सखी वन स्टॉप सेंटर की काउंसलिंग से कोर्ट मैरिज के जरिए तलाक ले चुका जोड़ा 10 साल बाद फिर एक हुआ. बेटियों के भविष्य के लिए पति ने पत्नी उर्मिला को दोबारा स्वीकारा. जानिए पूरी प्रेरक कहानी...

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तंगहाली के बीच कलेक्टर की जनसुनवाई ने बदल दी महिला की किस्मत.(Photo:ITG) तंगहाली के बीच कलेक्टर की जनसुनवाई ने बदल दी महिला की किस्मत.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • भोपाल/दतिया,
  • 20 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:32 AM IST

मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लोगों का दिल छू लिया है. यहां 10 साल पहले कानूनी तौर पर अलग हो चुके पति-पत्नी अपनी दो बेटियों की खातिर फिर से एक हो गए. यह संभव हुआ महिला और बाल विकास विभाग के 'वन स्टॉप सेंटर (सखी)' की काउंसलिंग और समझाइश से. इस अनूठी पहल ने न सिर्फ दो मासूम बच्चियों को उनके पिता का साया और हक वापस दिलाया, बल्कि सालों पहले टूट चुके एक वैवाहिक रिश्ते में फिर से खुशियों के रंग भर दिए.

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यह भावुक कर देने वाली कहानी दतिया की रहने वाली 36 वर्षीय उर्मिला (बदला हुआ नाम) की है. करीब 10 साल पहले पति से कानूनी रूप से तलाक होने के बाद उर्मिला अपनी दो मासूम बच्चियों के साथ मायके में शरण लिए हुए थी.

उर्मिला के वृद्ध पिता मजदूरी करके किसी तरह अपनी बेटी और दोनों नातिनों का पेट पाल रहे थे. तंगहाली के बावजूद उन्होंने बच्चियों को अच्छे स्कूल में पढ़ाया. लेकिन वर्तमान समय में कमरतोड़ महंगाई और बढ़ती उम्र के कारण वृद्ध पिता के लिए पूरे परिवार का खर्च उठाना नामुमकिन हो गया. अपनी बच्चियों के भविष्य को अंधकार में डूबता देख, उर्मिला ने हिम्मत जुटाई और दतिया कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाते हुए एक शिकायती पत्र सौंपा.

जब 'सखी' सेंटर पहुंची उर्मिला की सिसकियां
दतिया के जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार उपाध्याय के माध्यम से यह संवेदनशील मामला तुरंत 'वन स्टॉप सेंटर' को ट्रांसफर किया गया. सेंटर पर जब उर्मिला को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया, तो 10 साल का दर्द और बेटियों के भविष्य की चिंता उसकी आंखों से आंसुओं के रूप में बह निकली.

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'क्या वो हमें स्वीकार करेंगे...?'

उर्मिला की सबसे बड़ी शंका यह थी कि क्या कानूनी तलाक के इतने सालों बाद उसका पति उसे और उसकी बेटियों को स्वीकार करेगा? वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक रीना गौतम ने उर्मिला को ढांढस बंधाया और हर संभव प्रयास कर उसका हक दिलाने का अटूट विश्वास दिलाया.

यह भी पढ़ें: फाड़ फेंके तलाक के कागज और लिपटकर खूब रोए... अदालत की चौखट पर जुड़ी शिखा और सौरभ के दिल की डोर

वन स्टॉप सेंटर की टीम ने स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मदद से उर्मिला के पति और उसके परिवारजनों को दफ्तर आमंत्रित किया. काउंसलिंग के शुरुआती दौर में पति ने 10 साल पुराने अदालत के तलाक के कानूनी दस्तावेज पेश किए. तकनीकी और कानूनी रूप से यह रिश्ता सालों पहले खत्म हो चुका था, लेकिन वन स्टॉप सेंटर की टीम ने हार नहीं मानी.

विभाग के अधिकारियों और काउंसलिंग टीम ने कड़े वैधानिक रुख के बजाय बेहद संवेदनशील तरीके से 'संयुक्त काउंसलिंग' का रास्ता चुना. उन्होंने पति और उसके भाइयों को दोनों मासूम बच्चियों के भरण-पोषण, उनकी उच्च शिक्षा और एक सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी का अहसास कराया. टीम ने समझाया कि माता-पिता के विवाद में इन मासूम बच्चियों का क्या कसूर?

लौट आईं खुशियां, नम आंखों से विदा हुआ परिवार
इस मैराथन काउंसलिंग और मानवीय समझाइश का असर यह हुआ कि पति और उसके परिवार का दिल पूरी तरह पिघल गया. पति न सिर्फ 10 साल पुराने कानूनी तलाक को भुलाकर उर्मिला को दोबारा पत्नी के रूप में स्वीकार करने को सहर्ष तैयार हुआ, बल्कि उसने दोनों बेटियों की पढ़ाई लिखाई और उनके उज्ज्वल भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उठाने की लिखित सहमति दे दी.

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10 साल से मायूसी और अंधकारमयी जीवन जी रही उर्मिला का चेहरा उम्मीद की एक नई किरण से खिल उठा. वन स्टॉप सेंटर के जिस दफ्तर में कभी रिश्तों के टूटने की कहानियां सुनी जाती थीं, वहां शुक्रवार को यह परिवार एक-दूसरे का हाथ थामकर, खुशी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हुआ. जाते-जाते उर्मिला ने नम आंखों से दतिया प्रशासन और वन स्टॉप सेंटर (सखी) की पूरी टीम का बार-बार आभार व्यक्त किया.

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