ये पायलट पर बाल्टी भरकर पानी क्यों डाल रहे हैं? इसका क्या मतलब है?

सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो वायरल होते हैं, जिनमें किसी पायलट पर बाल्टी भरकर पानी डाला जाता है. यह कोई मजाक या सजा नहीं, बल्कि एविएशन सेक्टर की एक पुरानी परंपरा है. माना जाता है कि इसकी शुरुआत सैन्य विमानन और शुरुआती फ्लाइट ट्रेनिंग कार्यक्रमों से हुई थी. 

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पहली सोलो फ्लाइट पूरी करने, कैप्टन बनने या रिटायरमेंट जैसे खास मौकों पर पायलट की उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए यह रस्म निभाई जाती है. ( Photo: ITG) पहली सोलो फ्लाइट पूरी करने, कैप्टन बनने या रिटायरमेंट जैसे खास मौकों पर पायलट की उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए यह रस्म निभाई जाती है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:02 AM IST

सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी तस्वीरें और वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिनमें किसी पायलट पर लोगों को बाल्टी भर-भरकर पानी डालते हुए देखा जाता है. पहली नजर में यह किसी मजाक या अजीब रस्म जैसा लग सकता है, लेकिन हकीकत में इसके पीछे एविएशन सेक्टर की एक खास परंपरा छिपी होती है. इस परंपरा को वॉटर सैल्यूट या बकेट वॉटर सेलिब्रेशन कहा जाता है, जो किसी पायलट की बड़ी उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है. 

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दरअसल, जब कोई पायलट अपनी ट्रेनिंग पूरी करके पहली बार कमर्शियल फ्लाइट का  कैप्टन बनता है, या फिर अपनी आखिरी उड़ान पूरी करके रिटायर होता है, तो उसके साथी और सहकर्मी इस खास अंदाज में उसका सम्मान करते हैं. कई एयरलाइंस और फ्लाइंग स्कूलों में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.

आखिर पानी डालने की परंपरा क्यों शुरू हुई?
एविएशेन फील्ड में पानी को शुद्धता, नई शुरुआत और उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है. जब कोई पायलट अपने करियर के एक नए स्टेप में प्रवेश करता है, तो उसके सम्मान में यह रस्म निभाई जाती है. यह ठीक उसी तरह है जैसे किसी खिलाड़ी के बड़ी जीत हासिल करने पर उस पर शैंपेन उड़ेली जाती है. फ्लाइंग स्कूलों में जब कोई छात्र पायलट सफलतापूर्वक अपनी ट्रेनिंग पूरी कर लेता है और उसे लाइसेंस मिल जाता है, तो उसके साथी ट्रेनर और दोस्त उस पर पानी डालकर खुशी मनाते हैं. इसका मतलब होता है कि उसने एक कठिन और चुनौतीपूर्ण सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है.

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इस परंपरा की शुरुआत कहां से हुई, इसका कोई एक निश्चित रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. माना जाता है कि इसकी शुरुआत 20वीं सदी के मध्य में मिलिट्री एविएशन या शुरुआती फ्लाइट ट्रेनिंग प्रोग्राम्स से हुई थी. धीरे-धीरे यह परंपरा दुनिया भर के फ्लाइट स्कूलों में फैल गई और आज यह किसी छात्र पायलट की बड़ी उपलब्धि का जश्न मनाने का एक लोकप्रिय तरीका बन चुकी है. 

एयरपोर्ट पर फायर ब्रिगेड वाले फ्लाइट पर पानी क्यों छोड़ते हैं?
कई बार आपने तस्वीरों में देखा होगा कि किसी फ्लाइट के ऊपर एयरपोर्ट की फायर ब्रिगेड की गाड़ियां दोनों तरफ से पानी की बौछार करती हैं और फ्लाइट उसके नीचे से गुजरता है. इसे भी वॉटर कैनन सैल्यूट कहा जाता है. यह सम्मान आमतौर पर किसी पायलट की लास्ट फ्लाइट, किसी नई एयरलाइन की पहली उड़ान, किसी नए विमान के स्वागत या किसी विशेष उपलब्धि के मौके पर दिया जाता है. दुनिया भर के एयरपोर्ट्स पर यह परंपरा काफी लोकप्रिय है.

क्या हर पायलट के साथ ऐसा होता है?
नहीं, हर पायलट के साथ यह रस्म नहीं निभाई जाती. आमतौर पर यह खास मौकों पर ही की जाती है. जैसे पहली सोलो फ्लाइट पूरी करना, कैप्टन बनना, किसी विशेष उपलब्धि को हासिल करना या फिर रिटायरमेंट के समय. हालांकि अलग-अलग देशों और एयरलाइंस में इस परंपरा को मनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है. कहीं पानी की बाल्टी डाली जाती है, तो कहीं फायर ट्रकों से पानी की बौछार के जरिए सम्मान दिया जाता है.

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सोशल मीडिया पर क्यों होते हैं वायरल?
ऐसे वीडियो देखने में काफी दिलचस्प लगते हैं. एक पायलट यूनिफॉर्म में खड़ा होता है और अचानक उसके ऊपर कई बाल्टियां पानी उड़ेल दी जाती हैं. जो लोग इस परंपरा के बारे में नहीं जानते, उन्हें यह अजीब लग सकता है. यही वजह है कि ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाते हैं और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इसके पीछे का कारण क्या है.
 

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