देश की सबसे लंबी 'जल सुरंग' तैयार, नर्मदा का पानी पहुंचेगा विंध्य; 6 जिलों के 1450 गांवों को मिलेगा सिंचाई का लाभ

MP के कटनी जिले में देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है. जिले के स्लीमनाबाद में बनी तकरीबन 12 किलोमीटर लंबी इस टनल में अब सिर्फ दो मीटर खुदाई बाकी है. इसके बाद ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू होगा और पहली बार बरगी बांध का पानी बिना किसी पंप या लिफ्ट के विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा.

Advertisement
जल सुरंग से 5 जिलों की कृषि भूमि होगी सिंचित.(Photo:ITG) जल सुरंग से 5 जिलों की कृषि भूमि होगी सिंचित.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • कटनी,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:31 PM IST

मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद जल सुरंग अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. कटनी जिले में बन रही करीब 11.952 किमी लंबी यह सुरंग देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से सबसे जटिल जल सुरंग मानी जा रही है. मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को परियोजना का जायजा लेंगे.

यह सुरंग केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि विंध्य पर्वतमाला को भेदकर नर्मदा के पानी को सीधे सोन नदी के कछार तक पहुंचाने वाली देश की अनूठी इंजीनियरिंग मिसाल है. इसके शुरू होते ही विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के 1450 गांवों के लाखों किसानों की जिंदगी में समृद्धि और खुशहाली का नया सवेरा आएगा.

Advertisement

पौराणिक विरह को मिटाएगा यह 'आधुनिक महासेतु'
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरकंटक से निकलने वाली मां नर्मदा और सोनभद्र विपरीत दिशाओं में बहकर हमेशा के लिए एक-दूसरे से जुदा हो गए थे. सरकार ने इसी प्राचीन विरह को मिटाने और विंध्य की सदियों से प्यासी धरती को सींचने के लिए इस परियोजना को अपना 'ड्रीम प्रोजेक्ट' बनाया. उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप, लगातार ऑन-द-स्पॉट फैसलों और त्वरित वित्तीय स्वीकृतियों के बल पर 17 सालों से अटकी इस महा-परियोजना को रिकॉर्ड रफ्तार मिली है और अब टनल में मात्र अंतिम एक मीटर का 'ब्रेक-थ्रू' शेष रह गया है. 

जब अमेरिकी मशीन भी हो गई पस्त 
विंध्य की 40 मीटर ऊंची कठोर चट्टानों और जमीन से करीब 30 मीटर नीचे चल रहे इस महा-अभियान में कदम-कदम पर मुश्किलें थीं. मार्बल, कठोर लाइमस्टोन और डोलोमाइट की मजबूत चट्टानों के साथ-साथ टनल के भीतर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक होने वाले पानी के रिसाव ने काम को रोक दिया था. एक समय तो ऐसा आया जब पूर्व में काम कर रही भारी-भरकम अमेरिकी मशीन भी टूटकर पस्त हो गई थी.

Advertisement

ऐसे नाजुक मोड़ पर अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक को मैदान में उतारा गया. घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे से गुजरने के बावजूद इस टनल को बिना किसी जान-माल के नुकसान के बेहद सुरक्षित तरीके से पूरा कर लिया गया.

विंध्य के इन 5 जिलों को मिलेगा नया जीवन
इस महा-सुरंग का व्यास 10.14 मीटर है. टनल के पूरी तरह क्रियाशील होते ही बरगी दायीं तट मुख्य नहर के जरिए पानी सीधे खेतों में पहुंचेगा, जिससे इन जिलों की सूखी भूमि लहलहा उठेगी:-

कटनी जिला:- 21,823 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी.

मैहर जिला:- 54,227 हेक्टेयर भूमि को मिलेगा पानी.

सतना जिला:- सबसे अधिक एक  लाख 4 हजार 970 हेक्टेयर भूमि हरी-भरी होगी.

रीवा जिला:- 3084 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा.

पन्ना जिला:- 448 हेक्टेयर सूखी भूमि को जीवन मिलेगा.

सरकार ने तैयार किया रोडमैप
इस परियोजना का काम कछुआ चाल से निकलकर सुपरफास्ट गति में आ चुका है. वर्तमान में इस प्रोजेक्ट का 96.66% भौतिक कार्य पूर्ण हो चुका है. सरकार के रोडमैप के अनुसार, मार्च 2026 तक 44 हजार 160 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता को धरातल पर उतारा जा चुका है. इसके बाद दिसंबर 2026 तक 87 हजार 433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक कुल 1 लाख 54 हजार 693 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की पूरी व्यवस्था कर ली जाएगी. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »