कभी सोचा है रेलवे प्लेटफॉर्म पर क्यों नहीं होती मेडिकल शॉप? ये है वजह

कभी आपने गौर किया है कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर दवाई की दुकान नहीं होती है... तो समझते हैं आखिर ऐसा क्यों होता है?

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रेलवे प्लेटफॉर्म पर मेडिकल शॉप को लेकर अलग-अलग नियम हैं. (Photo: AI Generated) रेलवे प्लेटफॉर्म पर मेडिकल शॉप को लेकर अलग-अलग नियम हैं. (Photo: AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST

जब भी आप ट्रेन से सफर करते होंगे तो आपने देखा होगा कि अब प्लेटफॉर्म पर सभी तरह की सुविधाएं मिल जाती हैं. प्लेटफॉर्म पर खाने पीने के सामान से लेकर किताबों तक सब मिल जाता है. लेकिन, कभी आपने गौर किया है कि स्टेशन पर दवाइयों की दुकानें नहीं होती हैं. शायद ही कोई ऐसा स्टेशन होगा, जहां दवाइयों के लिए अलग से दुकान होगी. तो क्या आप जानते हैं कि आखिर ऐसा है क्यों, स्टेशन पर मेडिकल जैसी सर्विस की दुकानें क्यों नहीं होती हैं? तो आज समझते हैं कि स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर मेडिकल शॉप्स क्यों नहीं होती है. 

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मेडिकल शॉप्स को लेकर नियम हैं क्या?

आपको बता दें कि जिस तरह रेलवे प्लेटफॉर्म पर दूसरी दुकानें अलॉट होती हैं, वैसे ही पहले मेडिकल शॉप्स भी अलॉट हुआ करती थीं. रेलवे के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, साल 2001 में रेलवे बोर्ड ने यह स्पष्ट किया था कि डॉक्टर की सुविधा वाले रेलवे स्टेशनों पर केमिस्ट स्टॉल के लिए अधिकतम 108 वर्ग फुट जगह पर्याप्त मानी जाएगी.

वहीं, अगर केवल दवा बेचने के लिए बुकस्टॉल के अंदर एक छोटा मेडिसिन कॉर्नर बनाया जाता है, तो उस पर 108 वर्ग फुट की न्यूनतम/अधिकतम जगह वाली शर्त लागू नहीं होगी. इसका मतलब पहले दवा की दुकान के लिए जगह दी जाती थी. 

लेकिन, अब रेलवे की ओर से सिर्फ केमिस्ट दुकान नहीं खोली जाती. इसके लिए सरकार ने कुछ साल पहले नियम बदल दिए हैं

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रेलवे के नए नियमों के अनुसार, अब दवाइयों को मल्टी पर्पज स्टॉल में बदल दिया गया है. पहले तीन तरह की दुकानें खोली जाती थीं, जिसमें बुकस्टॉल, केमिस्ट स्टॉल और अलग-अलग सामानों की दुकान शामिल थीं.

लेकिन, इससे प्लेटफॉर्म पर भीड़ होती थी और यात्रियों के लिए जगह कम बचती थी. ऐसे में अब तीनों दुकानों का एक में शामिल करके मल्टी पर्पज स्टॉल खोले जा रहे हैं. यानी अब स्टेशन पर दवा की दुकान की  जगह एमपीएस होंगे. 

इन स्टॉल्स पर डॉक्टर की पर्ची के बिना बिकने वाली आम दवाइयां बिकेंगी. ये इन दुकानों पर ही बेची जा सकेगी. साथ ही अब सिर्फ नई दवा की दुकान के लिए स्पेस नहीं दिया जाएगा. लेकिन, इन नियमों के अलावा अब सरकार कई स्टेशन पर जन औषधि केंद्र खोलने पर काम कर रही है. वहीं, ए वन स्टेशन पर भी हेल्थ सुविधाओं  को लगातार बेहतर करने पर काम कर रही है. अभी भारत में सिर्फ 21 स्टेशन हैं, जहां अलग से मेडिकल स्टोर काम कर रहे हैं. 

इमरजेंसी में क्या करें?

बता दें कि रेलवे की ओर से टीटीई, ट्रेन गार्ड/सुपरिंटेंडेंट, स्टेशन मास्टर आदि को प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दी जाती है. सभी रेलवे स्टेशनों पर पास के अस्पतालों और डॉक्टरों की लिस्ट और उनके नंबर रहते हैं. ऐसे में आप उनकी मदद ली जा सकती है और ट्रेन के साथ स्टेशन पर मेडिकल बॉक्स भी दिए जाते हैं. 

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